चावल से कम खर्च में निकालेंगे प्रोटीन, पेटेंट के लिए दिल्ली जाएगा प्रस्ताव , October 26, 2020 at 05:52AM

सुधीर उपाध्याय | राजधानी में कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चावल से कम खर्च में प्रोटीन निकालने की विधि खोज निकाली है। दिलचस्प बात यह है कि तकनीक सस्ती और सरल भी है। एक ही विधि से चावल से प्रोटीन ही नहीं, स्टार्च को भी अलग किया जा सकेगा। प्रोटीन फूड सप्लीमेंट बनाने के काम आएगा और स्टार्च से ग्लूकोज सिरप बनाया जा सकेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका एक फायदा यह भी होगा कि चावल से जुड़े किसानों की आमदनी भी बढ़ सकती है।
अब तक चावल से प्रोटीन व स्टार्च निकालने के काम को मुश्किल माना गया है। अभी बाजार में जो प्रोटीन सप्लीमेंट बिक रहे हैं, वे ज्यादातर मक्का व गेंहू से निकाले गए प्रोटीन से बनते हैं और यही चलन में हैं। चावल से प्रोटीन निकालना काफी खर्चीला होता है। इसलिए इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है। इसीलिए नई विधि को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सस्ती भी है और आसान भी। इंदिरा गांधी कृषि विवि के बायोटेक विभाग में धान से प्रोटीन व स्टार्च निकालने के लिए करीब सालभर से अनुसंधान चल रहा है। इसमें वैज्ञानिकों को कामयाबी मिली है। नई विधि के पेटेंट की तैयारी है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर दिल्ली भेजा जाएगा। अफसरों का कहना है कि चावल से प्रोटीन निकालने की इससे सस्ती विधि देश में नहीं है। इसलिए पेटेंट की तैयारी है।

सौ ग्राम चावल से 10 ग्राम प्रोटीन : अफसरों ने बताया कि कृषि विवि ने जो विधि विकसित की है, इसके तहत 100 ग्राम चावल से 10 ग्राम तक प्रोटीन पाउडर निकाला जा सकता है। इसमें शुद्ध प्रोटीन 8 ग्राम तक है। एक अनुमान के तहत बाजार में प्रोटीन 2 हजार रुपए प्रति किलो तक बिक रहे हैं। चावल से तैयार प्रोटीन एक हजार रुपए में भी बिके तो भी फायदा होगा। वह ऐसे कि, मान लिया जाए कि चावल 40 रुपए के हिसाब से 100 किलो खरीदा गाया। इसका खर्च 4 हजार रुपए आया। प्रोटीन व स्टार्च निकालने में हजार रुपए और खर्च हुए। इस तरह से पूरा खर्च 5 हजार रुपए आया। 100 किलो चावल में 10 किलो प्रोटीन पाउडर निकलेगा। यह हजार रुपए की कीमत से भी बिका तो 10 हजार मिलेंगे। यानी फायदा। इसके अलावा स्टार्च से ग्लूकोज का सिरप भी निकलेगा। इससे यदि हजार रुपए भी मिलते हैं तो 5 हजार खर्च कर 11 हजार रुपए कम से कम कमाए जा सकते हैं।

चावल प्रोटीन की गुणवत्ता बेहतर
कृषि विवि के अफसरों का कहना है कि मक्का व गेंहू समेत अन्य फसलों से प्रोटीन निकाले जाते हैं। यही चलन में है। लेकिन इन फसलों की अपेक्षा में चावल के प्रोटीन में गुणवत्ता ज्यादा है। चावल में 7 प्रतिशत प्रोटीन, 75 प्रतिशत स्टार्च, 11 प्रतिशत नमी, 2 से 3 प्रतिशत तेल समेत अन्य रहता है।



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फाइल फोटो।


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