रात को तारे नहीं दिखे तो महिलाओं ने उपवास भी नहीं तोड़ा , September 11, 2020 at 06:28AM

धन-वैभव की प्राप्ति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला गजलक्ष्मी व्रत गुरुवार को था। महिलाओं ने सुबह नहा-धोकर माता के नाम से जाे व्रत का संकल्प लिया था वह देर रात तक नहीं टूट सका। ऐसा इसलिए क्योंकि रात को बदली होने की वजह से तारे नजर नहीं आए और ऐसी मान्यता है कि अष्टमी तिथि को रखा गया व्रत तारे को अर्घ्य दिए बिना नहीं तोड़ा जाता।
गुरुवार को महालक्ष्मी व्रत में महिलाओं का पूरा दिन जहां पूजा पाठ में बीता, वहीं शाम को पूजा घर में अखंड कलश के साथ मिट्टी की गजलक्ष्मी स्थापित की गई। इससे पहले उस जगह पर हल्दी से कमल का फूल बनाकर लाल कपड़े का आसन बिछाया गया। फूल, गहनों आदि से माता का शृंगार किया गया। मंत्रोच्चार के साथ पूजा कर माता को मिठाई आदि का भोग लगाया। घरों में गजलक्ष्मी व्रत की कथाएं भी कही गईं। बहुत से लोगों ने माता के साथ चांदी का नया हाथी भी स्थापित किया। ऐसी मान्यता है कि गजलक्ष्मी पूजा के दिन सोना-चांदी खरीदना अत्यंत शुभ होता है। दिनभर व्रत रखने के बाद व्रत तोड़ने का समय आया तो आसमान में बाद घिर चुके थे और इसकी वजह से तारे नजर नहीं आए। तारे को अर्घ्य दिए बिना व्रत तोड़ने की मनाही है, लिहाजा बहुत से महिलाओं ने व्रत तोड़ा ही नहीं। वे शुक्रवार सुबह पूजा-पाठ कर व्रत तोड़ेंगी।



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If the stars were not seen at night, then women did not even break the fast


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