इस बार इंजीनियरिंग में सिर्फ 18 विदेशी बच्चों ने कराया रजिस्ट्रेशन, जबकि पिछले सालों में यह औसत 60 का , November 30, 2020 at 06:21AM

कोरोना की वजह से विदेशों से भिलाई में आकर पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में कमी आई है। हर साल जहां 60 से अधिक बच्चे यहां आकर इंजीनियरिंग सहित अन्य विषयों की पढ़ाई करते थे, इस बार अब तक केवल 18 स्टूडेंट्स ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों से छात्र यहां आकर पढ़ाई करते थे। इस बार अफ्रीका के 8 देशों में अंतराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई है। इसके अलावा नेपाल में 12 वीं के रिजल्ट पर रोक लगा दी गई है।

कोरोना का असर : आठ अफ्रीकी देशों और नेपाल से पहुंचते रहे हैं स्टूडेंट्स

पूरे प्रदेश में सिर्फ भिलाई में ही है यह फॉरेन कोटा

पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में सिर्फ भिलाई के संतोष रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट में ही फॉरेन कोटा में एडमिशन होते हैं। हर साल यहां औसत 60 स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग, फार्मेसी, बीबीए और एमबीए में प्रवेश लेते हैं। लेकिन इस बार सिर्फ 18 छात्रों के ही प्रवेश प्रक्रिया की है। डायरेक्टर सोनल रूंगटा ने बताया कि विदेशों से आने वाले छात्रों की संख्या कम हो गई है।

ट्विनसिटी है राज्य का सबसे बड़ा एजुकेशन हब

छत्तीसगढ़ के भिलाई में आकर करीब 8 देशों के स्टूडेंट्स पढ़ाई करते हैं। भिलाई के संतोष रूंगटा कॉलेज में सूडान, इरीट्रिया, जिबोटी, सोमालिया, नेपाल, बाली, मोरक्को जैसे देशों से आकर पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या काफी ज्यादा है। विदेशों से आकर पढ़ाई करने वाले कुल 221 छात्र हैं। जो इंजीनियरिंग, फार्मेसी, बीबीए, एमबीए जैसे विषय में शामिल हैं।

राष्ट्रीय कमेटी की जांच के बाद मिलता है प्रवेश

विदेशों से राज्य में आकर पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स के लिए कितनी अच्छी सुविधा मौजूद है इसकी जांच करने राष्ट्रीय स्तर की टीम आती है। उसके बाद ही वहां विदेशी छात्रों को पढ़ाने की परमिशन मिलती है। संतोष रूंगटा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर सोनल रूंगटा ने बताया कि सुपर एनवली कोटा के तहत विदेशी छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।

बिना काउंसलिंग के मिलता है सीधा प्रवेश

कॉलेज में फिलहाल अब तक 18 छात्रों ने ही प्रवेश लिया है। बताया जा रहा है कि 5 दिसंबर तक प्रवेश की प्रकिया चलनी है। विदेश से आने वाले छात्रों के लिए काउंसलिंग की प्रकिया नहीं होती है। इन्हें सीधा कॉलेजों में प्रवेश मिलता है। अब तक जिन्होंने प्रवेश लिया है ये वो छात्र हैं जो पिछले साल किन्हीं कारणों से प्रवेश नहीं ले सके या छूट गए थे।



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This time, only 18 foreign children got registered in engineering, whereas in the last years, it averaged 60.


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