सर्वे में जुटे अमले को संक्रमित होने के बाद छोड़ दिया, अब सर्वेयर ने खींचे हाथ, आधे कर्मचारी तैयार नहीं , September 03, 2020 at 06:03AM

राजधानी में जिस वक्त कोरोना संक्रमण कम था, उस वक्त स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने घर-घर सर्वे में पूरी ताकत झोंक दी। संक्रमण बढ़ने लगा तो सर्वे कर्मचारियों से लोगों ने दुर्व्यवहार तक शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि अब संक्रमण बुरी तरह फैला है और सर्वे की जरूरत है, लेकिन पिछले अनुभव और सरकारी एजेंसियों से ही सहयोग नहीं मिलने से हताश आंगनबाडी़, स्कूल शिक्षा विभाग और नगर निगम के करीब 2 हजार से ज्यादा कर्मचारियों में से 40 फीसदी ने आगे सर्वे करने से इंकार कर तक कर दिया। कुछ एक तो अब फील्ड पर तक नहीं जा रहे हैं। ऑक्सीमीटर रीडिंग के दौरान ये खिलाफत ज्यादा देखी जा रही है। बहुत सारी जगहों पर दो लोगों की टीम की जगह केवल एक ही शख्स जा रहा है।
भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि शहर में कोरोना नियंत्रण और सर्वे में जुटे बहुत से कर्मचारी बीते 20 दिन में संक्रमण का शिकार बन चुके हैं। जांच करवाने के लिए कहने के बावजूद उनका सैंपल तक नहीं लिया जा रहा है। उस पर कोरोना पॉजिटिव आने के बाद कोई सहयोग तक नहीं मिल रहा है। दरअसल इसी वजह से अब शहर में चल रहे कोरोना सर्वे से हेल्थ विभाग पूरे सीन से ही गायब हो गया है। यहां तक कि सर्वे कर रहे कर्मचारियों को ऑक्सीमीटर से जांच का काम भी इंसिडेंट कमांडर बने जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन के अधिकारियों को करना पड़ा है। यही नहीं, नहीं पिछले महीने बीपी शुगर पेशेंट की कोरोना जांच के टारगेट को पूरा करने के लिए एक साथ डेढ़ सौ से ज्यादा सर्वे कर्मचारियों की कोरोना जांच कर दी गयी। भास्कर ने सर्वे कर रही टीमों से ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जब बातचीत की तो कई चौंकाने वाली बातें उजागर हुई है।

टीम से बदसलूकी, प्रशासन ने कहा-थाने जाकर रिपोर्ट कर दो
ऑक्सीमीटर रीडिंग सर्वे करने निकली टीमों को अब लोगों की बदसलूकी तक का शिकार बनना पड़ रहा है। प्रशासन ने सर्वे टीमों को सर्वे में सहयोग नहीं करने वालों पर एक्शन करने का भरोसा दिलाया था। यह कहा था कि उनके एक काॅल पर असहयोग करनेवालों के खिलाफ एक्शन लेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। सिविल लाइंस जैसे इलाके में टीमों को साथ एक नहीं पांच छह बार तक ऐसी घटनाएं हो चुकी है। लेकिन फोन करने पर अफसर ही कहने लगे हैं कि खुद थाने में जाकर रिपोर्ट लिखवाओ। पुलिस ही एक्शन लेगी।
सर्वे के जरिए कोरोना फैलाने की तोहमत तक झेलनी पड़ी
एक टीम को दिन में सुबह 8 से दोपहर 2 के बीच 20 घर के सदस्यों की जांच करनी है। लेकिन ज्यादातर घरों में उन्हें एंट्री तक नहीं मिल रही है। सर्वे कर रहे लोग घर घर जा रहे हैं इससे कोरोना फैल सकता है, लोगो को ये तक लग रहा है। ऑक्सीरीडर को सैनिटाइज भी कर रहे हैं लेकिन लोगों को इससे भी भरोसा नहीं हो रहा है। एक दिन में टीम मुश्किल से 5 से 10 घर जा पा रही है, क्योंकि आधा वक्त तो लोगों को समझाने में ही लग जा रहा है। उधर, रोज का टारगेट अचीव नहीं होने पर हर दिन अफसरों की डांट भी सुननी पड़ रही है।
कंटेनमेंट जोन में काम करते हुए संक्रमित, बच्चों को छोड़ा
राजधानी के उपनगरीय क्षेत्र बिरगांव में बीते 20 दिन पहले कोरोना सर्वे कर रही आंगनाबाडी़ कार्यकर्ता को पॉजिटिव होने के कारण अपने तीन बच्चों को छोड़कर अस्पताल में भर्ती होना पडा़। भास्कर को उन्होंने बताया कि लगातार कंटेनमेंट जोन में काम करने की वजह से ही उन्हें संक्रमण हुआ। पति की तबीयत भी ठीक नहीं है, ऐसे में परिवार को लेकर इलाज के दौरान वो हमेशा चिंता में रही। सर्वे कर रहे कर्मचारियों को हर दिन सर्वे के साथ अपने विभाग से संबंधित जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है।

सर्वे वालों के पास ही अधिकांश काम
मार्च के बाद से अब तक कोरोना नियंत्रण से जुडे़ 99 फीसदी काम जिला पुलिस और नगरीय प्रशासन को हेल्थ विभाग ने ट्रांसफर कर दिए हैं। सर्वे कर रही टीमों को अब लग रहा है कि ऑक्सीमीटर से जांच जैसे हेल्थ विभाग के काम भी मजबूरी में उनको करने पड़ रहे हैं। यहां तक कि अब नगर निगम सैंपल कलेक्शन वैन भी दौड़ाने वाला है। इसके लिए तकनीकी स्टॉफ स्मार्ट सिटी के खाते से तैनात किया गया है। इस तरह से शहर में सर्वे कितना सफल हो पाएगा इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

"अब हम नयी व्यवस्था लागू कर रहे हैं। कोरोना सर्वे कर रही टीमों के साथ एनजीओ के 1800 प्रतिनिधि भी घर-घर घूमेंगे, ताकि लोगों को समझाया जा सके। इससे कर्मचारी जो दबाव या तनाव की बात कर रहे हैं, वो भी दूर होगा। सभी की सुरक्षा के लिए बंदोबस्त किए हैं। हमारा लक्ष्य शहर को सुरक्षित बनाना है इसमें सब शामिल हैं।"
- डॉ. एस भारतीदासन, कलेक्टर रायपुर



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The survey staff left the infected after being infected, now the surveyors pulled hands, half the employees were not ready


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