मोतियाबिंद ऑपरेशन के भिलाई में 4102 तो प्रदेश में 55,900 केस 7 माह से अटके, 25% प्रकरण में आंखों की रोशनी जाने का खतरा , November 07, 2020 at 06:35AM

अनुराग शर्मा | अप्रैल से अक्टूबर के बीच में जिले के 4102 से ज्यादा मोतियाबिंद के ऑपरेशन अटके हैं। पूरे प्रदेश में करीब 55,900 ऐसे मरीज हैं, जिनकी जांच भी नहीं हो पाई। कोरोना के प्रकोप के कारण हर माह होने वाले औसतन 650 ऑपरेशन की जगह मात्र 200 ऑपरेशन हो पाए हैं। अप्रैल से अक्टूबर तक जिले में एक भी सरकारी व्यवस्था के तहत मोतियाबिंद का ऑपरेशन नहीं हुआ है। इसके अलावा मई, जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में औसतन 3000 ऑपरेशन की जगह सिर्फ 1111 ऑपरेशन ही हो पाए हैं। सरकारी अस्पतालों में कोरोना काल के बीते 7 महीने में एक भी मोतियाबिंद ऑपरेशन नहीं हुआ है। इस दौरान जिले में जो 1111 ऑपरेशन बताया जा रहा है, वह सभी निजी अस्पतालों में हुए। इन सात माह से 4102 से ज्यादा ऑपरेशन नहीं हो पाने से 25% यानी कि 1000 से ज्यादा मरीजों के आंखों की रोशनी जाने का खतरा पैदा हो गया है। एक्सपर्ट्स डॉक्टरों के मुताबिक मोतियाबिंद के ऑपरेशन में अत्यधिक देरी से परेशानियां बढ़ सकती है। पांच सालों में मोतियाबिंद के ऑपरेशन को लेकर ऐसी देरी कभी नहीं हुई है। 2015 से लेकर 2019 तक अप्रैल से अक्टूबर के बीच औसतन 5000 ऑपरेशन होता रहा है। 2020 में अप्रैल से अक्टूबर के बीच 1111 ऑपरेशन निजी अस्पतालों में हुए हैं।

प्रदेश में सरकारी सेटअप में हुए 3636 के ऑपरेशन
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इन 7 महीनों में पूरे प्रदेश में केवल 3636 मरीजों का ऑपरेशन सरकारी सेटअप में हुआ। जबकि 55900 ऑपरेशन होने थे। इस प्रकार सरकारी सेटअप में मोतियाबिंद के ऑपरेशन को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई, इसके चलते आज प्रदेश भर में लोगों के आंखों की रोशनी पर बन आई है।

ये हैं वे 3 वजह जिन्होंने रोके मोतियाबिंद के ऑपरेशन
आई ओपीडी की मनाही हो जाना:
मोतियाबिंद के ऑपरेशन ठप पड़ने की सबसे बड़ी वजह यही है। क्योंकि जिले में जैसे ही कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ने लगी, आई ओपीडी को बंद कर दिया गया।

स्टॉफ की कोरोना में ड्यूटी लगना: आई डिपार्टमेंट के स्टॉफ की कोरोना ड्यूटी लगा देने के कारण भी मोतियाबिंद का ऑपरेशन नहीं हो पाया है। क्योंकि इस डिपार्टमेंट में गिनती भर कर्मचारी काम करते हैं, उनकी ड्यूटी लगा दी गई।

स्मार्ट कार्ड से इलाज हो गया बंद: राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना स्मार्ट कार्ड के तहत फ्री में मोतियाबिंद का ऑपरेशन होता रहा, अब इसे बंध कर दिया गया है। इस वजह से भी शासन ने ऑपरेशन को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई।

क्या होता है मोतियाबिंद
आंखों के नेचुरल लेंस की खराब अवस्था को मोतियाबिंद कहते हैं। इसमें आगे पूरी तरह सफेद होकर मोती का आकार ले लेता है, इससे धुंधला व दिखाई देना बंद हो जाता है।

विशेषज्ञों से जानिए मोतियाबिंद के ऑपरेशन में देरी कितना खतरनाक..
हमेशा के लिए जा सकती है आंखों की रोशनी

डॉ. बीआर कोसरिया बताते हैं कि मोतियाबिंद से पीड़ित व्यक्ति को अगर कोई डॉक्टर ऑपरेशन कराने को बोल देते हैं, तो उसे शीघ्र करा लेना चाहिए। क्योंकि इसमें ज्यादा देरी होने से कभी-कभी मोतिया अंदर फट जाता है, समस्या बढ़ सकती है।

जिनके ऑपरेशन तय थे, अब तक नहीं होना गंभीर
डॉ. कीर्ति भाटिया बताती हैं कि अप्रैल में जिनके मोतियाबिंद के ऑपरेशन होने थे, अबतक नहीं हो पाए तो उनकी आंखों की स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। क्योंकि ऑपरेशन उन्हीं के तय होते हैं, जिनकी आंख ऑपरेशन के लायक होते हैं।

देरी से इंफेक्शन के चासेंज, उसकी कोई लिमिट नहीं
डॉ. बीएल वाहने का कहना है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन समय पर नहीं होने से नेचुरल लेस में लीकेज होने लगती है। जिससे आंख में सूजन आ जाती है। इस अवस्था में इंफेक्शन फैलने के हालात बन जाते हैं। इंफेक्शन की कोई लिमिट नहीं होती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में होगा सर्वे, कराया जाएगा ऑपरेशन
"ग्रामीण स्तर पर हमारे कर्मचारी हैं, सर्वे कराया जाएगा और जांच के बाद ऑपरेशन कराया जाएगा।"
-डॉ. गंभीर सिंह, सीएमएचओ दुर्ग



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मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए बनाए गए वार्ड में लगा हुआ है 7 महीनों से ताला।


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