कब्जे और पट्‌टे की जमीन पर रकबा बढ़ाने लगाए थे पौधे , September 25, 2020 at 06:01AM

बलरामपुर जिले के राजपुर इलाके के धंधापुर पंचायत में 3 साल पहले केंद्रीय रेशम बोर्ड के महिला किसान सशक्तिकरण स्कीम के तहत एनजीओ के माध्यम से अर्जुनी के पौधे टसर उत्पादन के लिए लगाए गए, लेकिन कई हेक्टयर में पौधे ऐसे जमीन पर लगा दिए गए, जिसमें किसान सालों से खेती कर रहे थे या उनके पट्टे की जमीन थी।
इस पर गांव के लोगों ने विरोध भी दर्ज कराया था, लेकिन तब उनकी बात नहीं सुनी गई। यही वजह है कि गांव के लोगों का सहयोग इस करोड़ों के प्रोजेक्ट को नहीं मिला और मवेशियों ने पौधों को साफ कर दिए तो एनजीओ ने भी देखरेख में सजगता नहीं दिखाई। बता दें कि इसे लेकर दैनिक भास्कर ने खबर प्रकाशित कर बताया था कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी यहां टसर उत्पादन शुरू नहीं हो सका। इसके बाद के केंद्रीय रेशम बोर्ड के अधिकारियों के साथ फारेस्ट के एसडीओ और रेंजर के अलावा एनजीओ के पदाधिकारी पहुंचे थे और गांव वालों से बातचीत कर उनसे इसे लेकर जानकारी ली। हालांकि इस प्रोजेक्ट में पैसों का खर्च किस तरह से हुआ और लगाए गए प्लांटेशन की सिचाईं, सुरक्षा और देखरेख का प्लान किस तरह था और उस पर कितना पैसा खर्च किया गया, इसकी जानकारी नहीं दी गई। इस दौरान एनजीओ द्वारा गांव में गठित महिला समूहों और लोगों से बातकर फिर से प्लांटेशन की बात कही है और अधिकारियों ने 50 हेक्टेयर में प्लांटेशन मनरेगा से कराने की बात कही है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि अगर फिर से कब्जे और पट्टे की जमीन पर पौधरोपण किया जाएगा तो गांव में विवाद हो सकता है।



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Plants were planted to increase occupancy and lease area


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