आजीविका मिशन दफ्तर बंद, 6 हजार वेंडरों के कर्ज का सर्वे रुका , September 05, 2020 at 05:35AM

अमिताभ अरुण दुबे | कोरोना में रोजगार का सबसे बड़ा संकट स्ट्रीट वेंडरों यानी सड़क पर ठेले-गुमटियां लगाकर कारोबार करनेवालों के सामने आया है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में वेंडरों को कर्ज देने की बात आई है। राजधानी में लगभग 6 हजार वेंडर हैं। हर वेंडर को अधिकतम 10 हजार रुपए के हिसाब से राजधानी में ही 6 करोड़ रुपए का कर्ज बांटने का प्लान फाइनल हुआ और सर्वे शुरू होने ही वाला था कि संबंधित एजेंसी यानी शहरी आजीविका मिशन के दफ्तर में ताला लग गया। वहां के कुछ कर्मचारी कोरोना पाजिटिव निकले, इसलिए दफ्तर तो सील हुआ ही, सर्वे भी बेमुद्दत रोकना पड़ गया। अब यह भी स्पष्ट नहीं है कि सर्वे कब शुरू होगा और वेंडरों को कब तक कर्ज मिल पाएगा, क्योंकि कई का तो कारोबार ही हफ्तों से बंद है। राजधानी में सड़क किनारे ठेलों पर या फुटपाथ पर दुकान सजाकर बैठने वाले वेंडरों का आखिरी बार सर्वे दो साल पहले हुआ था। उस सर्वे में करीब 6 हजार स्ट्रीट वेंडर पाए गए थे। इनमें से 1800 से ज्यादा चाय-पान गुपचुप, पावभाजी, ऑमलेट या अन्य स्ट्रीट फूड बेचने वाले थे। 4 हजार से ज्यादा लोग सब्जी-फल या इसी तरह के दूसरे कारोबारों से जुड़े लोग थे। अभी तो प्रशासन ने योजना के लिए इसी को आधार माना है। लॉकडाउन में इसी वर्ग को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, इसलिए स्ट्रीट वेंडरों को राहत देने के लिए पीएम स्वनिधि योजना को लांच किया गया है। केंद्रीय शहरी मंत्रालय ने शहरी आजीविका कार्यक्रम यानी डे-एनयूएलएम के तहत इस स्कीम को नगरीय निकायों के तहत लागू करने के लिए कहा है।

रायपुर निगम के अपर आयुक्त पुलक भट्टाचार्य ने सभी 10 जोन और आजीविका मिशन के अधिकारियों को शहर के स्ट्रीट वेंडरों की तादाद के आंकलन के लिए सर्वे करने के निर्देश दिए थे। सर्वे शुरू होने ही वाला था कि आजीविका मिशन के करीब आधा दर्जन कर्मचारी पाजिटिव निकल गए। इस वजह से निगम मुख्यालय में इसका दफ्तर तो बंद हुआ ही, इससे जुड़ी सारी प्रक्रिया रोकनी पड़ गई है।


भास्कर नॉलेज- इस तरह दिया जाएगा लोन
केंद्र सरकार की स्कीम में फुटपाथ पर काम धंधा करने वालों को अधिकतम दस हजार तक का लोन बिना किसी गारंटी के मिल रहा है। इसके लिए आवेदक को अपनी पहचान से जुडे़ दस्तावेज ही लगाने है। लिए गये कर्ज को एक साल बाद चुकाना है। इसमें ब्याज दर न के बराबर रखी गयी है, लोन का मकसद फुटपाथ पर रोटीरोजी कमाने वालों को अपना कामधंधा चलाने के लिए संभलने का अवसर देना है। ऐसे लोग जो डिजिटल पेमेंट के जरिए लिया गया लोन चुकाएंगे, उन्हें और ज्यादा रियायत भी मिलने का प्रावधान है।

मूल काम बंद होने से लॉकडाउन में बढ़ गई वेंडरों की संख्या
दो साल के सर्वे के मुताबिक शहर में 6 हजार से ज्यादा फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले लोग हैं। लॉकडाउन के कारण बहुत से लोगों ने अपने मूल कामों को बदलकर अन्य व्यवसाय में तब्दील कर लिया है। शहर में फुटपाथ पर छोटे काम धंधे करने वालों में बड़ी संख्या सब्जी-फल बेचने वालों की है। चूंकि लॉकडाउन में इस काम को करने वालों की संख्या बढ़ गयी है, लिहाजा सर्वे के जरिए इसका आंकलन भी किया जाना है। स्ट्रीट वेंडरों के लिए शहर में 44 नये वेडिंग जोन बनाने का प्लान फाइनल हो चुका है। रायपुर नगर निगम क्षेत्र के दस जोन में अब इनका बंटवारा होना बाकी है।

"स्वनिधि योजना का लाभ ज्यादातर स्ट्रीट वेंडरों को मिले, इसकी रणनीति बनाई गई है। सर्वे के जरिए इनकी कुल तादाद का व्यवसाय आधारित आंकलन भी होना है।"
-पुलक भट्टाचार्य, अपर आयुक्त-नगर निगम



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Aajeevika Mission office closed, loan survey of 6 thousand vendors halted


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