छत्तीसगढ़ में कोरोना का टीका सबसे पहले 15 लाख फ्रंटलाइन वाॅरियर्स को लगेगा, सरकार तैयार कर रही स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का डाटा बेस , November 06, 2020 at 06:37AM

कोरोना के टीके देश में दिसंबर अंत तक आने के आसार हैं और इनके मिलने की दशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने इन्हें लाकर रखने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। यह भी कमोबेश तय हो गया कि टीके की पहली खेप आई तो यहां किन्हें लगेगी। शासन इस नतीजे पर पहुंचा है कि वैक्सीन जैसे ही मिलेगी, सबसे पहले उन लोगों को लगाई जाएगी, जो कोरोना के खतरे के बीच काम कर रहे हैं, यानी फ्रंटलाइन वाॅरियर हैं। ऐसे 15 लाख से ज्यादा लोगों की पहचान की गई है, जिन्हें पहले चरण में टीके लगेंगे। इस वर्ग के पूरा होने के बाद शासन कोमार्बिडिटी यानी ऐसे लोगों पर फोकस करेगा जो 45 से 60 की उम्र के हैं और उन्हें बीपी, शुगर, अस्थमा या कोई और गंभीर परेशानी है। दरअसल कोरोना में मरनेवाले अधिकांश लोग इसी वर्ग से हैं। टीके यहां लाए जाने के बाद अलग-अलग जिलों में जिन कोल्ड चेन में रखे जाने हैं, वह भी तैयार किए जा चुके हैं। कोरोना का टीका सबसे पहले सरकारी-गैरसरकारी अस्पतालों के डाक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन, मेडिकल स्टॉफ, हेल्थ वर्कर, सफाई कर्मी, सर्वे कर रही टीमों के सदस्य जिनमें मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल हैं, उन्हें लगाया जाएगा।


इसके साथ ही पुलिस, निगम अमले का टीकाकरण भी शुरू कर दिया जाएगा। सबकी सूची बनाई जा रही है। कोल्ड चेन के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जा रहा है, क्योंकि टीके आने के बाद इनकी सप्लाई में बाधा न पड़े। टीके फ्रंटलाइन वालों को पूरी तरह लग जाएंगे, तब आम लोगों में उन्हें वैक्सीन लगाई जाएगी, जिन्हें अन्य बीमारियां हैं।

फ्रंटलाइन में टीके इन्हें पहले

  • जिला प्रशासन - 2.50 लाख से ज्यादा
  • पुलिस प्रशासन - 2.50 लाख से ज्यादा
  • नगरीय प्रशासन - 4 लाख से ज्यादा
  • सफाई कर्मी - 2.50 से ज्यादा
  • आंगनबाड़ी वर्कर - 50 हजार से ज्यादा
  • शिक्षा विभाग - 1 लाख से ज्यादा
  • निजी क्षेत्र - 1 से 2 लाख करीब
  • कुल - 15.02 लाख

( संख्या प्रारंभिक आंकलन के आधार पर)

15 लाख फ्रंटलाइन वाॅरियर्स
प्रदेश में मितानिन समेत फिलहाल 71 हजार से ज्यादा का मानव संसाधन सीधे तौर पर हेल्थ विभाग में है। जबकि साढ़े 52 हजार से ज्यादा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं हैं। शिक्षा विभाग ने चूंकि कोविड सर्वे के लिए कोई सर्कुलर शिक्षा विभाग की ओर से नहीं निकाला था। लिहाजा जिलों में कलेक्टरों ने अपनी जरूरत के हिसाब से प्रायमरी से लेकर हायर सेकंडरी तक के टीचरों को सर्वे काम में लगाया था। इनकी तादाद भी करीब एक लाख से ज्यादा है। सफाई कर्मियों की तादाद भी ढ़ाई लाख से अधिक है। जबकि जिला पुलिस और नगरीय प्रशासन का करीब करीब पूरा अमला कोरोना काम में जुटा हुआ था। इनकी तादाद भी पांच लाख के लगभग है। इसके अलावा करीब एक से दो लाख से ज्यादा गैर सरकारी क्षेत्रों के फ्रंट लाइन वर्कर हैं।

कोल्ड चेन का सेटअप
स्टेट वैक्सीन स्टोर 01
क्षेत्रीय वैक्सीन स्टोर 03
जिला वैक्सीन स्टोर 27
कोल्ड चैन प्वाइंट 599
इनमें वर्किंग प्वाइंट 630
नए प्वाइंट 80



टीके के लिए टास्क फोर्स
वैक्सीनेशन के लिए राज्यस्तरीय टास्क फोर्स समिति बना दी गई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय स्टीयरिंग समिति भी बनाई जा रही है। हर जिले में वैक्सीनेशन के लिए टास्क फोर्स अलग रहेगी। वैक्सीनेशन के लिए जो सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में काम कर रहे फ्रंट लाइन कोरोना वॉरियर का जो डाटा बेस बनाया जा रहा है।

सबसे ज्यादा जरूरत इन्हें
डाक्टर, स्पेशलिस्ट 1604
डेंटल डॉक्टर 74
आरएमए 621
स्टॉफ नर्स 3379
रेडियोग्रॉफर 209
लैब तकनीशियन 994
आई स्पेशलिस्ट 508
फॉर्मासिस्ट, ड्रेसर 1501
बहुउद्देश्यीय कार्यकर्ता 9471
मितानिन (लगभग) 71000
कुल 89,361

(स्त्रोत - हेल्थ विभाग)

कोल्ड चेन पर फोकस
प्रदेश में आधे से ज्यादा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाने के लिए कोल्ड चैन को फौरी तौर पर मजबूत बनाया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में 80 से ज्यादा कोल्ड चैन और बनाए जा रहे हैं। प्रदेश में कोल्ड चैन का ये सेटअप है।

पहले ही चरण में 30 लाख टीके लाने की कोशिश: टीएस
स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा-हम तो चाहते हैं कि प्रदेश की 3 करोड़ आबादी के लिए पहली बार में ही वैक्सीन मिल जाए, लेकिन यह टीके के उत्पादन पर निर्भर होगा। अगर केंद्र सरकार प्रोडक्शन और आबादी के अनुपात में टीकाकरण का फार्मूला बनाती है, तब हम चाहेंगे कि कम से कम दस फीसदी आबादी यानी 30 लाख वैक्सीन तो हर हाल में मिल जाएं। स्वास्थ्य मंत्री ने सवाल किया कि अगर एक कंपनी का टीका आता है और वह कारगर नहीं रहेगा तो क्या करेंगे? इसका जवाब भी कुछ देर बाद उन्होंने ही दिया - स्वभाविक तौर पर दूसरे टीके को बुलाएंगे। वैक्सीन लगने के बाद उसके क्या नतीजे रहते हैं, ये भी देखना होगा। अभी व्यापक फोकस इसलिए है क्योंकि अगर अचानक टीके आ जाएं तो प्रदेश की व्यवस्था न चरमरा जाए।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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