केंद्रों का जायजा लेते रह गए अफसर छह महीने बाद पता चला गड़बड़ी का , October 11, 2020 at 05:28AM

जिले में धान खरीदी के नाम पर अब तक चार खरीद केंद्र के अध्यक्ष व संचालन समिति के लोगों पर कराेड़ाें के गबन की एफआईआर हाे चुकी है। धान खरीद का एक वर्ष बीत जाने के बाद धान शार्टेज, खराब आैर रखरखाव धन राशि की हेरफेर के मामले सामने आ रहे हैं। पूर्व में खाद्य, सहकारिता विभाग और मार्कफेड के अफसरों को नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्ट देने का जिम्मा दिया हुआ था। इसके बाद इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई, इस पर शासन स्तर की जांच हो सकती है।

वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1 दिसंबर से धान खरीद हुई थी। जिसमें फरवरी के अंत तक धान खरीदी पूरी कर ली गई थी। नियमाें के मुताबिक धान खरीदे के 72 घंटे बाद उठाव कराना हाेता है। विभाग के लचर रवैये के चलते पूरा वर्ष गुजर गया आैर एक चाैथाई धान खरीद केंद्र (लगभग 20-25) का मिलान सितंबर तक नहीं हाे सका। शासन से नई धान खरीद की नीति तैयार की जाने लगी ताे साेते हुए अफसर जगे। खाद्य विभाग, उप पंजीयन विभाग के साथ मार्कफेड आदि अपने रिकार्डाें का मिलान करने में जुट गया।

जिसमें पहली ही खेप में 23 समिति एेसी पाई गई जिनकी शॉर्टेज मिलान नहीं हुआ था। हद ताे तब हाे गई जब नई नीति की प्रक्रिया पर सरकार में तैयारी शुरू हुई ताे अफसराें का इस पर ध्यान गया। मामले में कलेक्टर भीम सिंह ने कड़ाई दिखाई ताे अफसराें ने सफाई में कई बार मिलान के लिए बुलाने की बात कह पल्ला झाड़ लिया।

इसके बाद भी मामले में गड़बड़ी समझते हुए कलेक्टर ने जांच कमेटी बना कर जांच शुरू कराई ताे खरसिया ब्लाक के जैमुरा, बसनाझर में 1.29 लाख की गड़बड़ी मिल गई। इसके बाद कलेक्टर सख्त हुए ताे अब विभाग की परत दर परत लापरवाही उजागर हाे रही है। इससे शासन आैर कलेक्टर का रुख सख्त नजर आ रहा है।

इस तरह से हुआ लाखों रुपए का गबन

जांच समिति काे उलखर में 3239.05 क्विंटल धान काम मिला है। उक्त धान की सरकारी कीमत 8 लाख 97 हजार 625 रुपए है। बारदाने की कमी दो लाख 83 हजार 312 रुपए की पाई गई है। जबकि बरदुला में दो करोड़ 10 लाख 70 हजार 200 रुपए का 8428.08 क्विंटल धान राशि एवं तीन लाख 81 हजार 597 रुपए का बारदाना कम मिला। इस तरह दाेनाें समितियाें में कम पाए गए धान काे खराब बताया गया।

जांच कमेटी का मानना है कि धान खरीदी नीति कंडिका 21.1 के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं, क्षति दुर्घटना एवं चोरी से धान की गुणवत्ता अथवा मात्रा प्रभावित होने से राज्य शासन को होने वाली हानि से बचाने के लिये मार्कफेड/विपणन संघ द्वारा धान की बीमा कराए जाने का प्रावधान है। परंतु विपणन संघ द्वारा धान का बीमा संबंधी किसी प्रकार का पहल करने संबंधी जानकारी समिति काे नहीं दी गई। इस बात एफआईआर उल्लेख है।

जांच में यह कमियां निकल कर आई सामने

1. उपार्जित धान की खरीदी में परिदान तक धान के संपूर्ण रखरखाव एवं सुरक्षा हेतु समिति को 12/- की दर से राशि उपलब्ध कराई जाती है। जिसके तहत उलखर और बरदुला समिति ने 12 लाख 99 हजार 860 रुपए (प्राप्त प्रमाणों के अनुसार) खर्च किए गए हैं। जिसका कार्रवाई पंजी में उल्लेख नहीं पाया गया है। इतना ही नहीं यह धनराशि कई गुना अधिक खर्च कर दी गई। साथ ही आहरण एवं खर्च की स्वीकृति अध्यक्ष एवं प्रबंधक द्वारा अन्य संचालकों/पदाधिकारियों से नहीं ली गई है।

2. धान खरीदी नीति 2019-20 के अनुसार यदि समिति के उपार्जन केन्द्र में तय बंपर लिमिट से अधिक धान की खरीदी हो जाने पर 72 घंटे के भीतर विपणन संघ काे करा देना हाेता है। विपणन संघ द्वारा उठान न कराने पर समिति द्वारा स्वयं स्वीकृत दर पर किसी भी परिवहन कर्ता से उठाना कराना हाेता है, लेकिन समितयाें ने ऐसा नहीं किया। इस कारण धान खराब हुई।

3. धान उपार्जन केंद्रों से मिलर्स एवं संग्रहण केन्द्रों को स्वयं के व्यय पर 10 प्रतिशत धान का रैण्डम तौल कर परिवहन कर्ता को तौल पर्ची जारी कर दी धान का उठाव/परिवहन किया जाना था। जिसमें समित समिति प्रबंधक, अध्यक्ष एवं फड प्रभारियों द्वारा बिना वजन किए धान का परिवहन मिलर्स व संग्रहण केन्द्रों को किया गया।

4. धान खरीदी नीति 2019-20 के तहत विपणन संघ द्वारा 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से उठाव किया जाना था। लेकिन उपार्जन केंद्र उलखर में 21473.60 क्विंटल, उपार्जन केंद्र बरदुला में 21942 क्विंटल धान पड़ा रहा। जिसका संग्रहण केंद्रों को परिवहन आदेश एवं मिलर्स को डिलीवरी आदेश दिया जा चुका था।

5. विपणन संघ के सॉफ्टवेयर के अनुसार उलखर से कुल 894 किसानों एवं बरदुला से कुल 1006 किसानों से धान खरीद का समस्त भुगतान एपेक्स बैंक से किया गया। जिसमें 40 किलो प्रति बोरी के हिसाब से धान का परिवहन नहीं किया गया।



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Officers continue to take stock of the centers, six months later, they found out about the disturbances


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