राजधानी में लाॅकडाउन एक हफ्ता बढ़ने की चर्चा, कारोबारी विरोध में, कहा- लाॅकडाउन कोरोना की रोकथाम का कारगर उपाय नहीं , September 24, 2020 at 06:01AM

राजधानी में 22 सितंबर से शुरू हुए एक हफ्ते के सख्त लाॅकडाउन को हफ्तेभर के लिए और बढ़ाने की अफवाहें कारोबारी जगत में फैल रही हैं। तर्क दिए जा रहे हैं कि एक हफ्ते के लाॅकडाउन से कोरोना चेन टूटना मुश्किल है, साथ ही स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव भी कह चुके हैं कि लाॅकडाउन कम से कम 10 दिन का होना चाहिए, इसलिए ऐसा करने की तैयारी है। हालांकि प्रशासन ने फिलहाल ऐसी किसी संभावना से साफ इंकार किया है, लेकिन लाॅकडाउन बढ़ने की चर्चाओं ने व्यापारी वर्ग को बेचैन कर दिया है। प्रदेश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन छत्तीसगढ़ चैंबर, कैट और फिक्की समेत शत-प्रतिशत कारोबारी संगठनों के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि इस बार लाॅकडाउन के लिए न तो उनसे सहमति ली गई, और न ही राय पूछी गई है। उनका यह भी कहना है कि लाॅकडाउन कोरोना की रोकथाम का कारगर उपाय साबित नहीं हो पाया है।
22 जुलाई से 4 अगस्त तक लगाए गए लाॅकडाउन से पहले सभी कारोबारी संगठन से प्रशासन ने मशविरा लिया था। तब रायपुर के साथ-साथ बिरगांव निगम क्षेत्र को लॉकडाउन किया गया था। इस लॉकडाउन को दो महीने भी पूरे नहीं हुए हैं। कारोबारी संगठनों का कहना है कि इसी वजह से सब्जी तथा अन्य छोटे व्यापार भले ही सीमित समय के लिए, लेकिन खोले गए थे ताकि लोगों की जरूरत पूरी हो और दैनिक काम-कमाई वालों को रोजगार मिलता रहे।

इसलिए कई तरह की राहतें दी गई थी, लेकिन इस बार किराना, सब्जी तक की दुकानें बंद कर दी गईं हैं। इसका लाॅकडाउन खत्म होने के बाद प्रभाव सामने आ सकता है। कारोबारियों में चर्चा है कि प्रशासन ने जिस बैठक में लाॅकडाउन का फैसला किया, उसमें केवल सरकारी अफसर थे। यह चर्चा उच्चस्तर तक है कि इस बार मंत्रालय से जिले तक के सरकारी कर्मचारी-अधिकारी दफ्तर खोलने के पक्ष में नहीं थे, इसलिए लाॅकडाउन करवाया गया। हालांकि प्रशासन का दावा है कि कोरोना चेन तोड़ने के लिए लाॅकडाउन किया गया है।
बढ़ी अवधि में कुछ छूट भी
अभी पहले हफ्ते का लॉकडाउन ठीक से शुरू भी नहीं हुआ कि शहर में यह खबर तेजी से फैल रही है कि इस लॉकडाउन को एक हफ्ते और बढ़ाया जाएगा। हर कारोबारी सेक्टर ने इस संकेत की पुष्टि की कि लाॅकडाउन एक हफ्ता बढ़ सकता है। सूत्रों के अनुसार एक हफ्ते के लॉकडाउन के बाद किराना और सब्जी को छूट मिल सकती है, लेकिन लॉकडाउन के नियम लागू रखे जा सकते हैं।

व्यापारिक संगठनों की राय
"इस बार के लॉकडाउन के लिए कारोबारी पक्ष में नहीं थे। प्रशासन ने बिना किसी बैठक के ही आदेश जारी कर दिया। सरकारी नियम है, इसलिए पालन कर रहे हैं।"
-जितेंद्र बरलोटा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ चैंबर

"एक लॉकडाउन से उबरे नहीं कि दूसरा लगा दिया गया। कारोबार थोड़ा पटरी में आया, फिर पीछे चला गया। लेकिन प्रशासन का फैसला है, इसलिए मानना होगा।"
-अमर पारवानी, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कैट

"इस लाॅकडाउन का 90 फीसदी सराफा कारोबारियों ने विरोध किया। सबका कहना है कि लॉकडाउन कारगर या स्थायी उपाय नहीं है। प्रशासन का फैसला मानना ही पड़ा।"
-हरख मालू, अध्यक्ष रायपुर सराफा एसोसिएशन

"मुंबई, सूरत में कोरोना के केस बढ़े, लेकिन लॉकडाउन नहीं लग रहा है। रायपुर के कपड़ा कारोबारी बंद के समर्थन में नहीं।"
-चंदर विधानी, अध्यक्ष पंडरी कपड़ा मार्केट

"सभी संगठनों और पक्षों से बात करने और उनकी सुझाव-सहमति के बाद ही लॉकडाउन का फैसला लिया गया है।"
-डॉ. एस भारतीदासन, कलेक्टर



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फाइल फोटो।


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