सीपत में 12वीं के छात्र ने फंदा लगाकर कर ली खुदकुशी, कारण भी पता नहीं, ये चिंता का विषय क्योंकि तनाव बढ़ रहा , October 31, 2020 at 07:00AM

सीपत में बारहवीं का छात्र जिसे कोई परेशानी नहीं थी उसने खुदकुशी कर ली। यह मामूली घटना नहीं है। आपके बच्चे क्या कर रहे हैं, उनपर नजर रखिए। मनोचिकित्सक डॉ. संदीप तिवारी कहते हैं किसी को एक ही दिन में आत्महत्या के ख्याल तक नहीं आते। इससे पहले अवसाद के हल्के लक्षण नजर आते हैं। इसे हमें समझना होगा। सीपत उच्चभट्‌ठी निवासी सुखदेव कुमार मोहित 18वर्ष 12वीं का छात्र था। गुरुवार को वह बड़ी मां के साथ था। उसकी मां व छोटा भाई रिश्तेदार के घर डगनिया गए थे। रात को बड़ी मां खाना खाने के लिए कही तो वह मना कर दिया। कहा अभी भूख नहीं है। बड़ी मां से कहा वह खुद खाना निकालकर खा लेगा। बड़ी मां सो गई। छात्र अपने कमरे में ही था। रात को उसे पता नहीं क्या सूझा वह मयांर में फांसी का फंदा बनाया और उसमें लटक गया। सुबह बड़ी मां उठकर साफ सफाई करने उसके कमरे में गई तो सुखदेव की मौत हो चुकी थी। उसका शरीर फंदे पर झूल रहा था। वह घबरा गई। शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाई फिर कुछ लोग उसकी मां को लेने गए।

पेटिंग का शौक था, खुदकुशी से पहले फंदे का बनाया चित्र
सुखदेव को पेंटिग का शौक था। पुलिस ने शव नीचे उतारकर उसकी जेब की तलाशी ली तो उसमें चिट्‌ठी मिली। इसमें पेन से फंदे गले में डालते हुए एक चित्र बनाया है। लिखा-मैं अपनी मौत के लिए स्वयं जिम्मेदार हूं।

खुदकुशी से पहले के लक्षण
नींद न आना, नींद बार-बार टूटना, भूख न लगना, अपने दोस्तों या परिजनों से कम बात करना, उदास रहना, ऐसे काम जिनमें आपको पहले ख़ुशी मिलती थी। उन कामों में खुशी न मिलना। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत ही किसी मनोचिकित्सक से परामर्श लें।

बच्चे अभी तनाव में क्यों हैं : लॉकडाउन और उसके बाद के महीनों के प्रभाव के बारे में डॉक्टर संदीप तिवारी बताते हैं कि, छात्रों में भविष्य की अनिश्चिता को लेकर तनाव था। खास तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चे तो ज्यादा अवसाद में आ रहे हैं। यहां तक कि मज़दूरों के मामले भी आते, जो काम ढूंढते हैं, व्यापारी यह कहकर हाथ जोड़ लेते कि उनका ख़ुद का काम ठप है, वह किसी और को रोजगार क्या देंगे? घरेलू विवादों और हिंसा के मामले भी बढ़ रहे हैं। अब भी आत्महत्या के प्रयास के दो से तीन मामले तो रोज़ आ ही जाते हैं।



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ये सुसाइड नोट जरूर है लेकिन सही मायने में हम सबके लिए चेतावनी है कि अपने बच्चों का हर पल ध्यान रखना है, क्योंकि परिवार से लेकर समाज में तनाव बढ़ रहा है।


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