घुनघुट्टा डैम की नहरों में लगे 5 गेट में 3 गायब, 2 खराब लीकेज ठीक करना मुश्किल, नहर टूटी तो फसल बर्बाद , September 25, 2020 at 06:07AM

घुनघुट्टा डैम से निकलने वाली नहरों में लगे गेट के क्रॉस रेगुलेटर कई साल से खराब है। इससे नहर में पानी रोककर आगे हिस्से की मरम्मत नहीं हो पा रही है। अब नहरों से पानी लीकेज हो रहा है और नहर के टूटने से किसानों को नुकसान हो सकता है। खेती बर्बाद हो सकती है और बाद में मरम्मत कराने में अधिक रुपए खर्च होंगे, लेकिन सिंचाई विभाग के इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल ब्रांच के अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं।
दैनिक भास्कर पड़ताल में पता चला कि सिंचाई विभाग द्वारा श्याम घुनघुट्टा परियोजना के तहत बने डैम से निकलने वाली बांया तट मुख्य नहर में 5 जगह पर गेट हैं, जिसके क्रॉस लेगुलेटर या तो गायब हैं या खराब हो गए हैं। इसके बाद भी उन्हें सही नहीं किया जा रहा है। अब इसके कारण रबी और ग्रीष्मकालीन खेती में नहर का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता है। वहीं ऐसे में डेम से अधिक पानी छोड़ना पड़ता है, जिससे नहर की दीवार पर असर पड़ता है। इसके साथ ही नहर से होकर निकली छोटी नहरों में भी पानी को जाने से नहीं रोक पाते हैं। ऐसा हाल तब है जब हर साल नहर के गेटों की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं।

बांध की दीवार कमजोर, कई बार इंजीनियर ने अफसरों को लिखा पत्र
घुनघुट्टा बांध की दीवार भी कमजोर हो गई है। कई जगह लीकेज था, जिसे ठीक करा लिया गया है। इसके लिए अधिकारियों को कई बार संबंधित इंजीनियर ने लिखा था। यहां रेडियल गेट में भी लीकेज था। बता दें कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण बड़ी दुर्घटना होती है। अगर यहां की नहरें टूटती हैं तो फसलों को नुकसान होगा।

लीकेज से 20 गांवों में नहीं पहुंच पाया पानी अब तक
80 के दशक में घुनघुट्टा डैम का निर्माण किया गया था। इससे इलाके के 12 हजार हेक्टेयर खेतों में सिचाई की क्षमता है। वहीं अंबिकापुर शहर में इसी डैम से अमृत मिशन के तहत पेयजल की नई योजना शुरू हुई है। डैम और नहर के रख-रखाव में ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में परेशानी बढ़ेगी। क्योंकि गेट खराब होने के कारण 20 से अधिक गांवों में विभाग अब तक पानी पहुंचा ही नहीं है। करोड़ों रुपए खर्च के बाद भी सिंचाई की परियोजना फेल है।

गेट चोरी हो रहे, अब बारिश के बाद कराएंगे मरम्मत
सिंचाई विभाग के इलेक्ट्रिकल और मेकेनिकल ब्रांच के एडीओ रामकमल भगत ने बताया कि पिछले साल मरम्मत की गई थी, लेकिन गेट लगाने पर चोरी कर लिया जाता है। एक गेट 50 से 70 हजार में आता है। अब बरसात के बाद मरम्मत कराया जाएगा।



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