अस्पतालों में संक्रमितों का शव रखने फ्रीजर की कमी, दो से तीन दिन में हो रहा अंतिम संस्कार , September 08, 2020 at 07:12AM

बिलासपुर जिले में कोरोना का कहर बढ़ता रहा है। अधूरे संसाधनों के बीच बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग इस लड़ाई को लड़ रहा है। हालत यह है कि जिले में कोरोना पीड़ितों के शव को रखने के लिए शहर के अस्पतालों में फ्रीजर नहीं हैं। इस कारण अस्पताल प्रबंधन के साथ मरीज के परिजन भी परेशान हैं। इस वजह से शव का अंतिम संस्कार करने में दो से तीन दिन लग जा रहे हैं। शहर के कोविड अस्पताल में सिर्फ एक फ्रीजर है। अस्पताल में जब दूसरा संक्रमित शव मरच्युरी पहुंचता है तो इसे रखने के लिए पहले वाले शव का अंतिम संस्कार होने तक इंतजार करना पड़ रहा है। इतना तो ठीक, यहां कोरोना पीड़ितों के शव को मुक्तिधाम पहुंचाने के लिए शव वाहन तक नहीं मिल रहा है। इस कारण मरीजों की मौत के दूसरे या फिर तीसरे दिन शव का अंतिम संस्कार हो पा रहा है। यह समस्या पिछले कई दिनों से है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसर इस व्यवस्था को नहीं सुधार पा रहे हैं। बता दें कि वर्तमान में सिम्स में चार फ्रीजर हैं और यहां कोरोना संक्रमित चार मरीजों के शव को रखने की व्यवस्था है। इसके अलावा कोविड अस्पताल में सिर्फ एक फ्रीजर है। वहीं अपोलो में भी फ्रीजर की व्यवस्था है लेकिन वे अपने मरीजों को ही रखते हैं। मरीजों के शव को रखने में आ रही दिक्कत को देखते हुए कोविड अस्पताल प्रबंधन ने फ्रीजर मंगवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग और उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है।

जांजगीर से मंगवाया वाहन तब मुक्तिधाम भेजा शव
कोविड अस्पताल में रविवार को 53 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हुई थी। शव को मुक्तिधाम पहुंचाने के लिए शव वाहन नहीं मिल रहा था। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को फोन किया गया तो वहां से जबाव मिला कि वाहन अभी रायपुर गया है, तीन-चार बजे के पहले शव वाहन नहीं मिल पाएगा। ये भी तय नहीं है कि शव वाहन चार बजे मिल ही जाएगा। इसके बाद जिला अस्पताल प्रबंधन ने जांजगीर सीएमएचओ को फोन कर वहां से शव वाहन मंगवाया तब मृतक का अंतिम संस्कार समय पर हो पाया।

हमारे पास दो ही वाहन, दूसरे जिले से मांगते हैं मदद
सहायक नोडल अधिकारी कोविड दाह संस्कार कर्म विकास कुमार सोनी ने कहा कि कोरोना संक्रमित मरीजों की मृत्यु की दशा में उनके पार्थिव शव को अंतिम संस्कार के लिए सम्मानपूर्वक मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए हमारे पास वर्तमान में केवल 2 ही मुक्तांजलि वाहन हैं। आवश्यकतानुसार आसपास के जिले से वाहन की व्यवस्था कर पार्थिव शरीर को मुक्तिधाम तक पहुंचाया जा रहा है। वाहन की कमी है इसके लिए उच्च अधिकारियों को बता दिया गया है। जल्द व्यवस्था कराने उन्होंने कहा है।

सिम्स में दो बार जांच, तब तक मरच्युरी में रखा रहता है शव
सिम्स इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों की अगर मौत हो जाती है तो पहले उसका एंटीजन टेस्ट होता है। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद फिर ट्रू नेट टेस्ट किया जा रहा है। ट्रू नेट की रिपोर्ट कम से कम एक दिन में मिलती है इसलिए तब तक शव को मरच्युरी में रखा जाता है। अगर दोनों रिपोर्ट निगेटिव आती है तो परिजनों को शव देते हैं। पॉजिटिव आने के बाद प्रशासन उसका अंतिम संस्कार करता है। लेकिन इस प्रक्रिया के दाैरान शव सिम्स की मरच्युरी में रखा रहता है। इस करण दूसरे शव को रखने की जगह नहीं रहती।​​​​​​​

आठ फ्रीजर मंगवाए जल्द सुधरेगी व्यवस्था
सीएमएचओ डॉ. प्रमोद महाजन का कहना है कि फ्रीजर की कमी है। जल्द ही आठ फ्रीजर मंगवाए जा रहे हैं। इनके आते ही शव को रखने की दिक्कत खत्म हो जाएगी। साथ ही शव वाहन के लिए उच्च अधिकारियों से बात चल रही है। जल्द ही इस व्यवस्था को ठीक करेंगे।​​​​​​​



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