किरण ने घर में बनवाया स्टूडियाे, 5 महीने में रिकाॅर्ड किए 300 गाने, नीलिमा पेंशन से कर रहीं हैं साेशल वर्क , October 01, 2020 at 05:53AM

काेराेना वायरस की वजह से शहर के ज्यादातर बुजुर्गाें की जिंदगी घर तक सिमटकर रह गई है। डब्ल्यूएचओ से लेकर देश और दुनिया के कई एक्सपर्ट्स ने संक्रमण से बचने के लिए बुजुर्गाें काे घर में ही रहने की सलाह दी है। वहीं, कुछ बुजुर्ग ऐसे भी हैं जाे आपदा के इस दाैर में लाेगाें की मदद करने के अलावा सालाें पुराने अपने शाैक भी पूरे कर रहे हैं। 60 साल की नीलिमा बंछाेर पेंशनर हैं। काेराेनाकाल में वे पेंशन की 20 से 25 प्रतिशत रकम जरूरतमंदाें काे राशन देने और राेजगार शुरू करने में मदद करने के लिए खर्च कर रही हैं। वहीं, 66 साल के किरण शर्मा फार्मिंग और म्यूजिक का शाैक पूरा कर रहे हैं। डेढ़ एकड़ में खुद फल और सब्जियां उगाने के साथ ही उन्हाेंने लगभग एक लाख रुपए से घर में स्टूडियाे बनवाया है, जिसमें पिछले पांच महीनाें में बाॅलीवुड के 300 से ज्यादा पुराने गानाें की अपनी आवाज में रिकाॅर्डिंग कर चुके हैं। पढ़िए दाेनाें की कहानी।

किरण राेज दाे गाने करते हैं रिकाॅर्ड, डेढ़ एकड़ में फल-फूल और सब्जियां भी उगा रहे
जयस्तंभ चौक से 12 किलोमीटर दूर खारून नदी के किनारे धुरवा में रहने वाले किरण शर्मा छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ के जीएम रह चुके हैं। स्कूल टाइम से गाने का शौक रहा है। पहले पढ़ाई और फिर ऑफिस के कामाें की वजह से वे इस शाैक काे कभी समय नहीं दे पाए। रिटायरमेंट के बाद काेराेनाकाल में उन्हाेंने अपने घर में एक लाख रुपए से छोटा स्टूडियो डेवलप किया है, जिसमें हाई क्वालिटी साउंड सिस्टम, म्यूजिक रिकाॅर्डर, गिटार, ट्रैक जैसी सुविधाएं हैं। किरण रोजाना पुरानी फिल्मों के दाे गाने रिकॉर्ड करते हैं। इसके लिए वे काफी देर रिहर्सल भी करते हैं। उन्हाेंने बताया, कोरोना के कारण घर से बाहर निकलना बंद हो गया था। ऐसे में मैंने तय किया कि डर-डर कर जीने के बजाय घर पर ही रहकर अपनी हॉबी को समय दूंगा। रोज गाने रिकॉर्ड कर अपने दोस्तों और रिलेटिव्स को साेशल मीडिया के जरिए भेजता हूं। किरण की दूसरी हॉबी है फार्मिंग और गार्डनिंग। लाॅकडाउन के दाैरान ही उन्हाेंने लगभग डेढ़ एकड़ में गार्डन डेवलप किया है। इसमें फल-फूल के अलावा उन्हाेंने सब्जियां भी उगाई हैं।

जरूरतमंदाें तक पहुंचा रहीं राशन, युवाओं काे ट्रेनिंग दिलवाकर बना रहीं हैं आत्मनिर्भर

कबीर नगर में रहने वाली नीलिमा बंछोर पिछले 25 सालों से साेशल वर्क कर रही हैं। स्लम एरिया के जरूरतमंद बच्चों काे पढ़ने में मदद करती हैं। जरूरतमंद युवाओं काे उनके हुनर के अनुसार ट्रेनिंग देने में आर्थिक मदद भी करती हैं, ताकि व्यवसाय कर वे आत्मनिर्भर बन सकें। उम्र ज्यादा हाेने के बावजूद काेराेनाकाल में भी वे लगातार जरूरतमंदाें की मदद कर रही हैं। लाॅकडाउन में आर्थिक तंगी की वजह से जिनके घर अनाज तक नहीं था, नीलिमा ऐसे परिवाराें काे राशन उपलब्ध करवा रहीं हैं। ये सब वाे करती हैं पति के देहांत के बाद मिलने वाली पेंशन से। उन्हें प्रतिमाह लगभग 20 हजार रुपए पेंशन मिलती है, जिसमें से 20 से 25 प्रतिशत रकम वे साेशल वर्क पर खर्च करती हैं। फिट रहने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए लाेगाें काे मेडिटेशन की ऑनलाइन ट्रेनिंग भी दे रही हैं। उन्हाेंने बताया, विपत्ति के इस दाैर में स्लम एरिया जाकर लाेगाें काे राशन बांटने के अलावा जिसकाे भी तकलीफ में देखा, उसकी मदद करने की काेशिश की।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
किरण शर्मा ।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2GpQuoC

0 komentar