होम आइसोलेशन के पांच-पांच दिन बाद लगा रहे लाल स्टिकर, मरीजों को नहीं मिल रही दवाईयां , September 23, 2020 at 06:34AM

शहर में होम आइसोलेशन में कोरोना इलाज करवा रहे या पाजिटिव केस मिलने वाले घरों तक प्रशासन के लाल स्टिकर चस्पा होने में अब भी लापरवाही सामने आ रही है। पांच दिन बाद भी अमला ऐसे घरों तक नहीं पहुंच पा रहा है, इसलिए आम लोग भी लापरवाही बरतने से पीछे नहीं हट रहे हैं। दरअसल होम आइसोलेशन में मरीजों के घर के सामने लाल स्टिकर के साथ लाल रस्सी या रिबन भी लगाया जा रहा है। तीन से ज्यादा केस होने पर बांस की घेराबंदी की जा रही है। लेकिन इन कामों में हो रही प्रशासन की लापरवाही का फायदा कोविड मरीज के परिजन भी उठा रहे हैं। वो आम लोगो की तरह बाहर निकल रहे हैं, जिससे दहशत होने लगी है।
भास्कर पड़ताल में कई चौंकाने और हैरान करने वाली बातें सामने आई है। शहर में जब एक्टिव केस की संख्या जून जुलाई में जब सैकडो़ं में रहती थी, उन परिस्थितियों में शहर में 200 से ज्यादा कंटेनमेंट जोन बन गये थे। लेकिन अब जबकि हजारों में एक्टिव केस हैं लेकिन कंटेन किए गये इलाके 100 भी नहीं है। भास्कर ने जब पड़ताल की तो पता चला कि बीते हफ्तों में जारी की गयी गाइडलाइंस में पांच केस का पैमाना बनाया गया है। लेकिन कितनी दूरी तक कितने दायरे को कंटेन करना है, इसको लेकर गाइडलाइन में कुछ भी स्पष्ट नहीं रहा। लिहाजा जहां जरूरत थी वहां कंटेनमेंट जोन बन ही नहीं पाए, क्योंकि पहले प्रशासन एक केस मिलने पर भी इलाके की घेराबंदी कर रहा था। एक्टिव सर्विलांस और कांटैक्ट ट्रेसिंग में छूट गये ऐसे ही इलाकों से अब ज्यादा केस निकले हैं।

1. पांच दिन बाद लगा स्टिकर
सेजबहार की एलआईजी कालोनी में एक पाजिटिव घर में रहकर कोरोना इलाज करवा रहा है। इस परिवार के बाकी सदस्य बिना कोरोना जांच करवाए ही मोहल्ले में घूम फिर रहे थे। मोहल्ले के लोगों ने इसकी शिकायत हैल्पलाइन नंबर 104 और 112 समेत जिला प्रशासन के अन्य नंबर पर लगातार पांच दिन तक करी। लेकिन कोई कार्रवाई ही नहीं हुई। रविवार को मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप के बाद यहां लाल रिबन लगाया गया, लेकिन रहवासियों के मुताबिक अब भी लोग घर के बाहर घूम रहे हैं। टीम जब यहां लाल स्टिकर फीता लगाने गयी तो मरीज कमरे से बाहर आकर विरोध करने लगा।

2. दोस्तों से मंगवानी पड़ी दवाएं
होम आइसोलेशन में कटोरा तालाब में रह रहे व्यवसायी के मुताबिक उनके परिवार में एक साथ तीन लोग कोरोना पाजिटिव निकले हैं। प्रशासन से उम्र और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर तीनों सदस्यो को घर पर रहकर इलाज की मंजूरी तो मिल गयी, लेकिन डाक्टरों को लगातार चार दिन तक फोन करने के बावजूद कोई रिस्पांस नहीं मिला। एक पारिवारिक मित्र ने मेडिकल स्टोर्स से लाकर दवा उपलब्ध करवाई। जिसका सेवन वो उनकी बेटी और पत्नी कर रहे हैं। घर में मरीज को परेशानी होने पर चुने हुए डाक्टरों से समय पर रिस्पांस नहीं मिलने की शिकायतें भी अब लगातार बढ़ रही है।

कंटेनमेंट के दिन भी तय नहीं
कंटेनमेंट जोन की अवधि पहले 14 दिन तय थी। अगस्त की गाइडलाइन में स्पष्टता नहीं रही, इसके चलते कहीं कहीं एक हफ्ते के अंदर ही कंटेनमेंट का सैटअप बिखर गया। चूंकि अगस्त मध्य से पॉश इलाकों के केस ज्यादा निकल रहे हैं।
इसके चलते अब अधिकारी भी दबी जुबान में मान रहे हैं कि रसूखदार सिस्टम को ध्वस्त करने में लगे हुए हैं। ऐसे इलाके में जब भी अमला जाता है, उस पर दबाव बनाना शुरु कर दिया जाता है़ इसके चलते सर्वे से लेकर कंटेनमेंट जोन बनाने की कोशिशें नाकाम हो जाती है।

"जहां होम आइसोलेशन है, वहां की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। जो भी पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ एफआईआर शुरू कर दी गई।"
-डॉ. एस भारतीदासन, कलेक्टर, रायपुर



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राजधानी में कंटेनेमंट जोन (फाइल फोटो।)


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