88 साल की महिला बनीं साध्वी, 7 साल पहले लिख लिया था मृत्यु पत्र, कहा: मृत्यु के बाद आडंबर न करें, इसे त्यागें , September 27, 2020 at 07:09AM

आडंबरों का विरोध करते हुए जैन समाज की हुलासी देवी श्रीश्रीमाल (अब हुलासी श्रीजी) ने मानव समाज काे बड़ा संदेश दिया है। 89 साल की बुजुर्ग को शनिवार को संथारे का संकल्प कराते हुए परिवार व जैन समाज के वरिष्ठों की अनुमति और प्रकाश मुनि महाराज की आज्ञानुवर्तनी साध्वी गीता जी मसा के मुखारविंद से जैन साधु दीक्षा दी गई। बड़ी बात यह है कि हुलासी श्रीजी ने सात साल पहले ही अपना मृत्यु पत्र लिख दिया था।

इसमें उन तमाम संस्कारों के लिए स्पष्ट मना कर दिया था, जो किसी सामान्य व्यक्ति की मृत्यु के बाद अलग-अलग समाज के हिसाब से किए जाते हैं। हुलासी देवी का मानना है कि ये सभी आडंबर केवल फिजूलखर्ची और समय गंवाने का कारण बन चुके हैं।

इसलिए इनका त्याग कर सात्विक जीवन की ओर बढ़ना है। उन्होंने परिवार को स्पष्ट कह दिया था कि उनका देह त्याग संथारा पूर्वक ही हो। मृत्यु के बाद 12 दिन का शोक कार्यक्रम न रखें। मृह देह काे प्रणाम न करें। अंतिम यात्रा में पैसे व अनाज न उछालें।

दीक्षा बाद हुलासी श्रीजी मिला नाम
हुलासी देवी का नया नाम हुलासी श्रीजी प्रदान किया गया है। वे दुर्ग जैन समाज के वरिष्ठ पार्षद मदन जैन, सुनील जैन, अनिल जैन व राजेंद्र जैन की सांसारिक माता हैं। समाज के संत सातियों की हमेशा सेवा भक्ति उनकी दिनचर्या में शामिल रहा। बीते 10 दिनों से उनका इलाज चल रहा था। उनकी इच्छा के अनुसार सुधर्म जैन पोषधशाला बांधातालाब में संथारा का पचखान कराया।
इच्छा को सार्थक कर रहा परिवार
परिवार के बड़े बेटे मदन जैन ने बताया कि उनकी सांसारिक माता की इच्छा है कि वे समाधि पूर्वक देवलोक गमन करें। उसे मूर्तरूप दिया। साल 2013 में उन्होंने कहा था कि जितने सांसारिक नियम हैं, उसे उन्होंने पहले ही पूरा कर लिया है। अब उनका अंतिम आडंबर में न बीते।

7 साल पहले के पत्र में यह लिखा है
1. मेरी संथारे की पूर्ण भावना है। इसलिए तबीयत बिगड़ने पर संथारा ही कराएं।
2. संथारा चले, उतने दिन लिलोती व रात्रि भोजन वर्जित रखें।
3. मृत्यु के बाद 12 दिन का कार्यक्रम न करें। तीसरे दिन ही नवकार मंत्र के साथ कार्यक्रम निपटा दें।
4. मृत देह को प्रणाम न करें। मृत्यु भोज न कराएं।
5. चिता में नमक, शक्कर, नारियल न डालें।
6. रास्ते में अनाज, पैसे न फेकें।
7. शव की राख पानी में न डालना, गंगाजी न ले जाना।
8. मृत्यु के निमित्त कोई लेन-देन न करना।
9. मेरी फोटो पर फूल माला न पहनाएं, धूप-दीप न जलाएं।
10. मेरी मृत्यु के बाद कोई संस्थान बंद न करें।
(इसी तरह 21 बिंंदुओं पर हुलासी देवी ने अपनी बातें लिखी हैं।)



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Sadhvi, who became an 88-year-old woman, had written the death letter 7 years ago, said: Do not booby after death, abandon it


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