अब ऊर्जा, कोल नहीं स्टील, फूड प्रोसेसिंग वनोद्योग पर फोकस, अब तक 14 हजार करोड़ का निवेश , October 24, 2020 at 05:25AM

छत्तीसगढ़ में पिछले 15 साल में कोल,ऊर्जा आधारित कई उद्योग लगाए गए। सत्ता बदलते ही प्रदेश में अब ऐसे उद्योगों की बजाय फूड प्रोसेसिंग, वन आधारित और स्टील उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तरह के उद्योग लगाने वाले उद्योगपतियों को जल, जमीन और आर्थिक रुप से भी मदद की जा रही है।
दरअसल छत्तीसगढ़ में धान, फल, सब्जी और अन्य प्रकार के उत्पाद बहुतायत में पैदा होते हैं। किसान और उसके उत्पादकों को इसका सही दाम मिले तथा राज्य का राजस्व बढ़े इसे ध्यान में रखकर ही ऐसे उत्पादों की प्रोसेसिंग पर पूरा फोकस किया जा रहा है। बस्तर और अन्य जिलों में इससे जुड़े उद्योगों को लगाने की प्रक्रिया भी शुरु हो गई है। इसी तरह धान से एथेनॉल बनाने के लिए मुंगेली में दो तथा जांजगीर और महासमुंद में एक-एक प्लांट लगाने के लिए एमओयू हो चुका है। आंकड़ों को देखें तो जनवरी 2020 से जून 2020 तक 848 औद्योगिक इकाइयों द्वारा 14 हजार 983 करोड़ का निवेश हो चुका है औैर अलग-अलग उद्योगों में 15 हजार 424 लोगों को रोजगार दिया गया। रायपुर में जेम्स एण्ड ज्वेलरी पार्क भी बनाया जाएगा जिससे इस व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर व्यवसाय से जुड़े कारीगरों को रोजगार मिलेगा।

स्टील सेक्टर के लिए कई रियायतें
स्टील सेक्टर को भी कई रियायतें दी गई हैं। राज्य की औद्योगिक नीति 2019-24 के अंतर्गत इस्पात क्षेत्र के मेगा, अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट में निवेश हेतु विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज दिया जाएगा। मेगा निवेशकों के लिए घोषित किए गए पैकेज में अधिकतम 500 करोड़ रूपए वहीं बस्तर संभाग के लिए 1000 करोड़ रूपए तक मान्य होगा। स्पंज आयरन एवं स्टील सेक्टर के उद्योगों के लिए विशेष पैकेज घोषित किया गया है। क्षेत्रवार छूट 60 प्रतिशत से 150 प्रतिशत तक देय होगी। जबकि स्टील उद्योग के ऊर्जा प्रभार में दी गई छूट से इस सेक्टर के लगभग 85 प्रतिशत उद्योगों को सुरक्षा मिली है।

200 फूडपार्क बनेंगे, 101 विकासखंड में जमीन चिह्नांकित
राज्य में 200 फूडपार्क बनाए जाएंगे। इसके लिए 28 जिलों के 101 विकासखंडों में जमीन चिह्नांकित की जा चुकी है। नए फूडपार्क के लिए 19 विकासखंडों में 248.491 हेक्टेयर सरकारी भूमि का हस्तांतरण आदेश भी हो चुका है। सुकमा, छिन्दगढ, कोंटा तथा लोहंडीगुड़ा में जमीन अधिग्रहण कर इसका सर्वेक्षण भी किया जा चुका है।

रक्षा उद्योग के लिए 87 करोड़ का निवेश
प्रदेश में रक्षा श्रेणी के उद्योग भी लगाया जा रहा है। इसकी पहली उत्पादन इकाई के लिए 87 करोड़ रूपए का निवेश होगा। दुर्ग जिले के बिरेभाठ में एटमास्टको लिमिटेड द्वारा उद्योग लगाया जाएगा। इससे डेढ़ सौ लोगों को मिलेगा रोजगार। यहां पर एक-एक लाख बुलेट प्रूफ जैकेट व हेलमेट का होगा उत्पादन। यहां से थलसेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ तथा राज्य सरकार के सशस्त्र बलों के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट व हेलमेट आसानी से उपलब्ध होगा।

बस्तर के युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण
स्टील उद्योग के साथ-साथ बस्तर की स्थानीय कृषि और लघु वनोपज प्रसंस्करण उद्योगों में भी निवेश को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए डिमांड आधारित ट्रेड में प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी। कांकेर जिले के ’गांधी ग्राम’’ कुलगांव में हर्रा प्रसंस्करण का लोकार्पण किया जा चुका है।

जंगल में रोजगार की पहल
वनांचल के लोगों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने तथा उन्हें रोजगार से जोड़ने पर पूरा फोकस है। वन क्षेत्रों में वृक्षारोपण की वर्षों पुरानी नीति को बदलते हुए इमारती पौधों के बजाए फलदार पौधों के रोपण को बढ़ावा दिया है। इस साल 86 लाख से अधिक वनौषधि एवं फलदार पौधे लगाए गए हैं।
पोल्ट्री इंड्रस्ट्रीज पर भी फोकस
इसी तरह पोल्ट्री इंड्रस्ट्रीज को बढ़ावा देने के लिए भी पहल शुरु की गई है। खेती-किसानी से जुड़े हुए मुर्गी पालन और मछली पालन के व्यवसाय की काफी संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए इन व्यवसायों से युवाओं को जोड़ने के लिए पोल्ट्री और मछली पालन के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए मुर्गी खाद के प्रमाणीकरण की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रदेश में 90 प्रतिशत छोटे पोल्ट्री फार्म हैं।



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फाइल फोटो।


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