छत्तीसगढ़ में 6 माह से न कोई प्रतियोगिता हुई न ट्रायल, कैंप को लेकर 35 खेल संघ भी असमंजस में, कई खिलाड़ी हो जाएंगे ओवरएज , September 18, 2020 at 06:12AM

सुमय कर | कोरोना के चलते पिछले छह महीने से छत्तीसगढ़ में खेल गतिविधियां ठप पड़ी हुई हैं। प्रतियोगिताएं कब शुरू होंगी, इसके बारे में भी कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है। प्रतियोगिताएं न होने की स्थिति में हजारों सब जूनियर, कैडेट, जूनियर, यूथ वर्ग में खेलने वाले खिलाड़ी परेशान हैं। उनका कहना है कि अगर प्रतियोगिताएं नहीं हुईं तो वह अपने आयु वर्ग में ओवरएज हो जाएंगे। वहीं दूसरी ओर राज्य के 35 खेल संघ भी इस संकट का सामना कर रहे हैं। मार्च से सितंबर के बीच स्कूल गेम्स के ब्लॉक, जिला और राज्य स्तरीय टूर्नामेंट हो जाया करते थे। नेशनल के लिए टीम का गठन भी कर लिया जाता था पर इस साल खेल कैलेंडर जीरो ईयर घोषित हो सकता है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी गेम्स को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। रविवि की ओर से हर साल गर्ल्स और ब्वॉयज कैटेगरी में 39 गेम्स में टीमें ऑल इंडिया और ईस्ट जोन चैंपियनशिप में भाग लेती थीं। लेकिन इस साल ना ही कोई टूर्नामेंट हुए और ना ही ट्रायल लिए गए। सत्र 2020-21 में खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के बारे में निश्चितता नहीं है।

समर कैंप से मिलते थे नए खिलाड़ी पर इस साल नहीं
छग हॉकी संघ के सचिव मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि हर खेल विभाग और संघ मिलकर अलग-अलग खेलों का समर कैंप लगाते थे। इससे हमें नए खिलाड़ी मिल जाते थे। हर जिले से लगभग 45 नए खिलाड़ी मिलते थे। जो नेशनल लेवल पर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करते थे। लेकिन इस साल समर कैंप नहीं होने से खेल जगत को भारी नुकसान हुआ है। सत्र 2019-20 में छह नेशनल चैंपियनशिप होने थे। लेकिन इस साल एक ही टीम नेशनल चैंपियनशिप खेल सकी। उसके बाद कोई टीम नहीं जा सकी। अब दिसंबर में फिर से टूर्नामेंट हो सकते हैं। ऐसा हुआ तो हम फिर से ट्रायल लेकर टीम भेजेंगे।

आर्चरी कैंप लगा, टूर्नामेंट नहीं
छत्तीसगढ़ आर्चरी संघ के सचिव कैलाश मुरारका ने बताया कि हर साल मिनी, सब जूनियर और सीनियर कैटेगरी में चार नेशनल नेशनल चैंपियनशिप हो जाया करते थे। लेकिन पैंडमिक की वजह से पूरा साल बर्बाद हो गया। 2019-20 में होने वाले दो नेशनल चैंपियनशिप के लिए छत्तीसगढ़ की टीम तैयार थी। खिलाड़ियों का कोचिंग कैंप रायपुर और बीजापुर में लगाया गया था। लेकिन लॉकडाउन होने की वजह से मुकाबले नहीं हो सके। अब अगर दिसंबर तक टूर्नामेंट होते हैं, तो कैंप में शामिल हुए खिलाड़ी ही नेशनल में जाएंगे। यदि टूर्नामेंट जनवरी से फरवरी के बीच में होते हैं, तो फिर से खिलाड़ियों का ट्रायल लिया जाएगा।

बैडमिंटन खिलाड़ी 6 माह से कोर्ट से बाहर, टाइटल छूटा
प्रदेश के बैडमिंटन खिलाड़ियों को भी कोरोना की वजह से सबसे बड़ा झटका लगा है। जून महीने से बैडमिंटन के रैंकिंग टूर्नामेंट शुरू हो जाते थे। बेहतर रैंकिंग होने पर नेशनल में मौका मिलता है। लेकिन इस साल टूर्नामेंट ही नहीं हुए तो रैंकिंग कैसे सुधरेगी। अंडर-19 डबल्स कैटेगरी में नंबर-1 पर काबिज प्रदेश के ईशान भटनागर अब दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। जबकि सीनियर कैटेगरी में वे सातवें स्थान पर काबिज हैं। दूसरी ओर जूनियर ग्रुप के खिलाड़ी अब नेशनल चैंपियनशिप में उसी एज ग्रुप में नहीं खेल सकेंगे। मार्च से लेकर सितंबर तक चार नेशनल चैंपियनशिप होने थे। जिसकी तारीख आगे बढ़ा दी गई है।

डिस्टेंसिंग के साथ खेल चुनौती
जानकारों के मुताबिक स्कूल गेम्स में लगभग 80 से ज्यादा खेल होते हैं। इसमें ब्लॉक से लेकर नेशनल तक की टीमें बनाई जाती हैं। लेकिन मौजूदा गाइडलाइन के हिसाब से काम करना स्कूल गेम्स में एक बड़ी चुनौती है। स्कूल खुलने के बाद ही टूर्नामेंट मुमकिन है। इसके अलावा पालक की सहमति के बाद ही जूनियर प्लेयर्स को मौका मिलेगा। स्कूल में गेम्स के लिए अब तक राज्य और केंद्र सरकार से कोई गाइडलाइन नहीं आई है। इस पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही स्कूल गेम्स पर कोई निर्णय लिया जाएगा।

जूनियर क्रिकेटरों के कई मौके मिस
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) डोमेस्टिक क्रिकेट नवंबर में शुरू कराने की योजना बना रहा है। लेकिन अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है। कोरोना के कारण घरेलू सत्र में देरी का मतलब है कि सिर्फ रणजी ट्रॉफी का आयोजन हो पाएगा, जिसमें 38 टीमें भाग लेंगी। इस साल विजय हजारे ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी या चैलेंजर ट्रॉफी का आयोजन नहीं हो पाएगा। इससे जूनियर खिलाड़ियों का कैरियर एक साल पीछे चला जाएगा।



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आउटडोर स्टेडियम से खिलाड़ी आउट तो मैदान पर उग आए कंटीले पौधे।


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