बिलासपुर में कुल 51 वेंटिलेटर 44 को जरूरत यानी काम चल रहा , September 27, 2020 at 07:38AM

बिलासपुर में कोरोना केस कम नहीं हो रहे हैं। मौतों के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं। सितंबर में जिले ने सबसे ज्यादा संक्रमण झेला है, और अभी झेल भी रहा है। जिले में दो सरकारी रेलवे और जिला चिकित्सालय यानी कोविड अस्पताल है। रेलवे में वेंटिलेटर नहीं हैं। जिला कोविड अस्पताल में 7 वेंटिलेटर हैं जो अक्सर भरे रहते हैं। पूरी सरकारी व्यवस्था में सिर्फ जिला कोविड अस्पताल में ही गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था है।

सिम्स की बात करें तो यहां कोरोना मरीजों का इलाज नहीं किया जाता, लेकिन यहां सर्दी, खांसी, बुखार और जुकाम से पीड़ित मरीजों के लिए कोविड आइसोलेशन वार्ड है, जहां 10 वेंटिलेटर हैं। यहां संदेही मरीजों को भर्ती कर इलाज होता है, कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही उन्हें कोविड या फिर कहीं और रेफर कर दिया जाता है। आठ निजी अस्पतालों ने जब से कोविड की इलाज शुरू किया है तब से वेंटिलेटरों की संख्या बढ़ी है। फिलहाल तो काम चल रहा लेकिन हालात बिगड़े तो संभलना मुश्किल हो जाएगा।

सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रहते तो जिले में मौतों के आंकड़े और तेजी से बढ़ते। आठ निजी और दाे सरकरी को मिलाकर 10 अस्पतालों में 51 वेंटिलेटर हैं। जबकि जिले में एक्टिव केस 2175 हैं। 600 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। अन्य होम आइसोलेशन में हैं।

सिम्स अधीक्षक डॉक्टर पुनीत भारद्वाज ने दैनिक भास्कर को बताया कि कोरोना पीड़ित 100 में से औसत दो मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। बिना लक्षण वाले मरीज जल्दी ठीक हो जाते हैं। कुछ के सांस लेने में तकलीफ होती है, जिनका इलाज ऑक्सीजन पर चलता है और वे स्वस्थ हो जाते हैं। मुश्किल से दो फीसदी मरीजों को ही वेंटिलेटर की जरूरत है।

अधीक्षक ने जैसा बताया उस हिसाब से जिले में फिलहाल वेंटिलेटर से काम चल रहा है क्योंकि 2175 एक्टिव केस हैं, इसका 2 फीसदी निकालेंगे तो 44 मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत है, जबकि हमारे पास 51 वेंटिलेटर हैं। इनमें कुछ खाली भी हैं।

अपोलो में सिर्फ दो, सबसे ज्यादा महादेव अस्पताल में 11 वेंटिलेटर

सरकारी अस्पतालों की कमी को देखते हुए जिले के अधिकारियों ने निजी अस्पतालों को कोरोना पीड़ितों के इलाज के लिए आगे आने दबाव बनाया। आठ निजी अस्पताल कोविड का इलाज कर रहे हैं। आठों अस्पतालों में 44 वेंटिलेटर हैं जहां कोरोना मरीजों को इलाज चल रहा है। अपोलो में 2, महादेव 11, केयर एंड क्योर 6, श्री राम केयर 7, किम्स 2, आरबी 10, स्काई 4, एसकेबी 2 और जिला कोविड अस्पताल में के सात मिलाकर जिले में 51 वेंटिलेटर हैं। लगभग सभी वेंटिलेटर पर मरीजों का इलाज चलता रहता है।

10 फीसदी को वेंटिलेटर की जरूरत: सीएमएचओ

जबकि सीएमएचओ डॉक्टर प्रमोद महाजन ने 10 फीसदी कोरोना मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ता बताया है। इस हिसाब से देखा जाए तो औसत 217 मरीजों को वेंटिलेटर चाहिए, जबकि 51 वेंटिलेटर हैं यानी 166 मरीजों को जरूरत पड़ने के बाद भी वेंटिलेटर नहीं मिल रहा है।

हमारे पास अभी 10 वेंटिलेटर, जल्द 12 और शुरू होंगे

अधीक्षक ने बताया कि सिम्स में कोविड आइसोलेशन वार्ड है, जहां 10 वेंटिलेटर चालू हैं। यहां सर्दी, खांसी, बुखार और जुकाम सहित कोरोना संदेही का इलाज किया जाता है। कोरोना पॉजिटिव हाेते ही उन्हें कोविड अस्पताल या कहीं और रेफर कर दिया जाता है। 10 नए वेंटिलेटर की व्यवस्था की जा रही है। ऑक्सीजन लाइन बनाई का काम चल रहा है।

जल्द उसे मेन लाइन से जोड़कर 12 और वेंटिलेटर को चालू किया जाएगा। उन्होंने ये बताया कि वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या स्टाफ की कमी के कारण आ रही है। हमारे यहां हर दिन दो-तीन कर्मचारी संक्रमित हो रहे हैं। वर्तमान में नाम मात्र का स्टाफ बचा है, जिसके कारण काम पूरा प्रभावित हो रहा है। बचा कुचे कर्मचारी की पूरी व्यवस्था को बनाकर रखे हुए हैं।



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फाइल फोटो


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