मुंगेली में बना ऋचा जोगी का जाति प्रमाणपत्र विवादों में, कांग्रेस के 6 विधायकों ने खोला मोर्चा, राज्यपाल से मिले , October 08, 2020 at 06:34AM

मरवाही चुनाव में नामांकन के पहले ही सियासी दांव-पेंच तेज हो गया है। जोगी कांग्रेस के प्रमुख अमित जोगी की पत्नी ऋचा जोगी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के 6 विधायकों ने राज्यपाल से मुलाकात कर कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के जांच की मांग की है। उल्लेखनीय है कि हाल में मुंगेली में ऋचा जोगी के द्वारा बनवाए गए जाति प्रमाण पत्र की जांच के लिए कलेक्टर ने नोटिस जारी किया है।
मरवाही में 9 अक्टूबर से नामांकन शुरू हो जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि अमित जोगी वहां पिता अजीत जोगी की जगह लेने मैदान में उतरेंगे। उनके नामांकन में किसी तरह की कानूनी अड़चन आने पर ऋचा जोगी चुनाव लड़ सकती हैं। ऋचा के प्रमाण पत्रों को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस विवाद के बीच ही कांग्रेस के 6 विधायकों शिशुपाल शोरी, यूडी मिंज, मोहित केरकेट्टा,इंदरशाह मंडावी, कुंवर सिंह निषाद,गुलाब कमरो ने राज्यपाल से मुलाकात कर इस मामले को उठाया है।विधायकों ने राज्यपाल को बताया कि मरवाही सीट आदिवासी के लिए आरक्षित है। लेकिन फर्जी जाति प्रमाण पत्र से अजीत जोगी वहां का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

हाईपावर कमेटी द्वारा 23 अगस्त 2019 को जोगी की जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया है। वहीं जोगी का जाति प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित है इसलिए जोगी परिवार के किसी भी सदस्य को आदिवासी नहीं माना जा सकता। वहीं जोगी की मृत्यु के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट से मामला रद्द हो चुका है। वहीं अब ऋचा रूपाली साधु पिता प्रवीण राज साधु क्रिश्चियन समुदाय की होने के बाद भी अपने आप को आदिवासी बताकर जनता को गुमराह कर रही है तथा ऋचा जोगी एवं उनके परिवार के सदस्यों ने पढ़ाई के दौरान किसी भी जाति प्रमाण पत्र में अपने आप को आदिवासी नही बताया है। तथा ऋचा के पिता रेंजर थे परंतु कहीं भी उनकी जाति गोंड नहीं लिखी गई है।
कांग्रेस मरवाही में जोगी कांग्रेस को खुला मैदान देने के मूड में नहीं है। जोगी परिवार के लिए गढ़ माने जाने वाले मरवाही विधानसभा क्षेत्र में मंत्री जयसिंह अग्रवाल और विधायक शैलेश पाण्डेय के अलावा कांग्रेस ने बड़ी टीम झोंक दी है।

यह है जाति का विवाद
विधायकों ने राज्यपाल को बताया कि मरवाही सीट आदिवासी के लिए आरक्षित है। लेकिन फर्जी जाति प्रमाण पत्र से अजीत जोगी वहां का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। हाईपावर कमेटी द्वारा 23 अगस्त 2019 को जोगी की जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया है। वहीं जोगी का जाति प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित है इसलिए जोगी परिवार के किसी भी सदस्य को आदिवासी नहीं माना जा सकता। वहीं जोगी की मृत्यु के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट से मामला रद्द हो चुका है। वहीं अब ऋचा रूपाली साधु पिता प्रवीण राज साधु क्रिश्चियन समुदाय की होने के बाद भी अपने आप को आदिवासी बताकर जनता को गुमराह कर रही है तथा ऋचा जोगी एवं उनके परिवार के सदस्यों ने पढ़ाई के दौरान किसी भी जाति प्रमाण पत्र में अपने आप को आदिवासी नहीं बताया है। तथा ऋचा के पिता रेंजर थे परंतु कहीं भी उनकी जाति गोंड नहीं लिखी गई है।

ऋचा के पास आज अंतिम मौका
ऋचा जोगी के पास नोटिस का जवाब देने के लिए आज यानी गुरुवार तक का समय है। मुंगेली की जिला स्तरीय जांच समिति ने 29 सितंबर को ऋचा को पेण्ड्रीडीह गांव के पते पर नोटिस भेजा था, जिसमें 10 दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जवाब न देने की स्थिति में यह मान लिया जाएगा कि आपको इस संबंध में कुछ नहीं कहना है। ऐसे में आपके खिलाफ एक पक्षीय कार्यवाही की जाएगी। शेष|पेज 6

बता दें कि मुंगेली जिले के ठक्करबापा वार्ड में रहने वाले वकील सुरेश खुसरो ने 18 सितंबर को ऋचा जोगी के जाति प्रमाण पत्र की जांच कराने के लिए मुंगेली कलेक्टर को आवेदन दिया था। खुसरों ने ऋचा को जारी किया गया अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र निरस्त करने की मांग की है। इसके अलावा बिलासपुर के संत कुमार नेताम ने भी जिला स्तरीय छानबीन समिति को ऋचा के जमीन एवं अन्य दस्तावेजों का हवाला देते हुए प्रमाण पत्र निरस्त करने की मांग की है।
सुरेश खुसरो ने अपने आवेदन में दावा किया है कि ऋचा रूपाली साधु पिता प्रवीण राज साधु के परिवार के लोगों ने आज तक जमीन की खरीदी बिक्री गैर आदिवासी के रूप में करता रहा है। परिवार के किसी भी सदस्य का पढ़ाई के दौरान जाति प्रमाण पत्र भी आदिवासी वर्ग से नहीं बनाया गया है। वर्तमान में परिवार के नाम दर्ज भूमि में भी आदिवासी दर्ज नहीं है। ऋचा एवं उनके पैतृक परिवार वालों के साथ आदिवासी गोंड जाति समाज के लोगों के साथ किसी प्रकार का सामाजिक उठक बैठक नहीं है और न ही इस क्षेत्र में गोंड समाज के साथ किसी प्रकार का रोटी-बेटी का संबंध विवाह, रिश्ता आदि है।

फर्जी जाति की जांच होनी चाहिए
"स्वर्गीय जोगी की जाति प्रमाण पत्र निरस्त हो चुका है, मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में परिवार के किसी भी सदस्य को आदिवासी नहीं माना जा सकता है। इसलिए उनके पुत्र और बहू के प्रमाण पत्र की भी जांच होनी चाहिए।"
-मोहन मरकाम, अध्यक्ष, पीसीसी

जहां रहती हैं वहां नहीं भेजा नोटिस
"ऋचा की जाति पर कुछ लोगों ने मुंगेली कलेक्टर के पास आपत्ति की है। ऋचा जिस पते पर रहती है, वहां नोटिस क्यों नहीं भेजा गया। क्या कलेक्टर ऋचा से पक्ष जाने बिना ही कार्रवाई की तैयारी में हैं।"
-अमित जोगी, अध्यक्ष जोगी कांग्रेस

आशंका इसलिए किया आवेदन
"अमित ने जिस तरह से आवेदन किया है, उससे उन्हें यह आशंका रही होगी कि चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है। जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार कलेक्टर को है। जोगी परिवार में पहले भी जाति को लेकर विवाद रहा है।"
-धरमलाल कौशिक, नेता प्रतिपक्ष



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राज्यपाल से मिलकर कांग्रेस के िवधायकों ने कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की जांच की मांग की।


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