रायपुर में हवन-पूजन, लेकिन प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए नहीं खुले पट, अंदर ही हो रही पूजा और आरती; दूर से आए भक्तों को निराशा , October 24, 2020 at 10:47AM

शारदीय नवरात्रि पर भी इस बार कोरोना का साया है। महाष्टमी का शनिवार को पूजन और अर्चन हो रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के प्रमुख देवी मंदिरों के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं। मंदिर समिति ही अंदर पूजन की व्यवस्था कर रही है। श्रद्धालुओं के नाम की ज्योत जरूर जलाई गई है। हालांकि रायपुर के महामाया और अंबे मंदिर में श्रद्धालु सीमित संख्या में ही पूजन करने पहुंचे हैं।

कोरोना के चलते श्रद्धालुओं को आरती में भी शामिल नहीं किया गया है। आरती लेने के लिए भी श्रद्धालुओं को बाहर खड़ा किया गया और खिड़की से दर्शन कराए गए।

रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर में श्रद्धालुओं की लाइन लगी है। हालांकि हर बार की अपेक्षा इस बार भीड़ बहुत कम है। मंदिर के अंदर एक बार में दो लोगों से ज्यादा लोगों को नहीं जाने दिया जा रहा है। मंदिर के अंदर पुजारी ही हवन पूजन कर रहे हैं। लोगों को आरती और पूजन में शामिल होने की अनुमति नहीं है। दर्शन के लिए मंदिर प्रबंधन ने बाहर स्क्रीन लगवाई है।

पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर में श्रद्धालुओं की लाइन लगी है। हालांकि हर बार की अपेक्षा इस बार भीड़ बहुत कम है। मंदिर के अंदर एक बार में दो लोगों से ज्यादा लोगों को नहीं जाने दिया जा रहा है।

द्वार से सीधे नहीं दिखती मां महामाया, सूर्यास्त में किरणें करती हैं चरण स्पर्श
रायपुर में मां महामाया देवी मंदिर में विराजी मां की मूर्ति द्वार से सीधे नहीं दिखाई देती। मान्यता है कि कल्चुरि वंश के राजा मोरध्वज, खारुन नदी से प्रतिमा को सिर पर उठाकर पैदल ले जा रहे थे, थक गए तो उन्हें शिला पर रख दिया। रखते समय प्रतिमा थोड़ी तिरछी हो गई और फिर नहीं उठी। वास्तु शास्त्र और तांत्रिक पद्धति से निर्मित मंदिर की प्रतिमा पर सूर्यास्त के समय किरणें माता के चरणों का स्पर्श करती हैं।



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शारदीय नवरात्रि पर भी इस बार कोरोना का साया है। महाष्टमी का शनिवार को पूजन और अर्चन हो रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के प्रमुख देवी मंदिरों के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं। रायपुर के महामाया और अंबे मंदिर में श्रद्धालु सीमित संख्या में ही पूजन करने पहुंचे हैं। 


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