कोरोना से लोग परेशान, इसलिए ई-चालान भेजना गृहमंत्री ने रोका, शहर के विधायक विरोध में , September 24, 2020 at 05:35AM

कोरोना काल में फरवरी-मार्च के ट्रैफिक उल्लंघन को लेकर लोगों के घरों में सितंबर में भेजे गए 2 से 10 हजार रुपए तक के जुर्माने वाले ई-चालान को लेकर सरकार सख्त हो गई है। भास्कर ने बुधवार को ही यह मुद्दा उठाया कि सिर्फ सितंबर में शहर के 2 हजार लोगों के घर ई-चालान भेजे जा चुके हैं और 8 हजार चालान तैयार हैं। कोरोना संकट के समय में लोगों का बजट बिगाड़ देने वाले ई-चालान का पश्चिम विधायक विकास उपाध्याय ने विरोध किया था, और अब खुद गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने इसे तुरंत रोकने का निर्देश दिया है।
राजधानी में पुलिस अब तक ई-चालान से 25.37 लाख रुपए वसूल चुकी है। यह जुर्माने सड़कों और चौराहों पर हो रहे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से संबंधित हैं। इस साल की शुरुआत से अब तक 48 हजार गाड़ी वालों से जुर्माने के तौर पर 2 करोड़ से ज्यादा वसूले गए हैं। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि कोरोना संकट और लाॅकडाउन की वजह से लोगों की आमदनी प्रभावित है। इसलिए ई-चालान भेजने का सिलसिला तुरंत रोका जाए। गृहमंत्री ने कहा कि जिन्हें चालान भेजा जा चुका, उन्हें समय दिया जाए। यह समय लोगों को राहत देने का है। उन्होंने कहा कि पुलिस को यह भी स्पष्ट करना होगा कि फरवरी-मार्च का चालान अभी क्यों भेजा जा रहा है।

अभी चालान समझ से परे : बृजमोहन
"शहर का हर व्यक्ति परेशान हैं, इसके बावजूद मोटे जुर्माने का चालान अभी घर भेजना समझ से परे हैं। लोग मरीजों को लेकर निकल रहे हैं, बुजुर्गों को ले जा रहे हैं, पत्नी-बच्चे को अस्पताल ले जा रहे हैं तो उन्हें पूछताछ करके छोड़ देना चाहिए।"
-बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व गृहमंत्री, छत्तीसगढ़

लोग परेशान हैं, मदद की जाए
"चालान नियम तोड़ने पर होता है, लेकिन लोग अभी परेशान हैं। कोरोना का संक्रमण भी बढ़ रहा है। जिन लोगों को ई-चालान भेजा गया है, उन्हें कैसे मदद कर सकते हैं, क्या विकल्प हो सकता है, इस बारे में मैं खुद पुलिस अफसरों से बात करूंगा।"
-कुलदीप जुनेजा, विधायक रायपुर उत्तर

कोई विकल्प जरूरी : पूर्व डीजी
"कोरोना और लॉकडाउन के कारण लोगों की आर्थिक हालत खराब है। प्राइवेट सेक्टर और रोज कमाने-खाने वालों के लिए बड़ा संकट है। ऐसे में घरों में चालान भेजने का औचित्य नहीं, बल्कि यह आर्थिक राहत देने का समय है। ऐसे समय में चालान की राशि कम होनी चाहिए, या फिर चेतावनी से काम चलाना चाहिए।"
-राजीव माथुर, पूर्व डीजी-छत्तीसगढ़



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फाइल फोटो।


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