जोत जलेंगे या नहीं इसे लेकर असमंजस बढ़ा क्योंकि नवरात्रि की गाइडलाइन में इसका कहीं जिक्र तक नहीं , September 23, 2020 at 06:29AM

इस नवरात्रि देवी मंदिरों में जोत जगमगाएंगे या पिछली बार की ही तरह मां का दरबार सूना रह जाएगा... इसे लेकर अब असमंजस और बढ़ गया है। वो इसलिए क्योंकि जिला प्रशासन द्वारा नवरात्रि के लिए जारी की गई गाइडलाइन में जोत स्थापना का कहीं जिक्र ही नहीं है। सभी 28 नियम मूर्ति-पंडालों को लेकर हैं, जबकि मंदिरों के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं।
गौरतलब है कि शहर में नवरात्रि के दौरान मूर्ति स्थापना का उतना ज्यादा ट्रेंड नहीं है जितना जोत स्थापना का है। शहर के देवी मंदिरों में नवरात्रि के दौरान हजारों भक्त मनोकामना जोत कलश की स्थापना करवाते हैं। पुरानी बस्ती के महामाया मंदिर, आकाशवाणी चौक के काली मंदिर और भनपुरी स्थित बंजारी मंदिर में तो प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के भक्त भी जोत जलवाते हैं। इसके लिए पंजीयन की प्रक्रिया डेढ़-दो माह पहले शुरू हो जाती है। मार्च में चैत्र नवरात्र के दौरान बहुत से मंदिरों में जोत के पंजीयन हो चुके थे। अचानक लॉकडाउन की घोषणा के बाद मंदिरों पर ताला लग गया और जोत जलवाने की भक्तों की मुराद अधूरी रह गई। तब मंदिर समितियों ने अक्टूबर की शारदीय नवरात्रि में जोत स्थापना करने की बात कही थी। अब नई गाइडलाइन में इसे लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं से मंदिर समितियां और भक्त दोनों असमंजस में पड़ गए हैं। परेशान भी हैं कि कहीं पिछली नवरात्रि की तरह इस बार भी उनके मन की मुराद अधूरी न रह जाए।

यहां जलते हैं सबसे ज्यादा जोत... प्रदेश में रतनपुर तो रायपुर में महामाया मंदिर में
प्रदेश में देवी मंदिरों की कमी नहीं है। जितने ज्यादा मंदिर हैं, भक्तों की संख्या भी उतनी अधिक है। यही वजह है कि यहां छोटे से छोटे देवी मंदिर में भी हर नवरात्रि 100-200 से जोत जगमगाते हैं। प्रदेश में रतनपुर स्थित महामाया देवी के दरबार में सबसे अधिक 31 हजार के करीब जोत जलते हैं। वहीं रायपुर में पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर में 11 हजार के करीब जोत जलवाए जाते हैं। इसी तरह चंद्रपुर स्थित चंद्रहासिनी में साढ़े 12 हजार जोत, दंतेवाड़ा स्थित दंतेश्वरी मंदिर में ढाई हजार, डोंगरगढ़ स्थित बमलेश्वरी मंदिर में साढ़े सात हजार और महासमुंद के खल्लारी मंदिर में 3 हजार ज्योत प्रज्जवलित किए जाते हैं।

शहर के 4 प्रमुख मंदिरों में जलते हैं इतने जोत

  • महामाया मंदिर, पुरानी बस्ती - 11,000
  • बंजारी मंदिर, भनपुरी - 8-9,000
  • काली मंदिर, आकाशवाणी चौक - 5,000
  • बंजारी मंदिर, रविवि कैंपस - 2-3,000

प्रशासन स्थिति स्पष्ट कर दे तो हम भी तैयारी करेंगे
"आमतौर पर नवरात्रि से 2 माह पहले जोत के पंजीयन शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार परिस्थितियां ऐसी हो गई हैं कि पंजीयन के लिए आए भक्तों को लौटाना पड़ रहा है। इससे पहले बहुत से भक्त पंजीयन भी करवा चुके हैं। अब प्रशासन यदि स्थिति स्पष्ट करे तो उस हिसाब से हम आगे की तैयारी करें।"
- रवि तिवारी, बंजारी मंदिर, रविवि कैंपस

इस बार जोत स्थापना को टालना ठीक नहीं होगा
"पिछली नवरात्रि हमने सरकार के कहने पर जोत स्थापना नहीं की थी। अब जब अनलॉक का दौर शुरू हो गया है, पंडाल और मूर्ति स्थापना की अनुमति दी जा रही है तो जोत स्थापना करने की अनुमति भी दी जानी चाहिए। इस बार भी जोत स्थापना को टालने से भक्तों की आस्था भी आहत होगी।"
- डीके दुबे, सचिव, काली मंदिर



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There is confusion about whether the holdings will burn or not because there is no mention of it in the Navratri guidelines.


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