सर्दी-खांसी, बुखार, सांस में तकलीफ जैसे 6 लक्षण मिले तो 24 घंटे के अंदर कोरोना जांच कराना जरूरी , October 05, 2020 at 06:31AM

शहर में कोरोना की रोकथाम के लिए एक नया सर्वे फिर शुरु हो गया है। इसकी बागडोर नगर निगम के हाथों में होगी। इस सर्वे में निगम सीमा में घर घर जाकर सर्दी-खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ, शरीर में दर्द, दस्त या उल्टी होना और सूंघने या स्वाद लेने की क्षमता में कमी जैसे छह लक्षणों के आधार पर लोगों की लिस्ट बनाई जा रही है।
यही नहीं हर दिन सर्वे का डाटा फ्लो भी मेंटेन किया जा रहा है। अगर किसी परिवार में इस तरह के लक्षण वाले लोग मिले तो 24 घंटे में कोरोना जांच भी करवाना जरूरी है। इतना ही नहीं, संबंधित व्यक्ति को घर पर आइसोलेट रहने का हिदायत भी दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर स्टिकर भी लगाया जाएगा। जून से लेकर अब तक करीब चार चरणों में शहर में अलग-अलग तरह से सर्वे हो चुके हैं। पहले सर्वे में जहां एक्टिव सर्विलांस के तहत केवल बाहर से आने वाले घर परिवार के सदस्यों की जानकारी जुटाई जा रही थी। उसके बाद इसमें बुखार सर्दी खांसी जैसे लक्षणों को लेकर भी सर्वे किया गया। यही नहीं, सितंबर के महीने में ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत होने के कारण ऑक्सीमीटर से जांच भी की गई। अब नए फॉर्मेट में शरीर में दर्द, दस्त या उल्टी जैसे लक्षणों को भी जोड़ा गया है। सर्वे करने वाली टीम में पहले के फॉर्मेट में दो लोगों को 500 घर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस बार मितानिन और निगम के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी घर घर जाकर दस्तक देंगे। शहर में करीब 1900 कर्मचारी हर दिन सर्वे का काम कर रहे हैं।
सही जानकारी नहीं मिलने से सर्वे फ्लाप : अब तक कम से कम चार बार 1900 कर्मचारियों की 900 ग्रिडों की सर्वे टीमें हर घर में जा चुकी है। लेकिन फिर भी कोरोना के बढ़ते मामले नहीं रुक रहे हैं। पड़ताल में पता चला है कि ज्यादातर लोग सही जानकारियां ही नहीं दे रहे हैं। इसमें भी रसूखदार और बड़े घरों के लोग सर्वे टीमों के बार बार जाने के बावजूद घर का दरवाजा तक नहीं खोल रहे हैं। हाल ही में शहर में सर्वे टीमों के साथ बदसलूकी गाली गलौच तक की घटनाएं तक बढ़ी।

इस तरह के सर्वे अब तक हुए

  • पहला सर्वे : जुटाई सिर्फ बाहरी लोगों की जानकारी
  • दूसरा सर्वे : घर में बीमार सदस्यों का ब्यौरा
  • तीसरा सर्वे : ऑक्सीमीटर से जांच भी

सर्वे का ये तरीका

  • रायपुर और बिरगांव क्षेत्र को 900 ग्रिड में बांटा
  • 1800 से ज्यादा सर्वे कर्मचारी
  • 2 लोग को 500 घर तक जाना है

छोटे बच्चे और बुजुर्ग हाईरिस्क में
नए सर्वे में हाईरिस्क की श्रेणी में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के साथ 60 साल या इससे ज्यादा उम्र के लोगों को रखा गया है। इसमें बीपी, शुगर, किडनी, कैंसर, टीबी और एड्स जैसी गंभीर बीमारियों से अलावा गर्भवती महिलाओं पर भी फोकस बढ़ाने के लिए कहा गया है।

"संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए जरूरी है कि नए सर्वे में सभी लोग सही सही जानकारी दें। जानकारी छिपाने से व्यक्ति का खुद का नुकसान भी है, क्योंकि इससे सही समय पर उसका इलाज शुरु नहीं सकता है।"
-प्रियंका शुक्ला, एमडी, एनएचएम



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प्रतीकात्मक फोटो।


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