अनुराग ने हासिल की 223वीं कैटेगरी रैंक, पिता हैं मजदूर; आंख-कान से 48% दिव्यांग अंकित पढ़ेगा आईआईटी में , October 06, 2020 at 06:31AM

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने सोमवार को जेईई एडवांस का रिजल्ट जारी कर दिया। शहर के निशांत ठाकरे ने देशभर में 633वीं रैंक हासिल की है। ओबीसी कैटेगरी में उन्हें देश में 75वीं रैंक हासिल हुई है। परीक्षा में प्रयास आवासीय बालक विद्यालय में पढ़ रहे नक्सल क्षेत्र के बच्चों ने जबरदस्त सफलता हासिल की है। स्कूल के तेजराम प्रधान ने बताया कि 65 स्टूडेंट्स ने एडवांस दिया था, जिसमें से 28 ने एग्जाम क्रैक कर लिया है। इन 28 में से 7 स्टूडेंट्स का अच्छी रैंक के दम पर आईआईटी में सलेक्शन हाेना तय है। इस स्कूल के अनुराग लकड़ा ने अपनी कैटेगरी में देशभर में 223वीं रैंक हासिल की है। वे मजदूर के बेटे हैं। वहीं, प्रयास आवासीय बालिका विद्यालय की दाे छात्राओं ने भी एग्जाम क्वालिफाई किया है। आंखाें और कान से 48 फीसदी दिव्यांग अंकित साेनी अब आईआईटी से पढ़ेगा। इस संस्थान में एडमिशन लेने वाला वाे अपने गांव कटगाेड़ी का पहला बच्चा हाेगा। अंकित प्रयास स्कूल का स्टूडेंट है।

साेशल मीडिया पर दाेस्ताें का ग्रुप बनाकर खेलते थे क्विज
मंदिर हसौद में रहने वाले निशांत ठाकरे को 633वीं रैंक मिली है। उन्होंने बताया, जेईई मेंस में केमेस्ट्री में मेरे नंबर कम आए थे, लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया में दोस्तों का ग्रुप बनाया, जिसमें राेज केमेस्ट्री से संबंधित क्विज खेलते थे। इसका नतीजा ये हुआ कि केमिस्ट्री के डाउट्स क्लीयर हाेते गए। टारगेट सेट करके डेली 6-8 घंटे सेल्फ स्टडी किया। सभी सब्जेक्ट के अलग-अलग टॉपिक के शॉर्ट नोट्स बनाया। मैंने 25 से 30 माॅक टेस्ट साॅल्व किए। टेस्ट के दौरान जिस टॉपिक के क्वेश्चन गलत होते थे, उसे दाेबारा पढ़ता था। पिता इंद्र कुमार प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। मम्मी भूमिला ठाकरे हाउस वाइफ हैं।

8 की उम्र में खराब हाे गई थी आंख पटाखाें ने छीन ली सुनने की क्षमता

अंकित साेनी ​​​​​​।


ये कहानी है अंकित साेनी की। कोरिया जिले के रहने वाले अंकित रायपुर के प्रयास स्कूल के स्टूडेंट हैं। उन्हें ओबीसी पीडब्ल्यूडी कैटेगिरी में देशभर में 30वीं रैंक मिली है। अंकित जब 8 साल के थे तब आंख में चूना चला गया था, जिससे एक आंख पूरी तरह खराब हो गई। वहीं, दूसरी भी कमजाेर है। इस हादसे के दो साल बाद पटाखाें के शाेर ने अंकित की सुनने की क्षमता भी आधी छीन ली। वे देख और सुन ताे सकते हैं, लेकिन 48 फीसदी दिव्यांग हैं। 10वीं क्लास तक आईआईटी के बारे में जानते तक नहीं थे। प्रयास में एडमिशन होने के बाद ही इसके बारे में पता चला। अंकित ने बताया, प्रयास के टीचर्स को जब मेरी समस्या के बारे में पता चला तो वो मुझे फर्स्ट बेंच में बिठाने लगे। टीचर पढ़ाते वक्त छोटा माइक यूज करते थे ताकि मैं अच्छे से सुन सकूं। अंकित इंजीनियर के साथ ही आईएएस बनने का सपना देखते हैं। उनके पिता अरविंद सोनी फॉरेस्ट गार्ड और मम्मी मंजु हाउस वाइफ हैं।

टारगेट सेट कर राेज 10 से 12 घंटे की पढ़ाई, लाॅकडाउन में वाॅट्सएप आया काम

अनुराग लकड़ा।


अंबिकापुर के रहने वाले अनुराग लकड़ा भी प्रयास के स्टूडेंट हैं। उन्हें एसटी कैटेगरी में देशभर में 223वीं रैंक मिली है। उनका आईआईटी में एडमिशन तय है। उन्होंने बताया, डेली 10 से 12 घंटे पढ़ाई करता था। स्कूल में राेज 2-2 घंटे फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ्स की क्लास लगती थी। बाकी समय में सेल्फ रिवीजन करता था। डेली का टारगेट बनाता था कि आज इतना कोर्स कंपलीट करना है। उसे पूरा करने के बाद ही साेता था। लाॅकडाउन हाेने के कारण शुरुआत में पढ़ाई काफी प्रभावित हुई। सर वाॅट्सअप ग्रुप में पेपर भेजते थे, जिसे हम सॉल्व करते थे। मैंने 30 से ज्यादा माॅक टेस्ट सॉल्व किए। खुद के बनाए नोट्स से रिवीजन करता था। अनुराग के पिता छोटसाय राम मजदूरी करते हैं। मम्मी सुनीता लकड़ा हाउसवाइफ हैं।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
निशांत ठाकरे अपने पैरेंट्स के साथ।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3jACreT

0 komentar