बोरा को लेकर अड़ीं राज्यपाल, नए सचिव राजभवन ही नहीं गए , October 16, 2020 at 05:52AM

प्रदेश में राजभवन और सरकार के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है। राज्यपाल अनुसुइया उइके अपने सचिव सोनमणि बोरा को रिलीव करने के मूड में नहीं लगतीं। दूसरी ओर गुरुवार को राजभवन की उपसचिव रोक्तिमा यादव को भी हटाकर मंत्रालय के जीएडी में पदस्थ किया गया है। इधर, बढ़ते टकराव के बीच कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि सरकार की और महामहिम की अपनी-अपनी सीमाएं हैं। मालूम हो कि बुधवार को राज्यपाल के सचिव बोरा को सरकार ने हटा दिया था। इससे खपा उइके ने सीएम को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई है। बोरा राजभवन रहेंगे या जाएंगे इसे लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा रही है। सरकार की नजर राज्यपाल के कदम पर है। इधर, राजभवन में गुरुवार को दिनभर गहमा-गहमी रही। राज्यपाल ने आज किसी भी आगंतुक से मुलाकात नहीं की। उन्होंने, सचिव बोरा से घंटों बंद कमरे में बात की। राजभवन सचिवालय में प्रशासनिक काम नहीं हुए। हालांकि बोरा का नाम केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए इम्पैनल हो चुका है। उनके जाने के पहले फेरबदल से यह विवाद खड़ा हो गया।

टकराव ठीक नहीं
इधर, एक्स ब्यूरोक्रेट्स का मानना है कि राजभवन व सरकार में टकराव ठीक नहीं है। सचिव व ऐसे ही कुछ मुद्दों पर सरकार को राज्यपाल की भावनाओं व पसंद-नापसंद का ध्यान रखना चाहिए। राज्यपाल जब तक नहीं चाहेंगी वे नए सचिव को ज्वाइनिंग नहीं देंगी। वे बोरा को रिलीव कर सकती है, लेकिन अपनी पसंद के सचिव के लिए अड़ सकती हैं। पूर्व अफसरों का मानना है कि अजीत जोगी व दिग्विजय सिंह जैसे सीएम भी राजभवन से उलझने से बचते थे। सीजी-एमपी में ऐसे कई उदाहरण हैं जब उन्होंने राजभवन का सम्मान रखा। देश में राजभवन से राज्य सरकारों की टकराहट की नौबत गैर भाजपा शासित राज्यों में ही आ रही है।

किसी को सीमा लांघने का अधिकार नहीं : चौबे
मंत्री चौबे ने कहा कि संविधान प्रदत अधिकारों में सबके पावर ऑफ सेपरेशन उल्लेखित है, किसी को भी अपनी सीमा लांघने का हक नहीं है। हमने संविधान में देखा है। हमारा अनुभव है कि मंत्रिपरिषद की सलाह से ही राज्यपाल प्रदेश में सरकार की व्यवस्था को संचालित करती हैं। ये अंतिम लाइन है। हम सबको इसी मर्यादा में रहना चाहिए। नए सचिव की पदस्थापना से मर्यादा नहीं टूटी है। सीएम पत्र का जवाब देंगे।

खलको राजभवन नहीं गए, कृषि विभाग में दी ज्वाइनिंग
इस बीच गुरुवार को बस्तर कमिश्नर अमृत कुमार खलखो ने रायपुर में कृषि विभाग में तो ज्वाइनिंग दे दी, लेकिन वे राजभवन नहीं गए। उन्हें ही राज्यपाल का नया सचिव बनाया गया है। संयुक्त सचिव केडी कुंजाम ने भी ज्वाइनिंग नहीं दी है।

रमन सरकार में नरसिम्हन और दत्त से पूछकर बदले गए सचिव
इधर, बताया जाता है कि राजभवन को शिकायत है कि सरकार ने उनसे पूछकर या विश्वास में लेकर सचिव नहीं बदला। पूर्णकालिक सचिव भी नहीं दिया। राज्यपाल प्रदेश का संवैधानिक मुखिया होता है। इसके बावजूद उनसे पूछा तक नहीं गया। जबकि इससे पहले रमन सरकार में राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन, शेखर दत्त आदि की सहमति से सचिव तय होते रहे हैं।



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अनुसुइया उइके (फाइल फोटो)


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