पहली बार किचन गार्डन बनाने का काॅन्टेस्ट, गमलों में उगाए पौधे, खुद बनाई खाद , October 08, 2020 at 06:37AM

मोवा स्थित बालाजी सोसायटी ने यहां रहने वाले लोगों को घर में ही किचन गार्डन डेवलप कर सब्जियां और औषधीय पाैधे उगाने के लिए प्रेरित करने अनाेखा कदम उठाया। साेसाइटी ने रहवासियाें के लिए ग्रीन रूफ साेसाइटी काॅम्पिटीशन रखा। यहां रहने वाले सभी 40 परिवाराें काे 40 दिनाें के भीतर घर की छत पर किचन गार्डन डेवलप करने का टास्क दिया गया। इसका एक मकसद ये भी था कि जब भी शहर में लाॅकडाउन लगे ताे यहां रहने वाले लाेगाें काे घर की छत से ही जरूरी सब्जियां मिल सकें। इस काॅन्टेस्ट का जबरदस्त रिजल्ट सामने आया। प्रतियाेगिता के 40 दिन पूरे हाेने के बाद अब यहां रहने वाले सभी लाेगाें की घर की छत हरी-भरी हाे चुकी है। यहां एक हजार से लेकर ढाई हजार स्क्वेयर फीट तक के मकान हैं। जगह के अनुसार किचन गार्डन डेवलप करने के लिए लोगों ने छत के अलावा सीढ़ी और पोर्च एरिया भी इस्तेमाल किया। इस प्रतियाेगिता के तहत बेस्ट किचन गार्डन डेवलप कर मीरा दास फर्स्ट, पलक अग्रवाल सेकंड और अनिता पटेल थर्ड रहीं। तीनाें ने घर की छत पर खूबसूरत गार्डन तैयार किया है।

पति की मदद से बनाया गार्डन, खुद तैयार की खाद, पड़ाेसियाें से भी शेयर
प्रतियाेगिता में फर्स्ट आने वाली मीरा दास ने पति काैशिक की मदद से किचन गार्डन तैयार किया। उन्हाेंने बताया, मैंने सबसे पहले कुम्हडा का बीज गमले में लगाया। धीरे-धीरे वह बेल की आकृति में बढ़ने लगा। जब कुम्हड़ा आने लगा तो खुद खाने के साथ सोसाइटी मेंबर्स से भी शेयर किया। मीरा खाद भी खुद बना रही हैं। किचन से निकलने वाली सब्जियों के छिलके से वाे खाद तैयार करती हैं।

गमले में डाले बीज, चालीस दिन में उगने लगी सब्जियां
पलक अग्रवाल ने बताया, मैंने गमलों में सब्जियाें के बीज उगाए थे। अब उनमें करेला और बरबट्टी जैसे सब्जियां उग रही हैं। क्वांटिटी बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन इतनी है कि कभी-कभार घर की जरूरत पूरी हाे सके। जितनी मात्रा में सब्जियां उग रही हैं, उन्हें देखकर इस बात की खुशी होती है कि हम घर में उगी केमिकल रहित सब्जियां खा रहे हैं।

बीज से लेकर मिट्टी तक पड़ाेसियाें ने दी और बन गया किचन गार्डन
अनिता पटेल ने बताया, मैंने प्लास्टिक के बेकार पड़े डिब्बाें से गार्डन डेवलप किया है। पड़ोसियों से मिली मिट्टी और खाद काे मिलाकर पौधों के लिए बेस तैयार किया। पड़ोसियों से मिले लौकी और हरी मिर्च के बीज गमले में लगाए। पौधों में नीम का पानी छिड़कती हूं, ताकि उनमें कीड़े न लगे। अब लौकी और मिर्च दाेनाें मिलने लगे हैं।

पुरानी बाल्टी-डिब्बाें में लगाए पाैधे, जानिए क्या-क्या उगाया
काॅम्पिटीशन के तहत लाेगाें ने घर की छत पर गमले, प्लास्टिक की खाली बाल्टियाें, डिब्बाें और बोतलाें में ऐसी सब्जियां उगाई हैं, जिनके लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं हाेती। ज्यादातर लाेगाें ने हरी मिर्च, धनिया, लाल भाजी, पालक भाजी, मेथी, बरबट्टी, कुम्हडा, लौकी, तोरई जैसी सब्जियां उगाईं। लोगों ने अजवाइन, अदरक, गिलोय, तुलसी, एलोवेरा, पीपली, हड़जोड़, मीठी तुलसी जैसे हर्बल पाैधे भी लगाए हैं।

हरियाली और मेलजाेल बढ़ाने का प्रयास
सोसायटी के प्रेसिडेंट मुकेश गुप्ता और सेक्रेटरी रमेश अग्रहरि ने बताया, हमने साेसााइटी में हरियाली और मेलजाेल बढ़ाने के मकसद से ये काॅम्पिटीशन रखा था। किचन गार्डन के लिए 40 दिन का समय इसलिए दिया ताकि इतने दिनाें तक गार्डनिंग करने से यह लाेगाें की आदत में शुमार हो जाए। लोगों ने कई तरह की सब्जियां लगाईं और उन्हें पड़ाेसियाें के साथ आपस में शेयर भी किया।



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