छत्तीसगढ़ में किसी भी वैक्सीन का ट्रायल नहीं क्योंकि ड्रग ट्रायल की अनुमति मिलने में परेशानी , December 01, 2020 at 06:32AM

प्रदेश में किसी भी कोरोना वैक्सीन का ट्रायल नहीं हो रहा है, जबकि पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र में ट्रायल चल रहा है। छत्तीसगढ़ में आखिर वैक्सीन का ट्रायल क्यों नहीं हो रहा है, इस पर दैनिक भास्कर ने एथिकल कमेटी के अध्यक्ष से लेकर कोरोना कोर कमेटी के सदस्यों से बात की। विशेषज्ञों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में किसी भी तरह के ड्रग ट्रायल की अनुमति नहीं दी जा रही है, इसलिए यहां कोरोना वैक्सीन का ट्रायल नहीं हो रहा है।
कोरोना कोर कमेटी के सदस्य डॉ. आरके पंडा का कहना है कि प्रदेश में ड्रग ट्रायल की अनुमति नहीं मिल रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कई तकनीकी कारणों से ड्रग ट्रायल की अनुमति नहीं दी जा रही है। इधर, एथिकल कमेटी के चेयरमैन डॉ. एटी दाबके का कहना है कि कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के लिए आईसीएमआर की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं आया। ट्रायल क्लाइमेट समेत कई बातों पर केंद्रित रहता। उदाहरण के लिए मध्यप्रदेश व अगर महाराष्ट्र के विदर्भ में वैक्सीन का ट्रायल हो रहा हो, तो जरूरी नहीं छत्तीसगढ़ में भी हो। दरअसल मध्यप्रदेश व विदर्भ की भौगोलिक स्थिति छत्तीसगढ़ जैसी ही है। ऐसे में हो सकता है कि प्रदेश में कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के लिए आईसीएमआर ने कोशिश ही नहीं की हो।

प्रदेश के ट्रायल वाॅलिंटियर्स का पड़ोसी राज्यों में भी ट्रायल संभव
दिल्ली के पब्लिक पॉलिसी एंड हेल्थ सिस्टम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहरिया से इस विषय पर बात की सीनियर रिपोर्टर अमिताभ अरुण दुबे ने। उन्होंने जो बताया, उन्हीं के शब्दों में...

महामारी के निदान के लिए वैक्सीनेशन के ह्यूमन ट्रायल या इंसानों पर प्रयोग के लिए आमतौर पर आबादी की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों, जेनेटिक वेरिएशन के साथ महामारी के उस क्षेत्र में स्थिति के आधार पर ट्रायल किया जाता है। साथ ही जिस अस्पताल में वैक्सीनेशन का ट्रायल हो रहा है, वहां तकनीकी रूप से कितनी दक्षता और किस स्तर का सेटअप है, ये भी देखा जाता है। साथ ही महामारी जैसे चुनौतीपूर्ण वक्त में किसी भी शहर या राज्य का चयन इस आधार पर भी किया जाता है कि वहां वैक्सीनेशन की ट्रायल के लिए कितने जल्दी और आसानी से लोग मिल सकते हैं। जैसे चीन से कोरोना की शुरूआत हुई, लेकिन वहां वैक्सीनेशन का ट्रायल नहीं हो रहा है। पूरी दुनिया में कोरोना वैक्सीनेशन के लिए कुछ ही देशों को चुना गया है। चुने हुए देशों में भी कुछ शहरों को ही इसके लिए लिया गया है। कोरोना वैक्सीनेशन के ट्रायल के लिए आमलोग एच्छिक तौर पर खुद वालंटियर बनने के लिए अपनी सहमति दी है। अगर छत्तीसगढ़ में इसका ट्रायल नहीं हो रहा है तो इसका मतलब ये नहीं है कि छत्तीसगढ़ के किसी शख्स द्वारा भरे गए वाॅलिंटियर्स फॉर्म को अमान्य कर दिया गया है। उसे भी जरूरत पड़ने पर इसका हिस्सा बनाया जा सकता है। इसके लिए उसे नजदीकी राज्य जहां ये प्रक्रिया हो रही है, उसकी सुविधा के मुताबिक बुलाया जा सकता है। फिलहाल करीब सोलह सौ लोगों पर ये ट्रायल किया जा रहा है। वैक्सीनेशन की ट्रायल प्रक्रिया का हिस्सा बने लोगों की करीब दो साल तक मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

"सभी शहरों में कोरोना वैक्सीनेशन का ट्रायल नहीं है। महामारी के वक्त में ट्रायल सीमित दायरों में ही किया जाते रहा है।"
- डॉ. नितिन एम नागरकर, डायरेक्टर, एम्स

"कोरोना वैक्सीनेशन ट्रायल एक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है, इसके अपने नियम निर्धारित होते हैं। छत्तीसगढ़ में ट्रायल नहीं हो रहा है, इसके कोई विशेष अंतर नहीं होता है, हमारे पास संसाधनों की कमी जैसी कोई बात नहीं है। चयन प्रक्रिया रेंडमली हुई है। जिसमें हमारा प्रदेश नहीं आ पाया।"
- टीएस सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री



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प्रतीकात्मक फोटो।


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