राजभवन और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच टकराव को मंत्री चौबे ने किया खारिज, विशेष सत्र पर बनी सहमति , October 21, 2020 at 05:56PM

रायपुर के सिविल लाइंस इलाके से प्रदेश का सियासी माहौल तय होता है। वजह यह है कि राज्यपाल और तमाम मंत्री इसी इलाके में रहते हैं। बुधवार को मंत्री रविंद्र चौबे राजभवन पहुंचे। कुछ देर तक राज्यपाल से चर्चा के बाद बाहर आए तो खुश नजर आए। मीडिया से कहा कि सरकार और राज्यपाल के बीच कोई मतभेद या टकराव नहीं है। हमने विधानसभा के विशेष सत्र बुलाने की जानकारी राज्यपाल को दी थी, उन्होंने पूछा कि सत्र के एजेंडे क्या होंगे तो मैंने उन्हें जानकारी दे दी है। हमने बताया है कि विशेष सत्र के जरिए हम प्रदेश में नए कृषि कानून को बनाने पर चर्चा करेंगे। उन्होंने पूछा कि इसकी जरूरत क्यों है तो हमने जानकारी दी। राज्यपाल का अधिकार है जानन, हमने उन्हें सब कुछ बता दिया है।


बन गई सहमति
राजभवन दफ्तर के सूत्रों ने बताया कि विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर राज्यपाल ने सहमति दे दी है। प्रदेश सरकार ने 27 और 28 अक्टूबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। अब फाइनल तारीखें विधानसभा सचिवालय से जारी अधिसूचना के बाद साफ हो पाएंगी। सत्र के दौरान सरकार केंद्रीय कृषि कानूनों से अलग हटकर नया कानून बनाने जा रही है। इसके पीछे तर्क है कि किसानों के हितों की रक्षा कर सकें और केंद्र सरकार के साथ टकराव की स्थिति भी ना हो। छत्तीसगढ़ सरकार मंडी और श्रम कानून में भी संशोधन कर सकती है।


कानून का ड्राफ्ट तैयार है
दो दिन पहले कृषि मंत्री ने कहा था कि प्रदेश में नए कृषि कानून को लेकर हमने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसे विधानसभा में पेश करने की तैयारी है। इसी की जानकारी राज्यपाल के पास भेजी थी। इस ड्राफ्ट में श्रम कानून, फार्मिंग का बिल, मंडी के नियमों को शामिल किया गया है। हम हम किसानों, मजदूरों और उपभोक्ता के साथ है। सभी वर्गों को साथ रखकर ड्राफ्ट तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जो कानून लेकर आ रही है उसमें धान खरीदी की प्रक्रिया परेशानी में आ जाएगी, गरीबों को जो एक रुपए किलो में चावल मिलता है, वह प्रभावित होगा। मिलों से मजदूरों को निकाला जाएगा। हम यह सब नहीं होने देंगे।



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अब चूंकि प्रदेश में कृषि कानून को लेकर राज्य सरकार अपने नियम बनाने की तैयारी में है, जाहिर है भाजपा इसे सहन नहीं करेगी।


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