स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. पॉजिटिव होने के बाद ओपीडी 90 से 25 पर आई , September 18, 2020 at 07:06AM

पिछले दिनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. केके सिलावट के पॉजिटिव आने के बाद मरीजों का आना भी कम हो गया है। जिसके चलते अस्पताल में पदस्थ अन्य डाक्टर और स्टाफ के अलावा जांच केंद्र का स्टाफ दिनभर फ्री बैठा रहता है। डॉ. सिलावट के पॉजिटिव आने के बाद नागरिकों ने डर के कारण प्राइवेट क्लीनिकों पर इलाज करवाना शुरु कर दिया है। हालत यह है कि ओपीडी की संख्या 90 से 25 पर आ गई हैं।

दिनभर में गिने चुने मरीज ही सरकारी अस्पताल इलाज करवाने पहुंच रहे हैं। ज्यादातर लोग उदयपुरा, बरेली या फिर नगर में ही झोलाछाप डाक्टरों की प्राइवेट क्लीनिकों पर जाकर इलाज करवा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में सामान्य सर्दी खांसी होने पर भी डाॅक्टर कोरोना की जांच करवाते हैं जिससे उन्हें इस बात का डर रहता है कि कहीं वह पॉजिटिव न आ जाए।

डाॅक्टर बोले- डर के कारण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नहीं आ रहे मरीज, जांच करवाने में भी लोग कर रहे आनाकानी

चार सितंबर को 90 थी ओपीडी में मरीजों की संख्या अब 25 ही रह गई

डॉ. सिलावट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी होने के साथ साथ लोगों का इलाज भी करते थे। 4 सितंबर को स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी की संख्या 90 थी, लेकिन जब से डाक्टर पॉजिटिव हुए तो लोगों ने डर के कारण अस्पताल में इलाज करवाना बंद कर दिया। 17 सितंबर को ओपीडी मरीजों की संख्या 25 रही। डॉ. ममता मेहरा ने बताया कि कोई भी सर्दी खांसी वाला मरीज आता है तो हम उसको कोविड-19 की जांच कराने सैंपल लेने की बात कहते हैं तो मरीज विवाद करते हैं जिससे कि हमको भी मरीजों के इलाज करने में परेशानी आ रही है। कोरोना जांच के डर के कारण मरीजों की संख्या घटी है।



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