ढाई लाख में 30 स्क्वेयर मीटर में घर बनाने का मॉडल, प्रैक्टिकल स्टडी के लिए डिजाइन किया इंस्टीट्यूट , September 15, 2020 at 06:04AM

एनआईटी के आर्किटेक्चर डिपार्टमेंट में फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स ने अपना थिसिस जमा किया, जिसमें स्टूडेंट्स ने अलग-अलग तरह के इनोवेटिव आइडिया बताया। अनन्या झा ने पीएम आवास योजना के अंतर्गत बनाए जाने वाले मकान को बहुत कम खर्च में बनाने का मॉडल प्रजेंट कर और विकास नारा ने प्रैक्टिकल स्टडी पर फोकस्ड आर्किटेक्चर इंस्टीट्यूट डिजाइन प्रजेंट करके फर्स्ट रहे। वहीं पल्लवी सेलुकर ने टूरिज्म और हैंडलूम स्पेस बनाकर सेकंड और निधि ने स्पेस सेंटर का मॉडल बनाकर थर्ड पोजिशन पर रहीं। इसमें फर्स्ट को 25 हजार और सेकंड पोजिशन वाले स्टूडेंट्स को 15 हजार रुपए दिए जाएंगे।

इंस्टीट्यूट की डिजाइन देखकर पढ़ सकेंगे स्टूडेंट्स
विशाल नारा ने आर्किटेक्चर इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग डिजाइन की है। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग में आर्किटेक्चर की प्रैक्टिकल स्टडी के ऊपर फोकस करते हुए डिजाइन किया है। स्टूडेंट्स 5 साल में जो बिल्डिंग कंपोनेंट पढ़ते हैं उसे देख-समझ नहीं पाते हैं। लेकिन इसमें स्टूडेंट्स प्रैक्टिकली पढ़ सकेगा। स्टूडेंट्स बिल्डिंग कंपोनेंट को देखकर जान सकेगा कि कैसे बनता है, कैसे यूज होता है और उस जगह के लिए क्यों सही है। ये पूरा इंस्टीट्यूट की डिजाइन 3.28 हेक्टेयर के लिए की गई है। विशाल का यह डिजाइन वर्ल्ड आर्किटेक्चर कम्युनिटी के इंटरनेशनल आर्किटेक्चरल कॉम्पिटीशन में भी सलेक्ट हुआ है।

10 एकड़ में बनाया टूरिज्म प्लेस
पल्लवी सेलुकर ने डिजाइनिंग टेक्सटाइल टूरिज्म सेंटर बाय इंटेग्रेटिंग इंडोर आउटडोर स्पेस टॉपिक पर थिसिस बनाई जिसमें उन्होंने एक टूरिज्म स्पेस का मॉडल डिजाइन किया। टूरिज्म के लिए अट्रेक्टिव स्पेस और हैंडलूम को प्रमोट करने के लिए उन्होंने यह मॉडल 10 एकड़ स्पेस के अनुसार डिजाइन किया। जिसमें उन्होंने फूड जोन, हैंडलूम शॉप, म्यूजियम, शॉपिंग एरिना, एडमिन एरिया, ओएटी स्पेस, बच्चों के खेलने के लिए गार्डन डिजाइन किया। म्यूजियम में हैंडलूम बनाने का लाइव डेमोस्ट्रेशन है। वहीं पूरे एरिया के बीच में गांधीजी की स्टेच्यू भी। ये पूरा डिजाइन ओपन एरिया में था।

व्यक्ति ऑक्युपेशन और प्लाट की साइज के हिसाब से बनाए घर के 36 माॅड्यूल
अनन्या झा ने प्रधानमंत्री आवास योजना में बनने वाले मकान के लिए व्यक्ति के ऑक्युपेशन और प्लाॅट के साइज के हिसाब से 36 माॅडल प्रजेंट किए। उन्होंने बताया कि योजना के तहत जो पैसे मिलते हैं उसमें और पैसे मिलाने पड़ते हैं और घर के लिए एक ही प्लान होता है। लेकिन हर व्यक्ति की रिक्वायरमेंट अलग होती है। इसमें 30 स्क्वेयर मीटर में घर बनाने पर लगभग 3 से सवा 3 लाख रुपए खर्च आते हैं, लेकिन इस मॉडल से ढाई लाख में ही घर बना सकते हैं। वहीं घर में एनर्जी एफिशिएंट, नेचुरल वैन्टीलेशन, डे लाइटिंग, बिजली की खपत कम होगी। इसे डिजास्टर मैनेजमेंट का ध्यान रखकर डिजाइन किया गया है। उन्होंने बताया, एक साल रिसर्च किया। झारखंड बोकारो स्टील सिटी के तीन वार्ड की केश स्टडी की। उसके बाद दिल्ली, गुडगांव में फेमस आर्किटेक्ट द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट देखे। फिर मॉडल तैयार किया। अभी घर की छत सीमेंट से बनती है जिसमें 50 से 55 हजार रुपए खर्च आते हैं, लेकिन फर्निकुलर सेल यूज करने से 35 हजार में ही काम हो सकता है। इसमें थटर्रिंग, पेंट नहीं करना पड़ता है और गर्मी में ठंडा रहता है। दीवार बनाने के लिए एएसी ऑटोक्लेव्ड एरिएटेड कांक्रीट ब्लाॅक का यूज कर सकते हैं। इसका खर्च भी कम आएगा और घर को ठंडा रखेगा। मॉडल को मैंने यूजर और एनवायरमेंट के हिसाब से डिजाइन किया।



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Model of house building in 30 square meters in two and a half million, Institute designed for practical study


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