राज्य में बढ़ी 10 फीसदी दुकानें व फैक्ट्रियां, प्रदेश की हर इकॉनामी यूनिट जीपीएस पर , October 08, 2020 at 06:35AM

जॉन राजेश पाल | प्रदेश की आर्थिक गणना के प्रारंभिक आंकड़े में पिछले छह सालों में इकॉनामी यूनिटों में दस फीसदी का इजाफा हुआ है। यह 72 लाख से बढ़कर 77 लाख तक पहुंच गई हैं। जल्द इसके फाइनल आंकड़े आने पर इसमें एक प्रतिशत और बढ़ोतरी होने की संभावना है। राज्य का इकॉनामी सिनेरियो सामने आने से यह पता चल सकेगा कि प्रदेश में इकॉनामी एक्टिवटी से जुड़ी कितनी मैनुफैक्चरिंग यूनिट, ट्रेडिंग यूनिट, पंजीकृत-अपंजीकृत यूनिटें हैं। मैन पावर, कांट्रैक्ट वर्कर, मेल-फिमेल वर्कर का खाका भी मिलेगा। इससे प्रदेश की प्रगति व योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। इस बार की आर्थिक गणना 2013 के बाद हुई। इसकी शुरूआत पिछले साल अगस्त में हो गई थी इस वजह से छह सालों में इकनॉमिक यूनिटों में कितना इजाफा हुआ यह सामने आ गया। पहली बार गणना ऑनलाइन की गई। इसमें करीब 20 हजार स्टाफ ने गांवों व 10 हजार ने शहरों में योगदान दिया।

राज्य में कितने घरों का रेसीडेंशियल यूज, ये भी जीपीएस पर
इस बार ऑनलाइन काम होने पर प्रदेश की हर इकॉनामी यूनिट जीपीएस पर आ गई है। स्ट्रक्चर विजिट में गणना करने वालों को स्पाट पर जाना पड़ा। अब यह पूरी तरह जानकारी में है कि राज्य में कितने घरों का रेसीडेंशियल यूज हो रहा है। कितनों ने भवनों का कामर्शियल इस्तेमाल हो रहा है। कितने भवनों का पूरी तरह कामर्शियल या कामर्शियल कम रेसीडेंशियल इस्तेमाल हो रहा है। कितनों में आफिस चल रहे हैं। यहां तक की मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल भी जानकारी में आ गए हैं।

सरकार को कामर्शियल यूनिटों को क्लासिफाइड करने में मिलेगी मदद
गणना में मिली यूनिटों से शहरों और गांवों में आर्थिक स्थिति का पता चलेगा। केंद्र सरकार के इंडस्ट्रीज मंत्रालय को भी वर्गवार यूनिटों को बांटने में मदद मिलेगी। इससे सेंसेक्स की तरह सोशियो इकॉनामी सामने आने पर वर्क प्लान बनाए जा सकेंगे।

सुकमा - बस्तर में नेटवर्क ने किया परेशान, कई जगह मैनुअली काम हुआ
ऑनलाइन चल रही गणना में गणकों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा। कई जगह मोबाइल नेटवर्क नहीं मिला। खासकर बस्तर और सुकमा जिलों के इलाकों में। तब गणकों को मैनुअली काम करना पड़ा। इसी वजह से प्रारंभिक आंकड़ों के जारी करने में थोड़ा विलंब हो गया।

अब हर तीसरे साल में हो सकती है आर्थिक गणना
अब हर तीसरे साल में आर्थिक गणना हो सकती है। इस पर विचार चल रहा है। छत्तीसगढ़ के स्कीम इंचार्ज आरके श्रीवास्तव की माने तो पिछली गमना 2013 में हुई थी। फिर पिछले साल गणना प्रारंभ हुई। यानी छह सालों का डेटा एकत्र किया गया। बेसिक सेंसेक्स के बाद इसका फालोअप सर्वे भी किया जाता है। सरकार का मानना है कि समय के परिस्थितियों में जल्दी-जल्दी बदलाव हो रहा है। इसलिए आर्थिक गणना भी शॉर्ट टाइम में होना चाहिए।

रायपुर, दुर्ग के बाद अब बिलासपुर का नंबर
बताया गया कि इसमें 68 लाख 54 हजार 577 आवासीय, 4 लाख 93 हजार 904 वाणिज्यिक इकाइयों एवं अन्य आर्थिक गणना इकाइयों की संख्‍या 4 लाख 26 हजार 344 है। 5 अक्टूबर तक रायपुर जिले में सबसे अधिक 7 लाख 28 हजार 114 आर्थिक इकाइयों की गणना की गई। इसमें 6 लाख 37 हजार 274 आवासीय, 4 लाख 9 हजार 648 वाणिज्यिक तथा 41 हजार 192 अन्‍य आर्थिक गणना इकाइयों शामिल हैं। दूसरे नंबर पर दुर्ग है। दुर्ग जिले में 6 लाख 30 हजार 114 आर्थिक गणना इकाइयों में गणना की गई। इसमें 5 लाख 39 हजार 509 आवासीय, 64 हजार 128 वाणिज्यिक तथा 26 हजार 477 अन्‍य आर्थिक गणना इकाइयां शामिल हैं। बिलासपुर जिला में 5 लाख92 हजार 248आर्थिक गणना इकाइयों के साथ तृतीय स्थान पर है। इसमें 5 लाख 24 हजार 017 आवासीय, 4 लाख 4 हजार 404 वाणिज्यिक तथा 2 लाख 3 हजार 827 स्थान आर्थिक गणना इकाइयों शामिल हैं।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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