सुसाइड का फैसला केवल एक सेकंड का होता है कोई परेशानी है तो फ्रेंड्स और फैमिली से करें शेयर , September 10, 2020 at 06:02AM

आज वर्ल्ड एन्टी सुसाइड डे है। हर साल लगातार सुसाइड के केस बढ़ रहे हैं। आम आदमी से लेकर खास आदमी सभी लोग जीवन में परेशानी आने पर सबसे उपयुक्त कदम सुसाइड को मान लेते हैं। काउंसलर्स का मानना है कि सुसाइड करने का ख्याल एक क्षण में आता है, उस समय आदमी सतर्क हो गया तो बच जाता है। काउंसलर डॉ. इला गुप्ता और अमित गुप्ता ने बताया कि दुर्भाग्य की बात है कि संयुक्त परिवार के लिए पहचाने जाने वाले अपने देश में सबसे ज्यादा सुसाइड केस पारिवारिक कारणों की वजह से हो रहे हैं। लोगों को समस्या दूसरे से बताने की आदत कम हो गई है। जब कभी कोई समस्या आती है और उसे दूसरे से शेयर कर लिया जाता है तो आधी समस्या सॉल्व हो जाती है। फैमिली मेंबर्स, फ्रेंड्स साथ में काम करने वाले समस्या के समाधान के बारे में बताते हैं। सुसाइड का सबसे प्रमुख कारण अकेलापन है। कोई भी समस्या आने पर अपने लोगों से शेयर जरूर करें। साल 2019 के आंकड़ों के अनुसार देश में 1 लाख 39 हजार 123 लोगों ने सुसाइड किया था जिसमें से 32.4 प्रतिशत यानी 45 हजार 140 लोगों ने फैमिली प्रॉब्लम के कारण सुसाइड किया।

केस 1 - फैमिली और काउंसलर ने दिया नया जीवन
धमतरी के 27 साल के मनोज (परिवर्तित नाम), पिछले कई साल से पीएससी की तैयारी कर रहे हैं। 4 अटेम्प्ट करने के बाद पिछले साल ही उनका इंटरव्यू के लिए सलेक्शन हुआ, लेकिन उनका सलेक्शन नहीं हो पाया। चिड़चिड़ा हो गया था सोच रहा था कि जो लक्ष्य था वो हासिल नहीं कर पाया तो मर जाऊंगा, लेकिन घर वालों ने सही समय में देख लिया। उसके बाद काउंसलर ने उसे समझाया, तब ठीक था। लेकिन कोविड-19 के कारण और परेशान हो गया था कि अब क्या होगा। उसके बाद काउंसलर ने काउंसिलिंग की और हेप्नोटाइस करके समझाया कि पीएससी में सलेक्शन नहीं हुआ तो कोई बात नहीं, इसके अलावा कई सारे ऑप्शन हैं। आगे भी प्रयास करेंगे तो सफलता मिलेगी ही। अभी मनोज फिर से एग्जाम की तैयारी कर रहा है।

केस 2- दूसरे के लिए क्यों दूं जान, बाद में आया समझ
22 साल की पुष्पा (परिवर्तित नाम) नर्स है। 2 साल से उनका लिव इन रिलेशन था, लेकिन किन्हीं कारणों से उनका ब्रेकअप हो गया। अलग होने के बाद बहुत वह नेगेटिव हो गई थी। उन्होंने अपनी कलाई की नस काट कर सुसाइड करने की कोशिश की, लेकिन इलाज के बाद वो बच गई। उसके बाद भी बहुत चिड़चिड़ी और गुस्सा करने लगी थी। मां और पापा ने उसे समझाया और काउंसलर से बात करवाई। उन्होंने समझया कि जीवन में बहुत दुख है लेकिन हम केवल अपना ही दुख देखते हैं। हम तो चले जायेंगे लेकिन जीवन चलता रहेगा। दूसरे के लिए अपना जीवन क्यों दांव पर लगा रहे हैं। अब तुम बुरे रिलेशन से बाहर आ गई। शायद साथ रहती तो और बुरा होता। अच्छा जीवन जी पाओगी। सब समझने के बाद पुष्पा को बहुत पछतावा हुआ कि ऐसा क्यों किया। अभी वो बहुत अच्छी है।

आत्महत्या के कारण
भारत में आत्महत्या के प्रमुख कारणों में भयानक बीमारी का होना, पारिवारिक कलह, दाम्पत्य जीवन में संघर्ष, गरीबी, मानसिक विकार, परीक्षा में असफलता, प्रेम में असफलता, आर्थिक विवाद आदि हैं।

2019 में 1 लाख 39 हजार लोगों ने किया सुसाइड
देश में 2018 में 1 लाख 34 हजार 516 लोगों ने अलग-अलग कारणों से सुसाइड किया था, वहीं 2019 में 1 लाख 39 हजार 123 लोगों ने सुसाइड किया। इसमें सबसे ज्यादा 2019 में फैमिली प्रॉब्लम के चलते 45 हजार 140 लोगों ने सुसाइड किया, जो टोटल केस का 32.4 प्रतिशत रहा है। वहीं अलग-अलग इलनेस के कारण 23 हजार 830 लोगों ने सुसाइड किया, जो टोटल केस का 17.1 प्रतिशत रहा।



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