कोरोना को हराने के लिए भीड़ भरे बड़े उत्सव नहीं हुए, घर-घर जले रावण , October 26, 2020 at 05:22AM

विजयादशमी के अवसर पर रविवार को हमेशा की तरह अच्छाई जीती, बुराइयों का रावण दहन हुआ। कोरोना महामारी के बीच भी विजयादशमी का उत्सव मनाने रंग-बिरंगे कपड़ों में सजे धजे बच्चे, युवक-युवतियां और बुजुर्ग सभी उत्साहित नजर आए। कोरोना के कारण इस बार शहर में रावण पुतले दहन के बड़े सार्वजनिक आयोजन नहीं हुए, लेकिन लोगों ने घर-घर के बाहर रावण पुतले का दहन किया। शाम से लेकर देर रात माता के पंडालों में दर्शन करने भक्तों की भीड लगी रही तो वहीं लोगों ने रावण पुतलों का दहन भी घर के बाहर कर बुराइयों का दहन किया। शनिचरी बाजार स्थित लाल बहादुर स्कूल में परंपरा का निर्वहन करते हुए 8 फीट का रावण पुतला दहन किया गया। इसके अलावा कुछ अन्य समितियों ने भी रावण दहन की परंपरा का निर्वहन किया। बड़े आयोजनों को छोड़ दे तो इस साल लगभग 1 हजार से अधिक रावण पुतलों का शहर में दहन कर दशहरा मनाया गया। इस मौके पर पारंपरिक सोन पत्ती का वितरण कर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। शहर में घर-घर और मोहल्ले में रावण पुतले जलाने की काफी पुरानी परंपरा है। रावण पुतले को बच्चे अपने हाथों से तैयार करने के साथ ही खरीदते भी है। बच्चों के लिए रावण के पुतले खिलौने की तरह खूब बिके।

कई जगहों पर हुए भंडारे
नवमीं और दशमी एक ही दिन पड़ने के कारण शहर में रविवार को कई जगहों पर कन्या पूजन के साथ ही भंडारे का आयोजन भी हुआ। लोगों ने श्रद्धा के साथ भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। कहीं पर खिचड़ी तो कहीं पूड़ी सब्जी भंडारे में दिया गया।
लोगों को मास्क भी दिए गए
पंडालों में दर्शन करने आने वाले लोगों को सेनेटाइजर कराने के साथ मास्क नहीं लगाए होने पर मास्क भी दिए गए। इसके साथ कई संस्थाओं के लोगों ने पंडालों में जाकर मास्क वितरित किए।



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Big crowds did not take place to defeat Corona, Ravana burnt house to house


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