कोरोना काल में सरकारी दफ्तरों में आना-जाना रोका, बैंकों में बाहरी खिड़की से काम, लगभग सभी दफ्तरों में कोई न कोई कर्मचारी पॉजीटिव , September 15, 2020 at 06:23AM

राजधानी में बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या का अब सीधा असर सरकारी दफ्तरों में पड़ रहा है। शहर में अभी एक भी ऐसा सरकारी विभाग नहीं है जहां कोई न कोई कर्मचारी कोरोना पॉजीटिव नन हो। इस वजह से अधिकतर सरकारी दफ्तरों में लोगों का आना-जाना रोक दिया गया है। उनके आवेदनों को गेट के बाहर से ही रिसीव किया जा रहा है। अतिआवश्यक काम होने पर ही लोगों को दफ्तरों के अंदर जाने दिया जा रहा है।
यही वजह है कि आम तौर पर लोगों की भीड़ से खचाखच रहने वाले कलेक्टोरेट, तहसील, रजिस्ट्री, निगम मुख्यालय, जोन दफ्तरों, आरटीओ, कई तरह के आयोग और बोर्ड दफ्तरों समेत सभी जगहों पर सन्नाटा पसरा रहता है। इन जगहों पर रोजाना 2000 लोग भी नहीं पहुंच रहे हैं। इन सभी सरकारी दफ्तरों की पार्किंग में गाड़ियां खड़ी करने के लिए जगह नहीं मिलती थी, लेकिन अब वहां केवल कर्मचारियों की ही गाड़ियां दिखाई देती हैं।
सरकारी दफ्तरों से मिली जानकारी के अनुसार कोरोना के समय में लोगों की शिकायतें और आवेदनों में भी 80 फीसदी की कमी हो गई है। जो भी आवेदन मिल रहे हैं वो राहत काम या स्वास्थ्य से संबंधित हैं। तहसील में नायब तहसीलदार के कोरोना पॉजीटिव होने के बाद आम लोगों का प्रवेश बंद है। रजिस्ट्री दफ्तर के कमरों में ताले लगा दिए गए हैं। लोगों का प्रवेश भी बैन कर दिया गया है। शहर के सभी 10 जोन दफ्तरों में आम लोगों का प्रवेश बंद है। इन सभी दफ्तरों में कोई न कोई कर्मचारी कोरोना पॉजीटिव निकला है। इस वजह से अफसरों की आमद भी कम होती है।

निगम मुख्यालय के अधिकतर कर्मचारी और अफसर वर्क फ्रॉम होम हैं। वहां भी आवेदनों का सिलसिला एक चौथाई से भी कम हो गया है। आरटीओ के अफसर और कर्मचारियों के बीमार होने की वजह से वहां कम नहीं हो रहा है। लोगों को ऑनलाइन सारे काम करने की सलाह दी जा रही है। दफ्तर में लोगों का प्रवेश बंद है।

लोगों को मशीनों का उपयोग करने की हिदायत दे रहे
शहर के अधिकतर बैंकों में भी लोगों का प्रवेश बंद कर रहे हैं। जिन बैंकों के पास बाहरी व्यवस्था है वे वित्तीय लेन-देन का काम बैंक परिसर की खिड़कियों से कर रहे हैं। बैंकों के बाहर खिड़की पर ही लोगों से लाइन लगवाई जा रही है और उनके काम वहीं से निपटाए जा रहे हैं। छोटे-छोटे वित्तीय लेन-देन के लिए लोगों को मशीनों का उपयोग करने की हिदायत देकर वापस लौटाया जा रहा है। बैंकों में अफसरों से मिलना है तो पहले गार्ड को सूचना देनी पड़ रही है। अतिआवश्यक काम होने पर ही अफसर लोगों को दफ्तर के अंदर बुलाते हैं।

कलेक्टर दफ्तर से हटाई कुर्सियां, फाइलें भी पहले मशीन में
कलेक्टर दफ्तर में भी आम लोगों के इंतजार के लिए रखी गई सभी कुर्सियां हटा दी गई हैं। लोगों से आवेदन बाहर ही ले लिए जा रहे हैं। अतिआवश्यक होने पर ही लोगों को प्रवेश दिया जाता है। लोगों की अर्जियां संबंधित विभागों में ट्रांसफर की जा रही हैं। कलेक्टोरेट के लगभग सभी कर्मचारियों की कुर्सियों के सामने प्रोटेक्ट ग्लास लगा दिए गए हैं। दफ्तर में आने वाली सभी फाइलों को पहले कोरोना क्लियर मशीन में एक तय समय के लिए रखा जाता है। इस मशीन में अलार्म सेट करने के बाद जब घंटी होती है तब फाइलें बाहर निकालकर कलेक्टर तक पहुंचाई जाती है।

"सावधानी के लिए ही व्यवस्था बनाई गई है। लोगों को जरूरी काम होते हैं तो अफसर उनसे मुलाकात भी करते हैं। जिन दफ्तरों में कोरोना पॉजीटिव आते हैं वहां गाइडलाइन के अनुसार ही काम किया जाता है। संक्रमण की बढ़ती रफ्तार की वजह से ही लोगों को घरों में रहने की सलाह दी जा रही है।"
-डॉ. एस भारतीदासन, कलेक्टर



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In Corona period, government offices stopped going in, banks worked from outside window


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