अफसरों ने राज्य शासन को भेजा प्रस्ताव, आईसीएमआर ने कहा - प्लाज्मा थैरेपी कोरोना मरीजों के लिए कारगर नहीं , September 30, 2020 at 06:51AM

कोरोना काल में प्लाज्मा की असफल थैरेपी के नाम पर लूट का धंधा चल रहा है। कुछ सेंटरों में 30 से 38 हजार में एक-एक यूनिट प्लाज्मा बेचा जा रहा है। जबकि आईसीएमआर की रिपोर्ट में बताया जा चुका है कि ये थैरेपी कोविड-19 के मरीजों के लिए सफल नहीं है। इसके बावजूद, अब छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग भी सरकारी सेंटरों में प्लाज्मा थैरेपी से इलाज की तैयारी कर रहा है। शासन ने अभी यह प्रस्ताव मंजूर नहीं किया, पर शहर में प्लाज्मा हेल्प कॉल सेंटर चालू कर दिया गया है, और यहां से स्वस्थ हुए कोविड मरीजों को प्लाज्मा दान का फोन भी पहुंच रहा है। कोविड-19 से स्वस्थ्य होकर आ चुके लोगों को फोन कर उनसे प्लाज्मा डोनेट करने की सहमति ली जा रही है।

कॉल सेंटर से फोन करने वाले सबसे पहले संक्रमित होकर स्वस्थ्य हो चुके लोगों सेे हालचाल पूछ रहे हैं। उसके बाद उनसे पूछा जा रहा है कि क्या आप अपना प्लाज्मा डोनेट करना चाहते हैं। सहमति देने वालों को बता दिया जा रहा है कि आपको प्लाज्मा डोनेट करने के एवज में कोई मदद नहीं दी जाएगी। घर से प्लाज्मा निकालने के लिए ले जाया जाएगा और वापस छोड़ा जाएगा।

प्राइवेट सेंटरों में मनमानी, कीमत पर कोई रोक नहीं
राज्य के कुछ निजी सेंटरों में जरूरत के हिसाब से डाॅक्टर प्लाज्मा थैरेपी का उपयोग कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के ही कुछ आला अफसरों को शिकायत मिली है कि उन सेंटरों में मरीजों के परिजनों से 30 से 38 हजार तक 400 एमएल का वसूला जा रहा है। इमरजेंसी में तुरंत मरीज के लिए जरूरत बताई जाती है। परिजन उस समय डोनर की व्यवस्था नहीं कर पाते। उन्हें ये भी पता नहीं रहता कि कौन पॉजिटिव से ठीक होकर आया है और प्लाज्मा दान करना चाहता है। ऐसे में उन्हेेंं मुंहमांगी कीमत देनी पड़ती है।

इसलिए बनाया काॅल सेंटर
स्वास्थ्य और प्रशासनिक अफसरों की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि कई बार कोरोना संक्रमित के परिवार वाले प्लाज्मा के लिए भटकते हैं। वाट्सअप ग्रुप में जरूरतमंदों के मैसेज चलते रहते हैं। सरकारी काॅल सेंटर में उनका रिकार्ड उपलब्ध रहने से वे सीधे डोनर से संपर्क कर प्लाज्मा प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए एक-एक को कॉल किया जा रहा है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग के पास एक-एक कोरोना संक्रमित की हिस्ट्री है ऐसे में उन्हें स्वस्थ्य होने वालों से संपर्क करने में दिक्कत नहीं हो रही है।

रिसर्च के बाद प्लाज्मा थैरेपी पर ये कहा था आईसीएमआर ने
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च आईसीएमआर ने प्लाज्मा थैरेपी पर हालिया रिसर्च के बाद कहा ये थैरेपी कोरोना मरीजों की मौत रोकने में कारगर नहीं और न ही यह बिगड़ी हुई हालत को रोकने में मदद करती है। आईसीएमआर के मुताबिक 14 राज्यों के 39 अस्पतालों में 464 मरीजों पर प्लाज्मा थैरेपी का ट्रायल किया गया। इसके लिए इंटरवेंशन और कंट्रोल दो ग्रुप बनाए गए। इंटरवेंशन ग्रुप में 235 को प्लाज्मा चढ़ाया गया और कंट्रोल ग्रुप में 233 को कोविड-19 का स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट दिया गया। 28 दिनों तक दोनों ग्रुप पर नजर रखी गई। जिस ग्रुप में 235 मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया गया उसमें 34 की मौत हो गई, जबकि जिस ग्रुप को प्लाज्मा थैरेपी नहीं दी गई उसमें 31 मरीजों की मौत हुई। दोनों ही ग्रुप में 17-17 की हालत गंभीर बनी हुई है।
नोट- आईसीएमआर की रिसर्च के नतीजे भास्कर वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

किन मरीजों पर उपयोग का दावा
कोविड-19 के बेहद गंभीर मरीजों को उन लोगों का प्लाज्मा दिया जाता है, जो कोरोना संक्रमित होकर स्वस्थ हो चुके हैं। यानी उनमें एंटी बॉडी डेवलप हो चुकी है। ऐसे मरीजों के रक्त से प्लाज्मा निकालकर गंभीर मरीजों काे चढ़ाया जाता है। यही प्लाज्मा थैरेपी है।

विशेषज्ञों की टीम ने भेजा प्रस्ताव
भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों की कमेटी ने प्लाज्मा थैरेपी का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इस कमेटी में चिकित्सा शिक्षा संचालक डाॅ. विष्णु दत्त, अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. विनीत जैन, चेस्ट एंड टीबी के विशेषज्ञ डाॅ. पंडा, डाॅ. ओपी सुंदरानी, डाॅ. निर्मल वर्मा है।

विशेषज्ञों की राय से भेजा प्रस्ताव, रेट पर भी करेंगे कंट्रोल
"कोरोना के इलाज में जुटे डाक्टरों और विशेषज्ञों की सहमति से प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इलाज के हर फार्मूले का उपयोग होना चाहिए। अभी प्लाज्मा के रेट पर कोई कंट्रोल नहीं है। हमने 200 एमएल की एक यूनिट की कीमत 6000 करने का प्रस्ताव दिया है। इससे प्राइवेट में ली जा रही मनमानी कीमत पर अंकुश लगेगा।"
-डाॅ. विष्णु दत्त, शिक्षा संचालक, प्रभारी चिकित्सा



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प्रतीकात्मक फोटो।


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