सरगुजा में बिखरी बेशकीमती प्राचीन मूर्तियों को संग्रहालय में नहीं पहुंचा सके अफसर , September 21, 2020 at 05:47AM

सरगुजा के सीतापुर विधानसभा से मंत्री अमरजीत भगत प्रदेश के संस्कृति और पुरातत्व मंत्री हैं, लेकिन अब तक सरगुजा संभाग में छह से अधिक पुरातात्विक स्थलों पर घासफूस के बीच नष्ट हो रही प्राचीन मूर्तियों को सहेजने के नाम पर प्लानिंग के तहत काम नहीं हो सका है।
हद तो यह है कि सरगुजा मुख्यालय स्थित 2 करोड़ की लागत से बने संस्कृति और पुरातत्व विभाग के संग्रहालय की मरम्मत के लिए 41 लाख का प्रस्ताव विभाग ने सचिव के पास भेजा है, लेकिन उसे वहां से प्रशासकीय स्वीकृति देने की बजाय वित्त विभाग को भेज दिया गया है।

जबकि अधिकारियों का कहना है कि उसे वित्त विभाग में भेजने की जरूरत नहीं थी, ऐसा इसलिए क्योंकि इस काम के लिए विभाग के पास पैसा है, जिसे प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद शुरू कराया जा सकता है, पर ऐसा नहीं हो रहा है। मंत्रालय के अधिकारी मंत्री को बरगला रहे हैं। इसके कारण संग्रहालय का विकास कार्य नहीं हो पा रहा है।

मूर्तियों की चोरी का खतरा चौकीदारों के भरोसे सुरक्षा

पुरातात्विक धरोहरों की सुरक्षा के लिए चौकीदारों की ड्यूटी है, लेकिन वे भी हमेशा मौजूद नहीं रहते हैं। वहीं रात के समय यहां से मूर्तियों की चोरी हो सकती है। इसके लिए यहां चौकीदार के साथ सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने की जरूरत है।

बेशकीमती मूर्तियों में लगी काई, केमिकल ट्रीटमेंट की क्वालिटी खराब, कई प्राचीन मूर्तियां खुले में पड़ी हैं
सरगुजा संभाग के पुरातात्विक स्थल महेशपुर, देवगढ़, डीपाडीह, रामगढ़ में कई प्राचीन मूर्तियां धूप और बरसात के बीच खुले में पड़े हुए हैं, जिनका सही तरीके से गुणवत्ता युक्त केमिकल ट्रीटमेंट नहीं होने से उनमें काई लग गई है, जबकि पुरातत्व विभाग ने इसी काम के लिए एक अलग विंग बनाकर रखा है, जिसमें कैमिस्ट सहित कई जिम्मेदार कर्मचारी हैं। हद तो यह है कि केमिकल ट्रीटमेंट के नाम पर हर साल लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं।

अनुमति नहीं मिलने से संग्रहालय का विकास रुका

पुरातत्व विभाग के उप संचालक जेऑर भगत ने बताया संग्रहालय की मरम्मत व लाइटिंग सहित अन्य कार्यों के लिए मंत्रालय में 41 लाख का प्रस्ताव में भेजा है, अनुमति नहीं मिलने से संग्रहालय का विकास नहीं हो सका है। मूर्तियों को नहीं रख सका है।

देवगढ़ के विकास के लिए 20 लाख का प्रस्ताव, लेकिन वह भी अटका: लखनपुर से 10 किलोमीटर की दूरी पर देवगढ़ को प्राचीन काल में ऋषि यमदग्नि का साधना स्थल बताया जाता है। यहां शिवलिंग के मध्यभाग पर शक्ति स्वरूप पार्वती जी नारी रूप में अंकित हैं। इस शिवलिंग को शास्त्रों में अर्द्ध नारीश्वर की उपाधि दी गई है।

इसे गौरी शंकर मंदिर भी कहते हैं। देवगढ़ में रेणुका नदी के किनारे एकाद्श रूद्ध मंदिरों के भग्नावशेष बिखरे पड़े हैं।

देवगढ़ के विकास के लिए 20 लाख का प्रस्ताव, लेकिन वह भी अटका: लखनपुर से 10 किलोमीटर की दूरी पर देवगढ़ को प्राचीन काल में ऋषि यमदग्नि का साधना स्थल बताया जाता है। यहां शिवलिंग के मध्यभाग पर शक्ति स्वरूप पार्वती जी नारी रूप में अंकित हैं। इस शिवलिंग को शास्त्रों में अर्द्ध नारीश्वर की उपाधि दी गई है।

इसे गौरी शंकर मंदिर भी कहते हैं। देवगढ़ में रेणुका नदी के किनारे एकाद्श रूद्ध मंदिरों के भग्नावशेष बिखरे पड़े हैं।



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डीपाडीह में स्थित प्राचीन धरोहर घासफूस के बीच, लग रही काई, नहीं ले जा पा रहे संग्रहालय।
Officers could not bring the prized ancient idols scattered in Surguja to the museum


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