गाइडलाइन के इंतजार में मूर्तियां अधूरी छोड़ीं, मूर्तिकारों में डर- गणेशोत्सव की तरह नवरात्रि में भी न हो जाए नुकसान , September 11, 2020 at 06:30AM

शक्ति की भक्ति का पर्व नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू होगा। गणेशोत्सव की तरह नवरात्रि में भी कहीं नुकसान न उठाना पड़े, इसलिए मूर्तिकारों ने मूर्तियां बनाने का काम अधूरा छोड़ दिया है। अब इंतजार प्रशासन की गाइडलाइन का है, ताकि उसी अनुरूप मूर्तियां तैयार की जा सकें।
दरअसल, इस साल होली के बाद कोरोना का ऐसा ग्रहण लगा कि सारे तीज-त्योहारों की बलि चढ़ गई। इनसे जुड़े व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। मूर्तिकारों को गणेशोत्सव और नवरात्रि, इन्हीं 2 मौकों पर काम मिलता है। इसके लिए वे महीनों पहले ब्याज पर उधार लेकर प्रतिमाएं बनाने का काम शुरू कर देते हैं। गणेश पक्ष के दौरान प्रदेश के हजारों मूर्तिकारों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा था, क्योंकि करीब 22 दिन पहले जारी हुई गाइडलाइन में 4 फीट से ऊंची प्रतिमाओं की स्थापना पर प्रतिबंध लगा दिया गया। तब तक बड़े साइज की हजारों गणेश मूर्तियां बनाई जा चुकी थीं। नवरात्रि के लिए भी दुर्गा प्रतिमाएं भी तभी बनना शुरू हो गई थीं। नई गाइडलाइन के अभाव में ज्यादातर प्रतिमाओं को पूर्ण आकार नहीं दिया जा रहा है, जबकि नवरात्रि आने में अब सवा माह ही बाकी हैं। दुर्गोत्सव समितियां भी मांग कर रहीं हैं कि गाइडलाइन जल्द से जल्द जारी हो, ताकि उसी हिसाब से तैयारी की जाए।

  • 4000 - प्रतिमाएं बनाई जाती हैं हर साल शहर में
  • 80% - मूर्तियां एक माह पहले तैयार हो जाती हैं
  • 20% - मूर्तियां भी अब तक तैयार नहीं हुई हैं
  • 500 - से ज्यादा मूर्तिकारोंका कारोबार प्रभावित

प्रतिमाओं को सुखाने और उनके रंग रोगन में ज्यादा वक्त, यही परेशानी
गणेशोत्सव के बाद पितृ पक्ष और फिर नवरात्रि आती है। इस बार अधिकमास होने की वजह से नवरात्रि लगभग महीनेभर की देरी से शुरू हो रही है। गौरतलब है कि शहर में हर साल 4 हजार दुर्गा प्रतिमाएं बनाई जाती हें। पितृ पक्ष की शुरुआत तक 80 प्रतिशत से ज्यादा प्रतिमाएं बना ली जाती थीं। गाइडलाइन के अभाव में इस साल यह आंकड़ा 20 फीसदी तक भी नहीं पहुंच पाया है। मूर्तिकारों का कहना है कि जल्द नियम निर्धारित किए जाएं तो बेहतर होगा क्योंकि मिट्टी को आकार देने के बाद सुखाना पड़ता है। फिर रंग-रोगन कर मूर्तियां दोबारा सुखाई जाती हैं। इस काम में लंबा वक्त लगता है और गाइडलाइन जितनी देरी से जारी होगी, मूर्तिकारों और भक्तों को उतनी ज्यादा परेशानी उठानी पड़ेगी।

मूर्तिकार आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गए हैं
"गणेशोत्सव की गाइडलाइन में लेटलतीफी से बहुत नुकसान उठाना पड़ा है। मूर्तिकार आत्महत्या करने मजबूर हो गए हैं। एक मूर्तिकार आत्महत्या की कोशिश भी कर चुका है। दुर्गोत्सव समितियां ऑर्डर तो दे रहीं हैं, लेकिन गणेश पक्ष की तरह नुकसान न उठाना पड़े इसलिए हम खुद अभी काम नहीं ले रहे हैं।"
-विजय घोष, मूर्तिकार, माना

अभी चार फीट से कम के ऑर्डर ही लिए जा रहे हैं
"दुर्गोत्सव समितियां बड़े साइज की मूर्तियों बनाने कह रहीं हैं, लेकिन अभी ऐसे ऑर्डर कैंसल कर रहे हैं। गणेश पक्ष के दौरान 4 फीट की मूर्तियों को स्थापित करने की परमिशन दी गई थी। इसे देखते हुए अभी 4 फीट की मूर्तियां बनाने का ही ऑर्डर ले रहे हैं। नवरात्रि को लेकर स्थिति स्पष्ट करने सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द गाइडलाइन जारी करे।"
-राकेश पुजारी, कालीबाड़ी



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माना के एक कारखाने की तस्वीर।


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