कोरोना के संक्रमण की वजह से रावण के पुतला बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं , October 03, 2020 at 06:26AM

कोरोना संक्रमण हर त्याेहार की तरह दशहरे के रावण दहन पर भी असर डालने जा रहा है। शहर में रावण दहन करने वाली समितियां अभी तक निर्णय नहीं ले पाई हैं कि वे रावण दहन करेंगी की नहीं। सभी समितियां शासन की गाइड लाइन का इंतजार कर रही हैं। वहीं समितियों का कहना है कि अगर शासन अनुमति भी देती है तो तैयारी नहीं हो पाएगी। इस बार चंदा भी नहीं मिलेगा। इसलिए केवल परंपरा का निर्वहन करेंगे। अभी तक रावण के पुतले बनाने वाले कारीगरों को समितियों द्वारा आर्डर तक नहीं दिया गया है। जबकि इस त्योहार की तैयारी एक महीने पहले समितियों द्वारा शुरू कर दी जाती थी। जो अभी तक नजर नहीं आ रही है। हर वर्ष आश्विन मास में कृष्ण पक्ष के दसवें दिन दशहरा उत्सव मनाया जाता है। इस वर्ष 17 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होगी। वहीं 25 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाना है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम और उपाय के चलते मार्च से सितंबर तक सभी त्योहार व पर्व शासन के नियमों का पालन करते हुए मनाए गए। हाल ही में जिला प्रशासन ने नवरात्रि के लिए 29 बिंदुओं पर नियम जारी किया था। दशहरा किस तरह मनाया जाए, इसको लेकर अभी तक प्रशासन ने काेई भी आदेश जारी नहीं किया गया। समितियों ने गाइड लाइन जारी करने और अनुमति के लिए जिला प्रशासन को पत्र भी लिखा है, पर अभी तक उन्हें अनुमति नहीं मिली है। वहीं शहर में कारीगरों द्वारा छोटे-छोटे रावण के पुतले बनाकर बेचे जाते हैं। इसके लिए वे दो महीने पहले से बांस खरीदने सहित बनाने की प्रक्रिया शुरू कर देते थे। हर साल लाखों का कारोबार रावण के पुतले का करते थे, इस बार उन्होंने भी अपनी तैयारी नहीं की है।

समितियों को शासन की गाइडलाइन का इंतजार
हनुमान मंदिर चौक पुराना बस स्टैंड समिति के देवा कश्यप ने कहा कि अभी तक शासन की गाइड लाइन नहीं आई है। इसलिए इस बार कोई तैयारी नहीं है। गाइडलाइन आए तो विचार किया जाएगा। हर साल रावण दहन में लगभग 2 लाख रुपए का बजट रहता है। शनिचरी बाजार, लाल बहादुर स्कूल समिति के सदस्य अशोक साहू ने कहा कि इस बार चंदा मिलने की कम उम्मीद है। लगभग ढाई लाख रुपए का बजट हर साल रहता है। रविवार को बैठक कर हिसाब-किताब करेंगे। फिर शासन के नियम के अनुसार निर्णय लेंगे। हिंदुस्तानी सेवा समाज, रेलवे क्षेत्र समिति के सी नवीन कुमार ने कहा कि रेलवे मैदान में लगभग 20 हजार से ज्यादा लोग रावण दहन देखते आते हैं। ऐसे में भीड़ को काबू कर पाना मुश्किल होगा। शासन को अनुमति के लिए पत्र लिखा है। अनुमति नहीं मिली है। इसलिए कोई तैयारी नहीं है। रावण दहन का हर साल का बजट साढ़े 3 लाख रुपए का रहता है।

पिछले वर्ष इन समितियों ने जलाए थे इतने फीट के रावण

  • हिंदुस्तानी सेवा समाज, रेलवे क्षेत्र, 65 फीट, इस साल 70वां वर्ष है।
  • सार्वजनिक दशहरा महोत्सव पुलिस मैदान 65 फीट, इस साल 46वां वर्ष है।
  • हनुमान मंदिर चौक पुराना बस स्टैंड, 60 फीट, इस साल 44वां वर्ष है।
  • शनिचरी बाजार, लाल बहादुर स्कूल, 51 फीट, इस साल 41वां वर्ष है।
  • सरस्वती शिशु मंदिर परिसर राजकिशोर नगर, 40 फीट, इस साल 5वां वर्ष है।
  • अरपापार नूतन चौक सरकंडा, 61 फीट, इस साल 45वां वर्ष है।

रामलीला के लिए अभी तक नहीं मिली है अनुमति : रेलवे क्षेत्र में हिंदुस्तानी सेवा समाज द्वारा रामलीला का 69 सालों से आयोजन किया जाता रहा है। इस साल 70वां साल है, पर अभी तक रामलीला करने के लिए शासन से अनुमति नहीं मिली है। समिति के नवीन कुमार ने बताया कि रामलीला करने रीवा, सतना के लोग आते हैं, उनसे बात हो गई है, पर अनुमति मिलेगी तो ही उन्हें बुलाया जाएगा।



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The process of making effigy of Ravana not started due to corona infection


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