राजधानी के चार छोटे केयर सेंटरों में एक भी मरीज नहीं, 2 हजार बेड के बड़े सेंटर को शुरू करने की नौबत नहीं , October 05, 2020 at 06:33AM

अगस्त के अंत से सितंबर मध्य तक कोरोना से जूझ रही राजधानी में पिछले एक हफ्ते से संक्रमण के फैलाव में थोड़ी कमी नजर आने लगी है। पिछले एक हफ्ते से मरीजों की संख्या मोटे तौर पर 500 से कम है। हालांकि विशेषज्ञ डाक्टरों के मुताबिक दिल्ली-मुंबई में भी बीच-बीच में ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहे हैं, इसलिए इसे स्थायी नहीं मान सकते और संख्या बढ़ भी सकती है। लेकिन पिछले एक हफ्ते से नजर आ रही कमी का असर यह है कि लगभग दो माह से फुल चल रहे शहर के कोविड सेंटरों में से 4 में रविवार को शाम 6 बजे तक एक भी मरीज भर्ती नहीं था। बढ़ते संक्रमण की वजह से प्रशासन ने राजधानी के राधास्वामी सत्संग परिसर में 2 हजार बेड का प्रदेश का सबसे बड़ा कोविड सेंटर खोलने की तैयारी पूरी कर ली है, लेकिन अभी इसे शुरू करने की नौबत नहीं आई है। राजधानी में इसकी बड़ी वजह होम आइसोलेशन में कामयाबी है। दरअसल पिछले 15 दिन में राजधानी के अस्पतालों से औसतन 114 मरीज रोजाना डिस्चार्ज हुए, वहीं होम आइसोलेशन में रोजाना औसतन 211 मरीजों ने अपनी अवधि पूर्ण कर ली और सभी स्वस्थ हैं।
भास्कर टीम ने राजधानी में पिछले दो हफ्ते में कोरोना ट्रेंड में बदलाव की पड़ताल की है। पिछले कुछ दिन से शहर के बड़े अस्पतालों में लक्षण वाले मरीज ही भर्ती हो रहे हैं। अस्पतालों की तुलना में लगभग दोगुने मरीज होम आइसोलेशन में स्वस्थ हुए हैं, इसलिए कोविड सेंटरों पर भार काफी कम हो गया है। शहर के 2 हजार बिस्तरों की क्षमता वाले राधास्वामी सत्संग के कोविड केयर सेंटर को अब तक शुरु करने की नौबत नहीं आई है। प्रयास सड्ढू, आयुर्वेदिक कॉलेज, आयुष नवा रायपुर अटलनगर और स्पोर्टस हॉस्टल में रविवार शाम 7 बजे तक मरीजों की संख्या शून्य थी, यानी वहां एक भी मरीज नहीं था। शहर में 7320 मरीजों को रखने की क्षमता हाल के दिनों में बनाई गई, लेकिन अब इसकी तुलना में अस्पताल में भर्ती मरीजों की तादाद कम हो रही है।

औसतन 10 दिन में छुट्टी : अस्पताल से औसतन दस दिन बाद ही मरीजों को डिस्चार्ज किया जा रहा है। कोविड केयर सेंटर से न्यूनतम पांच से दस दिन के भीतर मरीज इलाज करवा कर छुट्टी पा रहे हैं। होम ईइसोलेशन में मरीज 10 दिन से 14 दिन तक अपनी सुविधा के अनुसार रह रहे हैं। राजधानी में पिछले तीन हफ्ते में 16 हजार मरीजों ने होम आइसोलेशन लिया। जिसमें से लगभग 120 मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती करने की नौबत ईई है। 10 हजार से ज्यादा मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, बाकी भी बिना किसी परेशानी के अपना होम ईइसोलेशन पूरा कर रहे हैं।

एक दिन में 1109 केस वाले हालात ऐसे बदले

तारीख केस
8 सितंबर 629
9 सितंबर 869
10 सितंबर 865
11 सितंबर 940
12 सितंबर 764
13 सितंबर 621
14 सितंबर 756
15 सितंबर 1015
16 सितंबर

717

17 सितंबर 1109
24 सितंबर 410
25 सितंबर 580
26 सितंबर 891
27 सितंबर 462
28 सितंबर 590
29 सितंबर 465
30 सितंबर 544
1 अक्टूबर 358
2 अक्टूबर 395
3 अक्टूबर 308



भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. नितिन एम नागरकर, डायरेक्टर एम्स
अक्टूबर अंत तक ट्रेंड यही रहा तो बढ़ने लगेगी उम्मीद

एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर नितिन एम नागरकर के मुताबिक शहर में बीते डेढ़ हफ्ते से राहत का ट्रेंड देखा जा रहा है़। एम्स में एक वक्त में 400 से 450 के बीच मरीज रह रहे हैं। अब अस्पताल में केवल गंभीर किस्म के कोविड पेशेंट लाए जा रहे हैं, इसलिए दबाव कम हुआ है। वैसे दिल्ली, मुंबई या पुणे जैसे शहरों में देखा गया है कि मरीजों की संख्या में कमी-वृद्धि होती रही है। रायपुर में केस कम होने की वजह लॉकडाउन इंपैक्ट भी है। दूसरा, होम आइसोलेशन ने लोगों में कोरोना को लेकर भय को कुछ कम किया है। फिर भी, अभी लोग जिस तरह सावधान हैं, अगर यही सिलसिला जारी रहा तो मरीजों की संख्या और कम हो सकती है। हमें अक्टूबर मध्य से अंत तक के ट्रेंड पर भी नजर रखनी होगी। जैसा चल रहा है, अगर इस माह तक वैसा ही चला तो बेहतर उम्मीद कर सकते हैं।



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There is not a single patient in the four small care centers of the capital, there is no need to start a large center of 2 thousand beds


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