कोरोना संक्रमित बुजुर्ग चलने-फिरने लायक नहीं हुए, तो अस्पताल मांग रहे हैं अटेंडेंट , September 24, 2020 at 05:29AM

75 साल से अधिक उम्र के या ऐसे बुजुर्ग कोरोना संक्रमित जो चलने-फिरने या अपनी देखभाल खुद कर पाने में समर्थ नहीं हैं, अस्पताल उन्हें भर्ती करने के साथ अजीब शर्त थोप रहे हैं। भास्कर के पास ऐसे कई मामले आए, जिनमें ऐसे बुजुर्ग के लिए अस्पतालों ने अटेंडेंट के रूप में घर के एक व्यक्ति का साथ रहना अनिवार्य कर दिया। अटेंडेंट बनकर साथ रह रहे कई रिश्तेदार खुद पाजिटिव हो गए हैं। यही नहीं, जिनका पूरा का पूरा घर पाजिटिव है, उन्होंने किसी तरह अपने किसी कर्मचारी को इसके लिए तैयार किया, ताकि बुजुर्ग की देखरेख हो जाए। और इस चक्कर में वह भी पाजिटिव होकर अस्पताल में ही 10 दिन के लिए भर्ती हो चुके हैं।
इस अमानवीय और अजीब तरह की शर्त के आगे परिजन निगेटिव होने के बावजूद कोविड अस्पताल में अटेंडर बनकर अपने परिजन की देखभाल कर रहे हैं। संक्रमित लोगों के बीच में रहने के कारण ऐसे निगेटिव अटेंडेंट भी दो-तीन दिन में ही कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। भास्कर को कुछ ऐसे परिवारों के लोगों ने भी बताया कि उनके घर के सभी सदस्य पाजिटिव होकर अस्पताल या कोविड सेंटर चले गए, उन्हें अटेंडेंट ढूंढने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इन्हीं परिस्थितियों के बीच चौंका देने वाली सच्चाई यह भी सामने आई कि बहुत से लोग अटेंडेंट बनने के लिए अपने पुराने विश्वासपात्र कर्मचारी को राजी कर रहे हैं, यह बताकर कि वे भी संक्रमित हो सकते हैं। सब मिलाकर, सिस्टम की खामी की वजह से कई निगेटिव लोग भी संक्रमण की ओर धकेले जाने लगे हैं।

अस्पतालों का आधा स्टाफ नौकरी से ही हुआ गायब
भास्कर टीम ने कुछ अस्पतालों से बात की, तो उनका कहना है कि इस समय स्टाफ काफी कम हो गया है। अस्पताल के जितने कर्मचारी पॉजिटिव आ रहे हैं, उसमें से 50 प्रतिशत से ज्यादा क्वारेंटाइन के बाद नौकरी में ही नहीं लौट रहे हैं। फोन पर बातचीत में वे साफ कह रहे हैं कि जब हालात सामान्य होंगे, तब नौकरी पर विचार करेंगे। कुछ अस्पतालों का कहना है कि ऐसे बुजुर्ग की देखरेख के लिए एक तो स्टाफ नहीं है, दूसरा यह कि जो हैं उन्हें भी हर बार पीपीई किट पहनकर भीतर जाना होगा। पीपीई किट भी कम ही हैं, इसलिए अटेंडेंट उपलब्ध नहीं करवाया जा सकता।

79 के लकवाग्रस्त बुजुर्ग की सेवा कर रहा युवक भी हुआ पॉजिटिव
शहर का एक परिवार कोरोना की चपेट में आ गया, जिनमें 79 साल के लकवा ग्रस्त बुजुर्ग भी है। राजधानी के कोविड अस्पताल में जब इनको भर्ती करवाने ले जाया गया, तो चार घंटे तक उन्हें एंबुलेंस से निकाला ही नहीं गया। अस्पताल से फोन किया गया कि तुरंत अटेंडेंट चाहिए। उन्होंने 30 साल के कर्मचारी को राजी किया। बुजुर्ग की देखभाल कर रहा वही युवक तीन दिन बाद पॉजिटिव हो गया।

बुजुर्ग दिक्कत में, अटेंडेंट को भी मदद नहीं मिल रही हेल्पडेस्क से
अस्पताल में बुजुर्ग मरीजो का हालचाल या उन्हें किसी तरह की जरूरत पड़ने पर संपर्क के लिए हेल्पडेस्क भी बनाई गयी है। लेकिन मरीज ठीक है नहीं इसके अलावा कोई और जरूरत पड़ने पर हेल्पडेस्क हाथ खडे कर देती है। शहर के कोविड अस्पताल में भर्ती एक बुजुर्ग शख्स के परिजन ने बताया कि उन्होंने अटेंडर का फोन आने के बाद पिता के लिए नारियल पानी भिजवाया, लेकिन दोपहर से लेकर शाम तक उन तक नहीं पहुंचा। क्योंकि अस्पताल के स्टाफ ने उसे गेट के अंदर भेजा नहीं।

न ऐसा प्रोटोकॉल न गाइडलाइन
कोरोना कोर कमेटी के सदस्यों के अनुसार कोविड ट्रीटमेंट गाइडलाइन में परिजनों से अटेंडेंट मांगने का उल्लेख ही नहीं है। क्योंकि इससे निगेटिव व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है। यह कोरोना नियंत्रण के प्रयासों को धक्का देने जैसा है। परिजन अगर खुद संक्रमित हैं या किसी और अस्पताल में भर्ती है, या घर पर कोई नहीं है, तब बुजुर्ग की देखभाल अस्पताल को करनी चाहिए।



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फाइल फोटो।


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