कोरोना जैसे कई संक्रमण रोकती है मां की कोख इसीलिए पॉजिटिव महिलाओं के शिशु स्वस्थ , October 23, 2020 at 05:20AM

राजधानी के अंबेडकर अस्पताल में कोरोना संक्रमित महिलाओं से पैदा हुए 300 स्वस्थ शिशु, सूरत में 241 और अहमदाबाद में कोरोना संक्रमित महिला के जुड़वा शिशुओं के कोरोना निगेटिव रहने से विशेषज्ञों में बहस छिड़ गई है कि क्या गर्भस्थ शिशुओं में मां का संक्रमण नहीं फैल पा रहा है?
भास्कर ने देश और प्रदेश के जाने-माने मेडिसिन, कोरोना और गायनी एक्सपर्ट से बात की तो विभिन्न तथ्यों और कुछ प्रारंभिक रिसर्च के आधार पर उनका कहना है कि कोरोना संक्रमित माताओं ने अधिकांशत: ऐसे बच्चों को जन्म दिया, जो कोरोना जांच में निगेटिव निकले हैं। हालांकि विशेषज्ञों में इस तथ्य को लेकर एक राय नहीं है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इसकी वजह यह हो सकती है कि महिलाओं की बच्चेदानी जिनमें गर्भस्थ शिशु पलते हैं, उसका एमनियोटिक फ्लुड या पानी और मां के खून में कोरोना संक्रमण नहीं हो रहा है। इसलिए ऐसी माताएं स्वस्थ शिशुओं को जन्म दे रही हैं। आमतौर से मां का संक्रमण नवजात में नहीं फैल रहा है, जबकि देश के ही कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा शत-प्रतिशत मान लेना उचित नहीं है। रिसर्च के बाद ही निष्कर्ष निकालना उचित होगा।

मां की कोख नैसर्गिक सुरक्षा कवच, यहां वायरल का लोड कम
डॉ. सुमन लाल, गायनेकोलॉजिस्ट मैक्स हॉस्पिटल गुड़गांव

गुरुग्राम दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर सुमन लाल के मुताबिक, मां की कोख कुदरती तरीके से शिशु का सुरक्षा कवच है। कोरोना पीड़ित कई महिलाओं के शिशु संक्रमित नहीं हैं, इसकी दो अहम वजहें नजर आती हैं। पहली यह कि मां के गर्भ में एमनियोटिक फ्लुड (सामान्य तौर पर गर्भ में पानी) में कोरोना का वायरस लोड गले और फेफड़ों की तुलना में बेहद कम हो सकता है, जिससे शिशु संक्रमण से बचा रहता है। दरअसल मेडिकल हिस्ट्री में जितनी भी महामारियां आईं, प्रसव में शिशु के सुरक्षित रहने की घटनाएं तब भी हुईं। अभी कई अस्पताल संक्रमित महिलाओं में एमनियोटिक फ्लुड का टेस्ट भी कर रहे हैं, ताकि वायरल लोड पता चले।

शिशु संक्रमित नहीं होगा यह दावे से नहीं कह सकते, निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी
डाॅ. नरेंद्र अरोड़ा, सदस्य आईसीएमआर रिसर्च टीम

आईसीएमआर की ओर से कोविड-19 के लिए बनाई गई रिसर्च और ऑपरेशन टीम के सदस्य एपिडेमोलॉजिस्ट प्रोफेसर डॉक्टर नरेंद्र कुमार अरोड़ा के मुताबिक कोरोना नई बीमारी है, इसलिए अभी रिसर्च जरूरी है। जहां तक 300 शिशुओं के संक्रमित नहीं पैदा होने की बात है तो कोई धारणा बनाने से पहले यह चार बातें समझ सकते हैं:-

मां की बच्चेदानी प्राकृतिक तौर पर शिशु के सुरक्षा कवच का काम करती है
डॉक्टर राजेश मल्होत्रा, चीफ इंचार्ज कोविड सेंटर, एम्स नई दिल्ली

ज्यादातर कोविड माताओं के बच्चे स्वस्थ पैदा हो रहे हैं। पूरी दुनिया में इसी तरह का ट्रेंड देखा जा रहा है। कुछ एक प्रतिशत बच्चे ही जन्मजात कोरोना बीमारी के साथ जन्म ले रहे हैं। दरअसल मां की बच्चेदानी प्राकृतिक तौर पर सुरक्षा कवच का काम करती है। इसके बावजूद कई बार वायरस या इंफेक्शन इस सुरक्षा कवच को तोड़कर बच्चे तक संक्रमण पहुंचा देते हैं। कोविड पॉजिटिव मां के भीतर जो एंटीबॉडी बनती है, वह रक्त के जरिए बच्चे तक पहुंचती है। ये प्रकृति का सिस्टम है कि मां के जरिए इस तरह की प्रतिरोधक क्षमताएं बच्चे तक पहुंचती हैं। कोरोना के मामले में भी ठीक ऐसा ही हो रहा है। नई गाइडलाइन के मुताबिक, कोरोना पॉजिटिव महिलाओं को उनके नवजात के साथ ही रखा जा रहा है। बहुत ज्यादा सीवियर इंफेक्शन होने पर ही ऐसी माताओं से बच्चों को अलग रखा जाता है।

  • ऐसा बिलकुल नहीं है कि मां को कोरोना है तो नवजात शिशु को नहीं हो सकता।
  • ऐसा भी नहीं है कि संक्रमित माताओं के शिशुओं को संक्रमण होगा।
  • नवजात बच्चों में कोरोना का सीवियर अटैक होने के चांस भी खत्म नहीं हो जाते।
  • सकारात्मक यही है कि शिशुओं में गंभीर बीमारियों के चांस कम रहते हैं।

जिस अस्पताल में बच्चे जन्मे वहां के विशेषज्ञ भी मानते हैं रिसर्च जरूरी
अंबेडकर अस्पताल के ऑब्स एंड गायनी विभाग की एचओडी रहीं और अब सिम्स बिलासपुर की डीन डॉ. तृप्ति नागरिया के अनुसार कोरोना संक्रमण का असर गर्भस्थ शिशु में होने की आशंका बनी रहती है। लेकिन जिस तरह अस्पताल में संक्रमित माताओं के बच्चे लगातार बिना संक्रमण के जन्म ले रहे हैं, उसकी केस स्टडी से यह बात तो आई है कि बच्चा तभी संक्रमित हो सकता है, जब मां का ब्लड या बच्चेदानी का पानी शिशु में जाए। इस मामले में जरूर रिसर्च हो सकती है कि क्या संक्रमण का खतरा 100 प्रतिशत नहीं है?

वायरस नहीं भेद पाते मां की कोख

  • स्वाइन फ्लू पीड़ित मां का शिशु स्वस्थ पैदा होता है।
  • मां पीलिया पीड़ित हो, तो शिशु बेअसर रहता है।
  • कैंसर पीड़ित मां का बच्चा स्वस्थ ही जन्म लेता है।
  • माता को मलेरिया हो तो गर्भस्थ शिशु पर असर नहीं।

-डॉ. तृप्ति नागरिया, सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट

केंद्र सरकार की गाइड लाइन
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग पहले ही कह चुका है कि ब्रेस्ट फीडिंग से कोरोना नहीं फैलता। विभाग की एडवाइजरी है कि अगर मां कोरोना वायरस से संक्रमित है, तो भी स्तनपान बच्चे को सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है। इसलिए संक्रमित महिलाएं सामान्य तौर पर बच्चे को स्तनपान करा सकती हैं। उन्हें केवल यही करना है कि बच्चों को संपर्क में लाने से पहले वह अपने हाथ अच्छी तरह धोकर सैनिटाइज कर लें।

रिसर्च करवाएंगे: स्वास्थ्य मंत्री
कोविड पीड़ित माताओं के बच्चे को कोरोना नहीं होना सुखद संकेत है। ऐसा क्यों हुआ, इसके कारण की पड़ताल के लिए व्यापक रिसर्च करवाएंगे।
-डॉ. हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री



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प्रतीकात्मक फोटो।


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