प्रापर्टी की बुकिंग कैंसिल करने पर पंजीयन राशि राजसात कर रहा आरडीए, पहले 10% काट पंजीयन राशि लौटाई जाती थी, लेकिन कोरोना के बीच अचानक बदला नियम , October 29, 2020 at 05:37AM

ठाकुरराम यादव | रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने कोरोना काल यानी कमाई के संकट के इस दौर में उन लोगों की स्थिति खराब कर दी, जिन्होंने एक-दो साल पहले आरडीए के अलग-अलग प्रोजेक्ट में मकान बुक करवाए, और अब बाकी रकम देने में सक्षम नहीं रह गए हैं। कोरोना काल में राहत देने के बजाय आरडीए ने चुपके से आदेश जारी किया है कि अगर कोई व्यक्ति पुरानी बुकिंग कैंसिल करवाएगा तो उसे पंजीयन शुल्क की एक फूटी कौड़ी नहीं लौटाई जाएगी। यह रकम 30 हजार से 5 लाख रुपए तक है। जबकि पहले नियम यह था कि बुकिंग कैंसिल करने पर पंजीयन की मूल राशि 10 प्रतिशत काटकर लौटा दी जाएगी। आर्थिक संकट की वजह से आरडीए में रोजाना ही लोग पहुंच रहे हैं कि अब वे प्रापर्टी खरीदने की स्थिति में नहीं हैं, लिहाजा उन्हें पैसे लौटा दिए जाएं। आरडीए ऐसे लोगों को यह कहकर बैरंग लौटा रहा है कि अब पंजीयन राशि राजसात करने का फैसला कर लिया गया है, इसलिए रकम वापस नहीं मिलेगी।

आरडीए के इस फैसले ने उन लोगों की दिक्कत बढ़ा दी है, जो कोरोना की वजह से अपनी नौकरी गंवा बैठे या आर्थिक संकट से ऐसे घिरे कि बुक की गई प्रापर्टी की बची राशि देने की स्थिति नहीं है। जो लोग बुकिंग कैंसिल करने के लिए आरडीए पहुंच रहे हैं, उन्होंने आरडीए के कमल विहार, इंद्रप्रस्थ और बोरियाखुर्द में चल रहे कई तरह के प्रोजेक्ट में प्रापर्टी बुक की थी। प्रापर्टी में प्लाट से लेकर स्वतंत्र मकान और फ्लैट्स भी हैं। ये सभी योजनाएं कई साल से चल रही हैं और अब भी चालू हैं।

दो-तीन साल से लोग यहां प्रापर्टी बुक कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि बुकिंग पहले कैंसिल नहीं होती थी। पहले संख्या कम थी और आरडीए अपने नियम के मुताबिक बुकिंग कैंसिल करने पर 10 प्रतिशत राशि काटकर पैसे लौटा रहा था। लेकिन हाल में संचालक मंडल ने फैसला किया कि अब पंजीयन राशि राजसात की जाएगी, यानी रकम नहीं लौटाई जाएगी। इस फैसले के पीछे तर्क यह दिया गया था कि निर्माण शुरू होने के बाद बुकिंग कैंसिल होने से संबंधित मकान या फ्लैट खाली रह जाता है। लेकिन तब हालात अलग थे, कोरोना के बाद अब लोगों के आर्थिक हालात बदल चुके हैं।

बुकिंग के समय के नियम को पूरा ही बदल डाला
आरडीए में बुकिंग कैंसिलेशन को लेकर स्पष्ट नियम था कि पंजीयन के बाद यदि किसी व्यक्ति को मकान आबंटित नहीं हुआ हो तो, कैंसिलेशन पर आरडीए बिना ब्याज के पूरे पैसे लौटाएगा। लेकिन यदि कोई व्यक्ति पंजीयन के बाद खुद मकान नहीं खरीदना चाहता या पंजीयन राशि वापस लेना चाहता है, उसे पंजीयन की 90 फीसदी रकम ही लौटाई जाएगी। जिन लोगों ने बुकिंग करवाई, उन्हें उम्मीद थी कि कैंसिल करने पर उन्हें 90 प्रतिशत राशि तो मिलेगी ही। कोरोना काल में कई लोगों के हालात ऐसे बदले कि उन्हें घर खरीदने का सपना छोड़ना पड़ा है। यही नहीं, जरूरत की वजह से कई लोग बुकिंग कैंसिल करने के लिए भी पहुंच रहे हैं। लेकिन पिछले तीन माह से ऐसे लोगों को यह कहकर लौटाया जा रहा है कि आरडीए के संचालक मंडल ने पंजीयन राशि राजसात करने का फैसला किया है, इसलिए पैसे नहीं मिलेंगे। भास्कर को पता चला है कि आरडीए चेयरमैन को पिछले एक माह में ऐसे दो दर्जन से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं।

प्रापर्टी की कीमत का 10 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लेता है आरडीए
आरडीए पंजीयन के समय संबंधित प्रापर्टी का 10 प्रतिशत पैसा बुकिंग अमाउंट के रूप में लेता रहा है। यह हर तरह के प्रोजेक्ट में समान है। प्राधिकरण के सस्ते आवासीय प्रोजेक्ट में बोरियाखुर्द में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान हैं। इनका पंजीयन शुल्क 30 हजार रुपए है। वहीं कमल विहार और इंद्रप्रस्थ में प्लाट्स और डुप्लेक्स मकानों की कीमत 11 लाख से लेकर 45 लाख रुपए तक है। 10 प्रतिशत के हिसाब से इनका पंजीयन शुल्क एक लाख से 5 लाख रुपए तक है। संचालक मंडल के फैसले के अनुसार अब कोई व्यक्ति पंजीयन कराने के बाद मकान या प्लाट्स नहीं ले रहा है तो आरडीए उनके 30 हजार से लेकर पांच लाख रुपए तक रकम पूरा जब्त कर रहा है।

खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देकर पहले भी किए अजीब फैसले
आरडीए का लोगों के खिलाफ जाने वाला यह पहला फैसला नहीं है। खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देकर आरडीए लगातार ऐसे फैसले कर रहा है। इससे पहले गरीबों और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कमजोर और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए बनाए जा रहे मकानों में आरडीए ने टेंडर सिस्टम लागू कर दिया, जो पहले लॉटरी सिस्टम लागू था। यानी मकान की तय कीमत पर यदि ज्यादा आवेदक आते हैं तो उनके बीच लॉटरी से मकान का आबंटन होता था। टेंडर सिस्टम में यह हुआ कि लोगों को बोली लगानी होगी। इससे मकान की कीमत बढ़ गई, जो पीएम आवास योजना के मूल उद्देश्य का ही उल्लंघन है। सूत्रों का कहना है कि ये सारे फैसले एक पूर्व चेयरमैन और सीईओ के कार्यकाल में हुए हैं।

शासन से आग्रह किया जाएगा कि ऐसा नियम बने जिससे लोगों को नुकसान न हो
"यह सही है कि बहुत सारे लोग पंजीयन राशि राजसात करने की शिकायत लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं। ऐसे समय में यह निश्चित तौर पर दुखद लगता है। हम जल्द ही इस संबंध में शासन को अवगत कराएंगे और आग्रह किया जाएगा कि ऐसा नियम बने जिससे लोगों को नुकसान न हो।"
-सुभाष धुप्पड़, चेयरमैन आरडीए



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On canceling the booking of the property, the RDA, which is registering the registration amount, was earlier deducted 10% of the registration amount, but the rule suddenly changed between Corona


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