प्रदेश में कोरोना से चार डॉक्टर, चार हेल्थकर्मियों की ड्यूटी करते हुए मृत्यु, केवल एक को मिला बीमा क्लेम , September 26, 2020 at 05:59AM

राज्य में अब तक कोरोना के मरीजों का इलाज करते हुए 200 से ज्यादा डाक्टर संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से तीन सरकारी और एक प्राइवेट अस्पताल के डाक्टर की मौत हो चुकी है। सभी डाक्टर कोरोना पीड़ितों का इलाज करते हुए संक्रमित हुए और जान गई। इसके अलावा दो आशा हेल्थ वर्कर और दो लैब तक्नीशियनों की मौत भी कोरोना से मौत हो चुकी है। वे भी कोरोना मरीजों के इलाज में फ्रंट लाइन वारियर के तौर पर सेवा दे रहे थे। इनमें केवल नगरी धमतरी के हेल्थ सेंटर में पदस्थ डाक्टर के परिजनों को ही 50 लाख का बीमा क्लेम मिला है। धमतरी नगरी के सरकारी अस्पताल में पदस्थ डा. रमेश ठाकुर की कोरोना अस्पताल में ड्यूटी थी। कोविड संक्रमितों का मरीजों का इलाज करते हुए डा. ठाकुर संक्रमित हुए और 25 अगस्त को उनकी इलाज के दौरान कोरोना से ही मौत हो गई। इसी तरह बीजापुर हेल्थ सेंटर में पदस्थ डा योगेश गबेल और कसडोल में पदस्थ डा. बीपी बघेल की भी मृत्यु हो गई। डा. गबेल ने 28 अगस्त और डा. बघेल ने 14 सितंबर को अंतिम सांस लीं। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डा. श्रीकांत राजिम वाले का कहना है कि तीनों डाक्टरों के बीमा क्लेम की कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इन्हें क्लेम मिलने में ज्यादा देरी नहीं होगी।

आशा वर्कर के परिजन को भी क्लेम
स्वास्थ्य विभाग कोविड मरीजों के इलाज में फ्रंट लाइन वारियर की भूमिका निभाने वाली आशा वर्कर राम कुमारी सोनी का प्रकरण बीमा कंपनी को भेजा है। आशा वर्कर सोनी की ड्यूटी कोविड अस्पताल में लगी थी। मरीजों का इलाज करते समय वे कोरोना से संक्रमित हुईं और 5 सितंबर को उनकी मृत्यु हो गई। 24 सितंबर को रायगढ़ में एक और आशा हेल्थ वर्कर की मौत हुई है। इसके पूर्व दुर्ग पाटन झीट हेल्थ सेंटर के लैब तकनीशियन और एक ऑडियो मैट्रिक तकनीशियन की जून में कोरोना से मौत हुई थी। उनका प्रकरण भी क्लेम के लिए भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार बीमा क्लेम की पॉलिसी में केवल डाक्टरों का उल्लेख नहीं है। गाइड लाइन में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे स्वास्थ्य वर्कर जो मरीजों के इलाज में फ्रंट लाइन वारियर के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं वे अगर कोरोना से संक्रमित होते हैं और उसी से उनकी मौत हो जाती है तो उनके परिजनों को बीमा क्लेम मिलेगा।

33 साल के डाक्टर की 6 माह पहले हुई थी शादी, लैब तकनीशियन 24 साल का
बीजापुर के डा. गभेल की छह माह पहले ही शादी हुई थी। 33 साल के डाक्टर 14 दिन कोरोना ड्यूटी करने के बाद 14 दिन के क्वारेंटाइन में चले गए। तीन चार दिन तक उन्होंने किसी से मोबाइल पर बात नहीं की। दोस्तों को शक हुआ तो उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को सूचना दी। उसके बाद टीम पहुंची तो वे मृत हालत में मिले। मृत्यु के बाद उनका टेस्ट किया गया, जिसमें कोरोना से मौत की पुष्टि हुई। इसी तरह दुर्ग के लैब तकनीशियन की भी एक साल पहले ही शादी हुई थी,जबकि दूसरा तो अविवाहित था। उसकी उम्र केवल 24 साल की थी।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
फाइल फोटो।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3mSaLEf

0 komentar