कोरोना काल ने बढ़ा दी मां और भक्तों के बीच दूरी, 1400 साल पुराने शहर के मंदिर में पहली बार दिखा ऐसा नजारा , October 24, 2020 at 01:29PM

रायपुर के पुरानी बस्ती इलाके में बने प्रचीन महामाया देवी मंदिर में अष्टमी का नजारा अब तक का सबसे जुदा दृश्य था। कोरोना संक्रमण की वजह से बने हालातों के चलते भक्त और देवी के बीच दूरी बढ़ गई। पिछले साल अष्टमी के दिन लगभग 10 हजार से अधिक लोगों ने मंदिर के गर्भ गृह पहुंच कर खचाखच माहौल में देवी के दर्शन किए। इस बार सुबह मंदिर के बाहर 100 से 200 लोगों की भीड़ दिखी। कतार लगाकर लोग भीतर आए और गर्भ गृह से करीब 30 फीट दूर बाहर के कैंपस से ही मां के दर्शन कर लौटा दिए गए। देखें कोरोना काल की इस नवरात्र की तस्वीरें और जानिए मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य।

फोटो गर्भगृह में स्थापित मां की प्रतिमा की है। दरवाजे की सीध में नहीं दिखती। मान्यता है कि स्थापना के वक्त प्रतिमा को गलती से तिरछा रखा गया जिसे बाद में कोई उठाकर ठीक ढंग से रख नहीं सका।
मंदिर के बाहर करीब 1 घंटे तक लोगों को अंदर प्रवेश के इंतेजार करना पड़ा। दोपहर 12 बजे तक ही लोग अंदर जाकर दर्शन कर पाए।
पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर का इतिहास लगभग 1400 साल पुराना है। इसे राजा मोरध्वज ने बनवाया था। पुजारी मनोज शुक्ला के मुताबिक मंदिर की देखरेख का जिम्मा भोंसले राजवंशीय सामन्तों और फिर अंग्रेज सल्तनत ने संभाला।
क्योंकि कोरोना का माहौल है, मंदिर में पहुंचा एक भक्त परिवार के लोगों को वीडियो कॉल के जरिए दर्शन करवाने की कोशिश में नजर आया। इस मंदिर में स्थापित देवी प्रतिमा खारुन नदी के किनारे राजा मोरध्वज को मिली थी, कहा जाता है कि मूर्ति में से आवाज आई थी कि शहर के बीच मंदिर बनाएं।
कन्या पूजन....यह नजारा घरों में देखने को मिलता था। एक व्यक्ति प्रसाद घर से लेकर मंदिर में पहुंचे थे यहां आने वाली बच्चियों का पूजन कर उन्हें प्रणाम किया। मंदिर की परंपरा के नवरात्रि में मुख्य ज्योत वैदिक मंत्रों के बीच चकमक पत्थरों के टुकड़ों को रगड़ने से उठी चिंगारी से जलाई जाती है।
मंदिर के कैंपस के पहले हिस्से में ही भक्तों को रोक दिया गया, यहीं कुछ ने पूजा की और लौट गए। राजा को जब देवी की प्रतिमा मिली तो उन्हें यह एक चट्‌टान की तरह दिखी, उसे सीधा किया तो पता चला कि वह शिला नहीं बल्कि सिंह पर खड़ी महिषासुर मर्दिनी रूप में अष्टभुजी भगवती की मूर्ति है।
ड्यूटी और धर्म । पुलिसकर्मी भी मां को प्रणाम कर अपने ड्यूटी पर निकल गए। पं मनोज बताते हैं कि इस मंदिर की बनावट कुछ ऐसी है कि सूर्योदय के समय किरणें सम्लेश्वरी माता के गर्भगृह तक पहुंचती हैं। सूर्यास्त के समय सूर्य की किरणें मां महामाया के गर्भगृह में उनके चरणों को स्पर्श करती हैं।
मंदिर में भक्ताें को बाहर के कैंपस में आरती दिखाई गई। मंदिर में महाकाली, मां सरस्वती और महालक्ष्मी तीनों विराजमान है। मंदिर के गुंबद श्री यंत्र की आकृति में बनाए गए हैं। मंदिर से जुड़ा इतिहास प्रमाणिक है। इस पर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग ने कई रिसर्च किए हैं।
मंदिर के बाहर एक स्क्रीन लगाई गई है, अंदर की तरफ हवन और आरती की लाइव तस्वीरें लोगों ने देखी, यह पहली बार हुआ जब वहां लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं थी। मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां देवी खुद विराजमान हैं। हजारों लोग यहां मन्नत मांगने और पूरी होने पर देवी का धन्यवाद करने पहुंचते हैं।


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फोटो रायपुर के महामाया मंदिर के बाहर की है। सुबह से ही मंदिर के बाहर लोग जुटते रहे, कोई अंदर जाने के लिए प्रतीक्षा करता रहा तो किसी ने बाहर से मां को प्रणाम कर लिया।


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