जान का खतरा सड़कों पर, लेकिन वीआईपी इलाकों में सबसे पहले लगाए ट्रैफिक मिरर , September 19, 2020 at 05:51AM

प्रमोद साहू | प्रशासन ने दो हफ्ते पहले सर्वे कर राजधानी के ऐसे अंधे मोड़ और पुलों की ढाल का पता लगाया जहां हादसे ज्यादा हो रहे हैं और तुरंत ट्रैफिक मिरर या रिफ्लेक्टर लगाने की जरूरत है। पूरी सिफारिश के साथ यह काम स्मार्ट सिटी को सौंपा गया। इस एजेंसी ने मिरर लगाने की शुरुआत की। एक हफ्ते के भीतर ही हर वीआईपी इलाके और बंगलों के सामने ये मिरर नजर आने लगे हैं। लेकिन जहां वाकई खतरा है, जैसे अवंतिबाई चौक लोधीपारा, पीली बिल्डिंग चौक, आश्रम तिराहा, आरकेसी के सामने समता-चौबे कॉलोनी रोड, मौदहापारा आनंद टॉकीज मोड, मालवीय रोड, जलविहार रोड, शंकर नगर चौक वगैरह, वहां अब तक ट्रैफिक मिरर नहीं लग पाए हैं। सब मिलाकर शहर और आउटर में लगभग 100 मिरर लगाए जाने हैं, जिनमें से वीआईपी इलाकों में 30 से अधिक लग चुके हैं। अंधे मोड़ पर गोलकार तथा सामने वाली सड़क के ट्रैफिक को अच्छी तरह दिखाने वाले ट्रैफिक मिरर अंधे मोड़ या खतरनाक जगहों पर काफी लाभदायक हैं, इसलिए शहर में इन्हें लगाने का फैसला हुआ। ट्रैफिक एक्सपर्ट के मुताबिक ये मिरर किसी भी ओर के वाहनचालक को दूसरी सड़क का दृश्य दिखाकर एलर्ट कर देते हैं। इसलिए हादसे कम होते हैं। भास्कर टीम ने सिविल लाइंस और शंकरनगर इलाके में लगभग हर वीआईपी बंगले के सामने ये मिरर लगे देखे। लेकिन शहर के भीतर जहां जरूरत है, वहां अब तक मिरर लगाने की जगह तय नहीं की जा सकी है। आउटर में भी सभी ओवरब्रिज तेलीबांधा, राजेंद्र नगर, टैगोरनगर, संतोषी नगर और भाठागांव अंडरब्रिजों के दोनों ओर इनकी जरूरत है, पर वहां इन्हें नहीं लगाया गया है। तेलीबांधा से आगे वीआईपी तिराहा और सेरीखेड़ी डिवाइडर के आसपास की सड़क हादसों की बड़ी वजह है। वहां भी ट्रैफिक मिरर नजर नहीं आए, जबकि पूरी योजना इन्हीं स्थानों पर मिरर लगाने के लिए बनाई गई, ताकि हादसे रोके जा सकें।

वीआईपी काफिलों की सुरक्षा जरूरी
स्मार्ट सिटी अफसरों ने बताया कि वीआईपी इलाके शंकर नगर, सिविल लाइन, शांतिनगर और कटोरा तालाब इलाके में ट्रैफिक मिरर लगाने का काम पूरा हो चुका है। मोड़ के अलावा ज्यादातर वीआईपी बंगलों के गेट पर भी मिरर लगाया गया है क्योंकि वीआईपी के काफिलों में गाड़ियों की लंबी कतार रहती है, इसलिए सुरक्षा जरूरी है। यही नहीं, सारे वीआईपी बंगलों के गेट मेनरोड पर खुले हैं, इसलिए गेट पर भी यह जरूरी है क्योंकि वीआईपी सुरक्षा का मामला है। अफसरों ने बताया कि शहर में 8 लाख रुपए की लागत से 100 चिन्हित स्थानों पर ट्रैफिक मिरर लगाए जाने हैं।
ये ऐसी सड़कों पर लगने हैं, जहां ट्रैफिक दबाव ज्यादा होने के साथ-साथ हादसों का खतरा भी अधिक है। इसके लिए अंधे मोड़ और खतरनाक डिवाइडर कट वाली जगह चिन्हित की जा चुकी हैं।

मिरर से बच सकती हैं जान
टैगोरनगर के पास रिंग रोड पर ओवरब्रिज है, आम लोगों के लिए अंडरब्रिज भी है, लेकिन दोनों ओर ट्रैफिक मिरर नहीं हैं। यहां कुछ अरसा पहले एक कार हादसे में युवक की मृत्यु हो गई थी, क्योंकि मिरर नहीं होने से ओवरब्रिज के समानांतर सर्विस रोड से आ रही गाड़ी नजर नहीं आई। पिछले साल टैगोरनगर से वल्लभ नगर की ओर जा रहे एक युवक की भी अंडरब्रिज से सर्विस रोड पर निकलते ही जोरदार हादसे में मृत्यु हुई थी। समता कालोनी में चार माह पहले एक कार दुर्घटनाग्रस्त हुई थी, वहीं अनुपम नगर ब्रिज के पास भी एक कार की टक्कर से मोपेड सवार बुरी तरह घायल हुआ था।

फिर लिखेंगे पत्र : एसएसपी
"अंधे मोड़ वाली सड़क पर ट्रैफिक मिरर जरूरी हैं, इसलिए फिर चिट्ठी लिखेंगे। जरूरत पड़ी तो दोबारा सर्वे भी करेंगे और बड़े साइज के मिरर लगवाएंगे।"
-अजय यादव, एसएसपी रायपुर



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तस्वीर शंकर नगर इलाके की।


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