बीरगांव समेत 6 निकायों को मिल सकता है छह महीने का एक्सटेंशन, संविधान के 72वें संशोधन के तहत रखा जा सकता है 6 माह तक खाली , September 17, 2020 at 05:29AM

प्रदेश में यदि बीरगांव, रिसाली व भिलाई नगर निगमों के साथ यदि अन्य निकायों के चुनाव कोरोना की वजह से टलते हैं तो राज्य सरकार इन निकायों को छह महीने का एक्सटेंशन दे सकती है।
इस दौरान लोकतांत्रिक पद्धति से निकायों का गठन जरूरी होगा। इसके बाद भी यदि चुनाव कराने के हालात नहीं रहते हैं तो सरकार के पास विकल्प होगा कि वह इन निकायों की बॉडी को भंग करके इनके संचालन के लिए प्रशासक बैठा सकती है। जनगणना के स्थगित होने के बाद महत्वपूर्ण निकाय चुनावों पर भी कोरोना की आपदा से रोक लगने की पूरी संभावना है। जानकारों के मुताबिक प्राकृतिक आपदा या लॉ एंड आर्डर को लेकर नगरीय निकायों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के पद छह माह से अधिक खाली नहीं रखे जा सकते हैं। हालांकि इसके आगे की समय सीमा को लेकर संविधान मौन है। इसी का फायदा सरकारें या राजनीतिक उठाते रहे हैं। राजनीतिक रूप से अपने अनुकूल या प्रतिकूल समय को देखते हुए फैसले लिए जाते हैं।
दिसंबर में प्रेमनगर, सांरगढ़, खैरागढ़, शिवपुरचरचा समेत कई स्थानों पर भी निकायों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। जबकि बीरगांव, भिलाई का जनवरी में और रिसाली के पहले चुनाव होंगे।
जानकारों के मुताबिक पहले सरकारें बरसों चुनाव नहीं करा अपने मनपसंद अफसरों को निकायों को कमान सौंपकर उनका संचालन करती थीं। राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह कानून बना दिया गया कि किसी भी निकाय को बिना निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (निर्वाचित जनसभा) के छह महीने से ज्यादा खाली नहीं जा सकता। यह संविधान में 72 वां संशोधन था। राजधानी रायपुर में भी लंबे समय तक प्रशासक बैठते रहे हैं। इनमें अजय नाथ, गणेश शंकर मिश्रा, मनोज श्रीवास्तव आदि शामिल हैं। रायपुर नगरपालिका 1867 में बनी। 1968 में इसे नगर निगम का दर्जा मिला। पहले यहां महापौर प्रणाली नहीं थी, लेकिन 1994 से लगातार महापौर चुने जा रहे हैं।



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6 bodies including Birgaon can get extension of six months, can be kept vacant for 6 months under 72nd amendment of constitution


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