सांकेतिक रावण दहन के साथ मना उत्सव, सीएम बोले- इस पर्व से सत्य की राह पर चलने की मिलती है सीख , October 25, 2020 at 10:00PM

रायपुर के रावणभाटा मैदान में ब्रिटिश काल से दशहरा मनाने की परंपरा रही है। रविवार को पहला मौका था जब यहां पर रावण के पुतले का दहन नहीं हुआ। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल , महापौर एजाज ढेबर और नगर निगम के सभापति की मौजूदगी में राम बने कलाकार ने रावण की प्रतिमा की ओर तीर चलाकर रावण का सांकेतिक वध किया। इस कार्यक्रम में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, दशहरा का पर्व असत्य पर सत्य की जीत, अंधकार पर प्रकाश की जीत और अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व है। यह पर्व हमें अपने अहंकार तथा बुराई को समाप्त कर अच्छाई तथा सत्य की राह पर चलने का सीख देता है।

कार्यक्रम स्थल पर राम बने कलाकार ने रावण की बड़ी प्रतिमा की तरफ तीर चलाकर वध किया।

सन 1554 से जारी है परंपरा
उन्होंने आगे कहा कि श्री दूधाधारी मठ द्वारा आयोजित यह उत्सव छत्तीसगढ़ के सबसे प्राचीन दशहरा उत्सव में माना जाता है। इसके लिए उन्होंने संरक्षक राजेश्री महंत डॉ. रामसुंदरदास और अध्यक्ष मनोज वर्मा के प्रयास को सराहा । उन्होंने बताया कि राजधानी रायपुर में नागपुर के भोसले वंश के शासक रघुराव जी भोसले द्वारा संवत 1610 यानी सन 1554 में श्री दूधाधारी मठ की स्थापना की गई थी। तब से लेकर अब तक यहां दशहरा उत्सव उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है।

रावण की इसी प्रतिमा की वजह से इस मैदान को रावणभाटा मैदान कहा जाता है।

कोरोना रूपी राक्षस को मारना है
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी पहुंचे उन्होंने कहा कि इस बार कोरोना महामारी के बीच हम उत्सव मना रहे हैं। रावण रूपी बुराई का वध भगवान श्री राम ने किया। हमें अब सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाने जैसी आदतों का पालन कर कोरोना रूपी इस राक्षस का अंत करना है। कार्यक्रम में पार्षद सतनाम पनाग, पार्षद समीर अख्तर, पार्षद सरिता वर्मा, चंद्रशेखर शुक्ला, प्रभात मिश्रा, सुशील ओझा, पुनीत देवांगन वगैरह मौजूद थे। आम लोगों को कार्यक्रम स्थल पर एंट्री नहीं दी गई।



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फोटो रायपुर रावणभाटा मैदान की है। यहां भगवान बालाजी की पालकी को पूजने के बाद कार्यक्रम का आगाज हुआ।


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