सड्डू के प्रयास हाॅस्टल में 26 सितंबर, उपरवारा सेंटर में 3 अक्टूबर से एक भी नया मरीज नहीं , October 08, 2020 at 06:34AM

संदीप राजवाड़े | होम आइसोलेशन के सफल प्रयोग और पिछले 15 दिन से राजधानी में कोरोना संक्रमण पर थोड़ी कमी का असर ये हुआ है कि बुधवार को मौजूदा शहर और नया रायपुर के सब मिलाकर 730 बेड वाले दो कोविड सेंटरों को बंद कर दिया गया है। बंद होने वाले सेंटरों में सड्डू का प्रयास हॉस्टल (300 बेड) और नवा रायपुर में आयुष विवि उपरवारा परिसर (430 बेड) शामिल है। प्रयास हाॅस्टल में पिछले 10 दिन से और उपरवारा में पिछले 4 दिन से न कोई संक्रमित है, और न ही नया भर्ती हुआ है। यहां से मेडिकल स्टाफ भी हटा लिया गया है। यही नहीं, एजुकेशन सेक्टर से जुड़े कुछ और कोविड सेंटरों को भी जल्दी बंद करने की बात आ रही है, जो दो-तीन दिन से खाली हो चुके हैं और कोई आ भी नहीं रहा है। हेल्थ अफसरों का कहना है कि ऐसे सेंटर भी जल्दी बंद कर दिए जाएंगे। अब केवल वही सेंटर चालू रखे जाएंगे, जहां बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा भी मिले।
राजधानी में अभी एम्स व मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल समेत 11 सेंटर हैं, जहां कोरोना मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इन सभी सेंटर्स को मिलाकर 3242 बेड हैं। इनमें भी अभी 30 फीसदी बेड खाली हो चुके हैं, यानी 70 फीसदी मरीज ही भर्ती हैं। कोविड सेंटरों में तो मरीज लगातार कम हो रहे हैं। यही वजह है कि प्रयास हॉस्टल सड्डू और नया रायपुर आयुष विवि के अस्थायी कोविड सेंटर को लगभग बंद कर दिया गया है। हेल्थ अफसरों का कहना है कि मरीज कम आ रहे हैं, लेकिन अब स्वास्थ्य अमले का फोकस इस बात पर है कि कोविड सेंटरों में भी अधिकांश बेड पर आक्सीजन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए।

उपरवारा से 850 मरीज ठीक, प्रयास सेंटर 10 दिन से खाली
भास्कर को उपरवारा सेंटर के इंचार्ज डा. विमल राय ने बताया कि यहां 430 बेड हैं, लेकिन 3 अक्टूबर से एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया है। जबकि इसे शहर में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने की वजह से डेढ़ माह पहले यानी 29 अगस्त को शुरू किया गया था। 3 अक्टूबर तक यहां कुल मिलाकर 850 मरीजों का इलाज हुआ और सभी स्वस्थ होकर लौटे। चूंकि अब मरीज नहीं आ रहे हैं, इसलिए यहां के 80 फीसदी मेडिकल स्टाफ को अन्य सेंटर में शिफ्ट किया गया है और नया मरीज भर्ती नहीं किया जा रहा है। सड्डू स्थित प्रयास हास्टल के कोविड सेंटर इंचार्ज डॉ विकास तिवारी ने बताया कि यह सेंटर 3 सितंबर को शुरू किया गया था। इस सेंटर में 28 मरीज आए, जिसमें से 2 को अस्पतालों में रेफर करना पड़ा और 6 यहां रहने के बाद होम आइसोलेशन में चले गए। शेष 20 स्वस्थ हो गए। पिछले यहां 26 सितंबर से कोई मरीज भर्ती नहीं हुआ है। इसलिए यहां का पूरा मेडिकल स्टाफ दूसरे सेंटर में भेज दिया गया है। केवल कुछ सफाई कर्मचारियों को ही इस सेंटर में इमरजेंसी के हिसाब से रखा गया है।

कई बड़े सेंटर जल्द खाली : नया रायपुर स्थित होटल मैनेजमेंट कोविड सेंटर को शुरू हुए एक महीने से कुछ ज्यादा हुआ है। यहां हेल्थ विभाग के उपलब्ध बेड स्टेटस के अनुसार 7 अक्टूबर की रात 8 बजे तक नया रायपुर स्थित होटल मैनेजमेंट कोविड सेंटर में 700 बेड हैं, जिनमें से 582 बेड खाली हैं। वहाँ अभी 118 मरीज भर्ती हैं। सीएमएचओ डॉ मीरा बघेल ने बताया कि होटल मैनेजमेंट प्रबंधन ने आग्रह किया है कि यहां भी मरीजों की भर्ती कम हो रही है, इसलिए अगर जरूरत न हो तो इसे संस्थान को लौटा दिया जाए। हेल्थ अफसरों ने प्रबंधन से कह दिया है कि अभी जो मरीज भर्ती हैं, जब सकती छुट्टी हो जाएगी, तब यह परिसर लौटा दिया जाएगा। इसी तरह, हिदायतउल्ला लाॅक यूनिवर्सिटी के हास्टल में भी 500 बेड का कोविड सेंटर खोला गया था, लेकिन यहां के सभी बेड खाली हैं। इसे भी संस्थान को वापस लौटाया जा सकता है।

मरीज नहीं, इसलिए बंद
"राजधानी में अभी रोजाना औसतन 300 मरीज आ रहे हैं। उनमें ज्यादातर होम आइसोलेशन ले रहे हैं। मरीज नहीं आ रहे हैं, इसलिए सड्डू में प्रयास व उपरवारा आयुष सेंटर को बंद किया गया है। कुछ और संस्थानों में बने अस्थायी कोविड सेंटर भी खाली हैं, जिन्हें लौटा दिया जाएगा। जो सेंटर बचेंगे, उनमें ऑक्सीजन बेड बढ़ा रहे हैं।"
-डॉ मीरा बघेल, सीएमएचओ रायपुर

1863 टीम के 4677 सदस्य करेंगे करीब 5 लाख घरों का सर्वे
कोरोना संक्रमितों की पहचान करने के लिए जिलेभर में सबसे बड़ा अभियान शुरू हो गया है। शहर के 79 वार्डों समेत जिले के हर इलाके में सर्वे के लिए 1863 टीम बनाई गई है। इसमें 4677 सदस्यों को शामिल किया गया है। इन सभी दलों को लक्ष्य दिया गया है कि वे 12 अक्टूबर तक 5 लाख घरों का सर्वे करें। कोरोना लक्षण वाले मरीजों की सर्वे रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को दी जाएगी। ताकि जल्द से जल्द ऐसे मरीजों की कोरोना जांच के साथ ही उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया जा सके। कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन ने साफ कर दिया है कि इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सर्वे के दौरान जो मरीज कोरोना से पीड़ित मिलेंगे उन्हें मौके से ही अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। इसके लिए दलों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।


प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कोरोना लक्षण वाले व्यक्तियों को संदिग्ध मरीजों की श्रेणी में रखा जाएगा। जिन लोगों को बुखार, सर्दी, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, बदन दर्द, दस्त, उल्टी, सूंघने या स्वाद की क्षमता घटने लक्षणों वाले व्यक्तियों को संदिग्ध मरीजों की श्रेणी में रखा गया। कोरोना के संदिग्ध मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर जो ज्यादा गंभीर या बीमार होगा उसे पहले अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। 60 वर्ष से ज्यादा बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं. पांच साल से कम उम्र के बच्चों, मधुमेह, हाई बीपी, किडनी रोग, कैंसर, टीबी, सिकलसेल एवं एड्स के पीड़ितों को उच्च जोखिम वर्ग में शामिल किया गया है। ऐसी कैटेगरी के लोगों की तत्काल रैपिड एंटीजन जांच कराई जाएगी। यह रिपोर्ट निगेटिव आती है तो ऐसे सभी लोगों के सैंपल की अनिवार्य रूप से आरटीपीसीआर जांच भी करवाई जाएगी।

जिलेभर में 227 वार्ड, 5 लाख घर
शहर में 70 और जिलेभर में 227 वार्ड है। इसके अलावा 483 गांव हैं। इनमें 4.91 लाख घर हैं जिनके सर्वे के लिए 1863 जांच टीम बनाई गई है। इस सर्वे के लिए ग्रामीण और शहरी इलाकों में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं, बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मैदानी अमले की ड्यूटी लगाई गई है। दलों के काम और उसकी रिपोर्ट की मॉनिटरिंग के लिए कलेक्टर हर दिन अफसरों की बैठक भी ले रहे हैं।



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26 September in Saddu's Prayas Hostel, not a new patient from 3 October in Upvara Center


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