हर 5 किमी में जवानों के कैंप ताकि सड़कें बनें, कोर नक्सल एरिया तक पैठ बनाने मांगी फोर्स , September 07, 2020 at 06:11AM

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के विरुद्ध चल रही लड़ाई में अब कोर एरिया में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ ऑपरेशन के लिए लांचिंग पैड की सख्त जरूरत है। अतिरिक्त फोर्स मिलने की स्थिति में जगह-जगह कैंप खोलकर उनकी सुरक्षा में सड़कें व पुल बनाए जाएंगे। इस तरह नक्सली निर्माण का विरोध नहीं कर पाएंगे।

सड़क बनने के बाद लोगों की लगातार आवाजाही से आईईडी लगाना आसान नहीं होगा, जबकि सुरक्षा बलों को आने-जाने में आसानी होगी। जंगल के बीच में कैंप होने की स्थिति में ऑपरेशन के दौरान जवानों के लांचिंग पैड ज्यादा होंगे। उनके लिए जरूरी हथियार या मदद भी आसानी से पहुंच पाएगी। इसीलिए सीएम भूपेश बघेल ने एक बार फिर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पूर्व में स्वीकृत सीआरपीएफ की 7 बटालियन उपलब्ध कराने की मांग की है, जिससे नक्सलियों के खिलाफ चल रही लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया जा सके।

फिलहाल बस्तर में केंद्रीय सुरक्षा बलों की 45 बटालियनें तैनात हैं। इनके अलावा प्रदेश की फोर्स यानी सीएएफ, एसटीएफ और डीआरजी के जवान भी हैं। नक्सलियों से लड़ाई अब कोर एरिया में सिमटती जा रही है। इसमें बासागुड़ा, भेज्जी, दोरनापाल, किष्टाराम और जगरगुंडा का हिस्सा है। इसके अलावा महाराष्ट्र बॉर्डर से लगे छोटे डोंगर, ओरछा, बांदे का हिस्सा है, जहां नक्सलियों के ट्रेनिंग कैंप और बटालियन हैं। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप (डीआरजी) की बड़ी भूमिका है। कभी नक्सलियों के साथ रहे ये लड़ाके अब पुलिस की ओर से आर-पार की लड़ाई में शामिल हैं। यही वजह है कि इन्हें नक्सलियाें की सभी चाल का पता है।

हालांकि सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि किसी एक सूचना पर नक्सलियों का पीछा करते हुए जंगल के काफी अंदर जाने के बाद वे थक जाते हैं और तत्काल मदद नहीं मिलती। जंगल के भीतर कैंप खुलने से उसका लांचिंग पैड की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। एक वजह यह भी है कि नक्सली कैंप खुलने का विरोध करते हैं। हालांकि कई ऐसे भी इलाके हैं, जहां के लोगों ने कैंप खुलने के बाद मिलने वाले फायदाें के कारण अपनी ओर से कैंप खोलने की मांग की है। इस दिशा में भी पुलिस कोशिश कर रही है।

छत्तीसगढ़ के 8 जिलों में सबसे ज्यादा नक्सलियों का खौफ

  • 14 जिले नक्सल प्रभावित हैं छग में।
  • 8 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं इससे।
  • 45 बटालियन केंद्रीय सुरक्षा बलों की।
  • 7 नई बटालियन छग और आएंगी

जगरगुंडा तक तीन ओर से पहुंच बनाने की तैयारी

नक्सल मोर्चे पर सरकार की तैयारी बीजापुर, दोरनापाल और अरनपुर से जगरगुंडा को जोड़ने की है। इस बीच में सड़क व पुल-पुलिया के कई काम चल रहे हैं, लेकिन नक्सलियों के कारण काम प्रभावित होता है। कोर एरिया होने के कारण लोग भी नक्सलियों के प्रभाव में हैं। इन इलाकों से पुलिस और सुरक्षा बल भी दूर हैं। लोग को शौचालय, राशन, आवास, जन धन खातों में पैसे जैसी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। सड़कें बनेंगी तो लोग विकास से जुड़ेंगे।

बाकी योजनाएं भी लोगों तक पहुंच पाएंगी। इस तरह नक्सलियों के खिलाफ सरकार दोहरी लड़ाई में सरकार व पुलिस मजबूत होगी। बता दें कि लगातार दबाव के बाद अब नक्सली महिलाओं के नाम पर आधार कार्ड बनाने की अनुमति दे रहे हैं, जिससे राशन कार्ड बने और उन्हें राशन मिल सके। हालांकि अभी पुरुषों को आधार कार्ड बनाने नहीं दिया जा रहा है। सड़कें व पुल-पुलिया बनने से लोग भी सरकार से जुड़ेंगे।

बस्तर में आक्रामक पुलिसिंग की रणनीति

स्टेट को-ऑर्डिनेशन कमेटी की मीटिंग में मैदानी हिस्साें की तरह बस्तर में आक्रामक पुलिसिंग की रणनीति बनाई गई है। यानी अब शहरी हिस्साें में जिस तरह पुलिस चोरी, लूट जैसे अपराध में धरपकड़ करती है या आरोपियों के साथ बर्ताव करती है, उसी तरह बस्तर में भी नक्सल से जुड़े अपराध के अलावा बाकी अपराध में भी सख्ती करेगी। डीजीपी डीएम अवस्थी और सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी कुलदीप सिंह समेत अन्य अफसरों ने इस बात की चिंता जताई कि पुलिस या सुरक्षा बलों का फोकस नक्सलियों या उससे जुड़े अपराध पर होता है, बाकी में ढिलाई हो जाती है।



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